बलात्कार की झूठी शिकायत पर बहुत कड़ी सजा होनी चाहिए

5 अगस्त 2014
संपादकीय
भारतीय टीवी चैनलों पर मनोरंजन के लिए रियलिटी शो के नाम पर जिस तरह के गढ़े कार्यक्रम बन रहे हैं और दिखाए जा रहे हैं, वे फिक्र की बात हैं। उनमें एक से अधिक पीढिय़ों को ये कार्यक्रम प्रभावित कर रहे हैं, और बहुत से कार्यक्रमों के बारे में लगातार ये शिकायतें आती हैं कि उनमें अश्लील बातों को, हिंसक बातों को, या फूहड़ता को बढ़ावा दिया जाता है, लेकिन उन पर रोक का कोई असरदार तरीका अब तक नहीं है। भारत में मीडिया की गलतियों और उसके गलत कामों पर सोचने-विचारने के लिए प्रेस कौंसिल है, फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड है जिससे गुजरते हुए ही फिल्में पर्दे पर पहुंचती हैं। लेकिन टीवी के कार्यक्रमों के लिए उनके प्रसारण के बाद भी शिकायत के लिए कोई असरदार फोरम सरकार ने नहीं बनाया है। और एक बड़ी दिक्कत यह है कि टेलीविजन पर प्रसारण की सामग्री को सामग्री मानने के बजाय प्रसारण की तकनीक मानकर उसे टेलीकॉम नियामक आयोग के तहत रखा गया है। 
लेकिन आज इस मुद्दे पर लिखने की वजह कुछ और है। मुंबई में एक आईपीएस अफसर से दोस्ती के बाद वहां की एक मॉडल ने उसके खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट लिखाई, और अब उस मॉडल के वकील ने ही पुलिस को सुबूत दिए हैं कि वह मॉडल खबरों में आकर एक चर्चित और विवादास्पद कार्यक्रम बिग बॉस तक पहुंचना चाहती थी, और इसलिए उसने यह झूठी रिपोर्ट लिखाई। हम अभी इस महिला की शिकायत पर नहीं जा रहे कि उसमें सच्चाई है या नहीं, वह हमारा काम नहीं है, लेकिन अगर उस मॉडल के वकील का पुलिस को दिया गया बयान, और मॉडल की कथित साजिश की वीडियो रिकॉर्डिंग अगर सही है, तो इससे यह पता लगता है कि भारत में खबरों में आने के लिए, चर्चा में बने रहने के लिए, किसी बड़े कार्यक्रम में हिस्सा पाने के लिए लोग इस हद तक जा सकते हैं। हम इस शिकायत की सच्चाई पर कुछ कहे बिना यह कहना चाहते हैं कि टीवी के कुछ कार्यक्रम लोगों को इस हद तक उकसा रहे हैं, कि उसकी चकाचौंध का हिस्सा बनने के लिए ऐसा लग रहा है कि एक मॉडल युवती ने इस तरह की साजिश रची। 
ऐसी बातें भारत के मनोरंजन उद्योग में दोनों तरफ से होती हैं। एक तरफ तो काम देने के लिए फिल्म और टीवी उद्योग के जमे हुए दिग्गज नए कलाकारों का शोषण करने के लिए लंबे समय से बदनाम हैं, और दूसरी तरफ काम पाने के लिए नए लोगों में से ही कुछ लोग इस तरह की साजिश शायद कर रहे हैं। आज ही एक खबर छत्तीसगढ़ की है जिसमें एक महिला ने अपने बेटों के किसी से झगड़े का हिसाब चुकता करने के लिए बेकसूरों के खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट लिखा दी थी, और रिपोर्ट झूठी निकलने पर उस महिला को ही दो बरस की कैद सुनाई गई है। 
यह हालत भयानक इसलिए है कि हर दिन इस देश में दसियों हजार महिलाओं को, लड़कियों और बच्चों को, सेक्स-अपराध का शिकार होना पड़ रहा है। दूसरी तरफ ऐसे इक्का-दुक्का झूठे मामले बाकी तमाम सच्ची शिकायतों की विश्वसनीयता को तबाह करते हैं। बलात्कार की एक झूठी शिकायत की वजह से किसी व्यक्ति की जिंदगी जिस हद तक और जिस कदर तबाह होती है, उसका परिवार जितना तबाह होता है, उसे देखते हुए झूठी शिकायत पर भी बलात्कार पर सजा जैसी ही कड़ी सजा का इंतजाम कानून में करना चाहिए क्योंकि वह एक बेकसूर की साख, और उसके पूरे परिवार के वर्तमान और भविष्य के साथ बलात्कार से कम कुछ नहीं होता है। 
हमने बात की शुरुआत तो टीवी की दुनिया से की है, लेकिन ऐसी झूठी शिकायतें चाहे कितनी ही कम हों, वे एक बहुत ही परले दर्जे की घटिया सोच और साजिश का सुबूत हैं, और ऐसी एक खबर भी देश की बाकी लड़कियों और महिलाओं के लिए सामाजिक दिक्कत खड़ी करने वाली साबित होती है। बेटे से मारपीट का बदला लेने के लिए अगर कोई महिला सामूहिक बलात्कार की रिपोर्ट लिखाती है, तो यह भारी शर्मनाक घटना है। और छत्तीसगढ़ की अदालत ने एक महीने के भीतर ही इस पर फैसला दिया, क्योंकि महिला के बयान से ही पता लगा कि उसने गुस्से में झूठी रिपोर्ट लिखा दी थी। ऐसे एक मामले से भी भारतीय समाज में महिला विरोधी सोच रखने वाले लोगों को यह कहने का मौका मिलता है कि महिला बलात्कार की शिकायत में हर बार सच ही बोलती हो, यह जरूरी नहीं है। यह नौबत फिक्र की बात है, और ऐसे मामलों में झूठी शिकायत पर हम अधिक कड़ी सजा की सिफारिश करते हैं। 

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