तुर्की में लोकप्रियता से कांग्रेस भारत में चुनाव कैसे जीतेगी?

संपादकीय
22 अगस्त 2013
कांग्रेस पार्टी की तरफ से कल ही यह खबर आई है कि वह आने वाले चुनाव प्रचार के लिए इंटरनेट पर ट्विटर या फेसबुक जैसे सोशल मीडिया का अधिक से अधिक इस्तेमाल करेगी। और अब यह खबर आई है कि किस तरह उसके नेता एक के बाद एक पकड़ा रहे हैं, अपने इंटरनेट पेज दूसरे देशों में थोक में लोकप्रिय बनवाते हुए। जो लोग कम्प्यूटर और इंटरनेट तकनीक को जानते हैं, वे यह भी समझते हैं कि किस तरह ऐसी लोकप्रियता खरीदी जा सकती है, और यह भी समझते हैं कि खरीदी गई लोकप्रियता किस तरह पकड़ में आ सकती है। कई हफ्ते हुए जब राजस्थान के कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के फेसबुक पेज पर दो-चार दिनों में ही बढ़ गए लाखों प्रशंसक तुर्की के निकले थे, और अब राजधानी दिल्ली में बैठे कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अजय माकन की लोकप्रियता इसी तरह भारत से अधिक तुर्की में मिली है। 
सार्वजनिक जीवन में जो लोग हैं उनको जालसाजी करने के पहले कई बार यह सोच लेना चाहिए कि उसके पकड़ में आने के बाद न सिर्फ उनका बल्कि उनकी पार्टी का कितना नुकसान होता है, साख कितनी गिरती है, और थोड़ी-बहुत जो कुछ भी असली लोकप्रियता रहती है, उसकी साख भी चौपट हो जाती है। आज धोखाधड़ी और जालसाजी से काम करने का वक्त निकल गया है, क्योंकि छोटे-छोटे बच्चे भी इंटरनेट के जानकार हो गए हैं और बहुत आसानी से यह जानकारी निकल आती है कि किस नेता या पेज के प्रशंसक किस-किस देश में कितने-कितने फीसदी हैं, और वे कब-कब बने हैं। दरअसल इंटरनेट पर ऐसी लोकप्रियता को जुटाकर देने वाली कंपनियां टके सेर मौजूद हैं, और वे आपको लाखों-करोड़ों पसंद दिलवा देती हैं। बाजार का कारोबार ऐसी कई तरह की जालसाजी पर टिका रहता है, और फिल्मी सितारों से लेकर, कुछ कंपनियों के सामानों तक की लोकप्रियता इसी तरह जुटाई जाती है। 
यह एक अच्छी बात है कि कांग्रेस की नींद खुल रही है, और वह सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर जाकर उनका मुफ्त का इस्तेमाल करने की सोच रही है। लेकिन अगर वह भुगतान करके जालसाजी से लोकप्रियता जुटाती है, तो इससे उसे नफे के बजाय नुकसान ही होगा। वैसे कांग्रेस को अपनी इंटरनेट रणनीति तय करने के लिए सोचने-विचारने का सामान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की इंटरनेट वेबसाइटों पर मिल जाएगा, जो एक राज्य में रहते हुए देश के किसी भी पार्टी के किसी भी नेता के मुकाबले इस आधुनिक तकनीक  का बेहतर और असरदार इस्तेमाल करते आ रहे हैं। और अब वे प्रधानमंत्री पद की अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए, अपनी संभावनाओं को बढ़ाने के लिए देश की कई भाषाओं में लोगों तक पहुंच रहे हैं। जब तक प्रधानमंत्री कार्यालय का ताला नहीं खुलता है, तब तक मोदी सुबह जल्दी काम शुरू करके इंटरनेट पर छा चुके होते हैं। अपने दुश्मन की जाहिर तरकीबों से भी अगर कोई सबक न ले, तो यह उसके लिए खासे नुकसान की बात होती है। तुर्की में खरीदकर जुटाई गई लोकप्रियता से कांग्रेस भारत में चुनाव कैसे जीतेगी?

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