तन और मन की सेहत बनाए रखने के मायने

7 सितंबर 2014
संपादकीय

ब्रिटेन और फ्रांस के बीच इंग्लिश चैनल नाम की समुद्री खाड़ी को तैरकर पार करने का रिकॉर्ड बनाना दुनिया के तैराकों का जुनून रहा है। लेकिन कल एक नया रिकॉर्ड बना जब दक्षिण अफ्रीका के 73 बरस के एक हार्ट सर्जन ने इसे पार किया, और वे ऐसा करने वाले सबसे उम्रदराज तैराक थे। इस बात को लेकर विचारों के इस कॉलम में लिखना कुछ लोगों को अटपटा लग सकता है, लेकिन राजनीति और आतंक के मुद्दों से परे भी कई बातें जिंदगी में अहमियत रखती हैं, और इसीलिए हम इस घटना को महत्वपूर्ण मानते हुए इसे लेकर कुछ लिख रहे हैं। 
भारत दुनिया के सबसे संपन्न या सबसे विकसित देशों में से नहीं है, लेकिन यहां भी शहरी और संपन्न जिंदगी से उपजने वाली बीमारियों से करोड़ों लोग तकलीफ में हैं। बहुत से लोगों को डायबिटीज बढ़ते चल रहा है, कुर्सियां तोडऩे वाले काम लोगों को रीढ़ की हड्डी और गर्दन की तकलीफ दे रहे हैं, कारोबार और निजी जिंदगी के तनाव लोगों को उच्च रक्तचाप दे रहे हैं, और खानपान की गड़बड़ी से लोगों के दिल की धमनियां तंग होते चल रही हैं, और एंजियोप्लास्टी या बाईपास के मामले बढ़ते चल रहे हैं। वजन बढऩे से घुटनों पर जोर बढ़ रहा है, और लोगों को घुटने बदलवाने के महंगे ऑपरेशन करवाने पड़ रहे हैं। और यह सब उस देश में हो रहा है जहां इलाज की हजारों बरस पुरानी आयुर्वेदिक शैली लोगों के इलाज के बजाय उनकी सेहत के बचाव पर अधिक ध्यान देती थी, जिस देश में योग से तन, और प्राणायाम से मन के सेहतमंद रहने का काम होता था। 
आज लोग अपनी सेहत के लिए वक्त नहीं निकालते हैं, और यह कहते और सोचते हैं कि वे वक्त नहीं निकाल पा रहे हैं। दरअसल सेहत को बचाए रखने के लिए जो वक्त निकाला जाता है, अपने तन-मन पर जितना वक्त खर्च किया जाता है, वह बुढ़ापे या बीमारी में तन-मन पर बर्बाद होने वाले वक्त के मुकाबले बहुत कम होता है। लोगों को अपने आपको सेहतमंद रखकर न सिर्फ बीमारियों के खतरों को टालना चाहिए, बल्कि सेहतमंद इंसान भी रोज की जिंदगी में अधिक उत्पादक भी होते हैं। और तन या मन से बीमार या कमजोर इंसान अपने आसपास के लोगों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसलिए इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए कि तन-मन की सेहत के लिए चौकन्ना लोग अपने आसपास के लोगों को भी प्रेरणा देते हैं, और उनका पूरा परिवार, उनके आसपास के लोग भी फायदा पाते हैं। जिस तरह दुनिया में लोग एक-दूसरे से बुरी आदतें सीखते हैं, उसी तरह लोग एक-दूसरे से अच्छी बातें भी सीखते हैं। 
अधिक उम्र में भी लोग इस तरह सेहतमंद रहते हैं कि 73 बरस की उम्र में ऐसे रिकॉर्ड कायम करते हैं। इस बात से हिन्दुस्तान की शहरी और संपन्न नौजवान पीढ़ी को भी नसीहत लेनी चाहिए। 

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