महिलाओं पर जुल्म के मामलों में भारत और पड़ोस के देश

19 अगस्त 2014
संपादकीय

इराक में कट्टरपंथी मुस्लिम आतंकी संगठन आईएसआईएस वहां की सरकार को बेदखल करने के लिए एक फौज की तरह लड़ाई भी लड़ रहा है, और दूसरे धर्मों के लोगों को थोक में मार भी रहा है। आए दिन खबर आती है कि कितने सौ लोगों को उसने मार दिया है। लेकिन उस बीच एक खबर तस्वीरों के साथ यह भी आती है कि इराक की कुर्द महिलाएं इन हथियारबंद लड़ाकू बागियों के खिलाफ किस तरह फौजी मोर्चा सम्हालकर बड़े-बड़े हथियार चला रही हैं। ये महिलाएं इराक की फौज का हिस्सा हैं, और अपने समुदाय को खत्म होने से बचाने के लिए भयानक लड़ाई के मोर्चे पर जुटी हुई हैं। इन तस्वीरों को देखें तो याद पड़ता है कि भारत की फौज में भी महिलाओं को मोर्चों पर तैनात नहीं किया जाता। दूसरी तरफ पाकिस्तान की कुछ तस्वीरें लगातार आती हैं जिनमें वहां की महिलाएं वायुसेना के बम गिराने वाले फाईटर विमानों को उड़ाते दिखती हैं। भारत में महिलाओं को लड़ाकू विमान उड़ाने के काम पर नहीं रखा जाता। 
इस बात की तुलना हम इसलिए कर रहे हैं कि जो इस्लामी या मुस्लिम देश महिलाओं को बराबरी का दर्जा न देने के लिए जाने जाते हैं, वहां पर भी महिलाएं ऐसे खतरों के बीच, कट्टरपंथी आतंकियों के बीच, इस्लामी कानूनों के बीच भी फौज के मोर्चों पर काम कर रही हैं। दूसरी तरफ हिन्दुस्तान में जहां कहने को लोकतंत्र महिलाओं को बराबरी के दर्जे से अधिक ऊंचा दर्जा देता है, जहां महिलाओं के हक के लिए अधिक कानून बनाए गए हैं, वहां पर महिलाओं से बलात्कार की खबरें रोजाना इतनी अधिक आती हैं, कि मानो उनमें से कुछ को नमूने के तौर पर खबरों में जगह मिलती है। आमतौर पर भारत की महिलाओं को बहुत से मुस्लिम देशों की महिलाओं के मुकाबले मौके अधिक मिलते हैं, बराबरी अधिक मिलती है, लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों इस देश में बलात्कार और महिलाओं पर जुल्म इस कदर होते हैं कि वे न किसी मुस्लिम देश में सुनाई पड़ते, और न ही किसी इस्लामी व्यवस्था में। 
आज भारत में हिन्दू संस्कृति और भारतीय संस्कृति को लेकर एक अलग बहस छिड़ी हुई है। हम उसी सिलसिले में भारत में महिलाओं की हालत पर यह बात छेडऩा चाह रहे हैं, कि देवी पूजा वाली हिन्दू संस्कृति से लबालब इस देश में महिलाओं के खिलाफ इतने जुर्म क्यों होते हैं, जितने कि किसी मुस्लिम देश या समाज में नहीं होते? और फिर जिस तरह की कन्या भ्रूण हत्या, दहेज हत्या, बलात्कार, ये सब इस हिन्दू बहुल भारत में होते हैं, वैसे तो किसी मुस्लिम देश में नहीं होते। वहां पर महिलाओं से गैरबराबरी के दूसरे मामले जरूर हैं, लेकिन अजन्मी बच्चियों को मारने से लेकर दहेज हत्या तक, और इस हद तक बलात्कार तो उन देशों में कहीं सामने नहीं आते। 
भारत को अपने उदार कानून के साथ-साथ इस जमीनी हकीकत को देखना चाहिए, और पड़ोस के कई मुस्लिम देशों के गैरबराबरी के कानून के साथ वहां की महिलाओं की एक दूसरी किस्म की हकीकत को भी देखना चाहिए। और फिर यह सोचने की जरूरत है कि हिन्दुओं की अधिक आबादी वाले इस देश में, हिन्दू समाज में ही अधिकतर कन्या भ्रूण हत्या से लेकर दहेज हत्या तक के मामले क्यों होते हैं? और बलात्कार के मामले में भी हिन्दू संस्कृति मानने वाले लोग अगर दूसरी संस्कृतियों के लोगों से आगे नहीं हैं, तो शायद पीछे भी नहीं हैं। ऐसे में यह सोचना चाहिए कि यह संस्कृति अपने लोगों को बेहतर इंसान क्यों नहीं बना पा रही है? 

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