उत्तरप्रदेश की तरह पूरे देश में साइकिलें टैक्स फ्री हों

20 सितंबर 2014
संपादकीय

देश-विदेश की खबरों की भीड़ में पिछले हफ्ते एक छोटी सी खबर पर लिखना रह गया था, जो कि बहुत जरूरी था, और शायद कुछ दूसरे मुद्दों के मुकाबले जिसे खबरों में अधिक आना भी चाहिए था। उत्तरप्रदेश में साइकिलों पर से टैक्स हटाना तय किया है। यह देश के सबसे गरीब प्रदेशों में से एक है, और जाहिर है कि यहां पर साइकिल चलाने वाली काफी होंगे। दूसरी बात यह भी कि सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी साइकिल है, और साल दो साल में कभी-कभार इस पार्टी के मुलायम सिंह यादव या अखिलेश यादव साइकिल चलाते तस्वीरों में दिख भी जाते हैं। एक दूसरी खबर मध्यप्रदेश से आई थी कि वहां अस्सी बरस का एक आदमी रोज अपना बनाया सामान बेचने साइकिल से चालीस किलोमीटर का सफर तय करता है। 
इन दो खबरों से परे भी कुछ महीने पहले की खबर और तस्वीर हमारे पाठकों को याद होगी कि किस तरह योरप के एक देश का प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री साइकिल पर अपने दफ्तर जा रहा था, और पिछले महीनों में जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भूटान गए, तो वहां के प्रधानमंत्री भी खबरों में कुछ अधिक आए कि वे किस तरह साइकिल से चलते हैं। कल-परसों ही हमने इसी अखबार में यह छापा कि किस तरह यूपीए के विमान मंत्री प्रफुल्ल पटेल देश के सबसे बड़े बैंक दीवालिया विमान सेवा मालिक विजय माल्या के साथ एक निजी विमान में खाली सीटों के साथ सफर कर रहे थे, और किस तरह आज मोदी सरकार के विमान मंत्री हवाई अड्डे पर आम मुसाफिरों की तरह अपना सामान लेकर एयरपोर्ट-बस में चलते हैं, विशेष कार के अपने हक का इस्तेमाल न करते हुए। 
कुल मिलाकर बात यह है कि हिन्दुस्तान में साइकिल का सम्मान जिस तरह कम किया गया है, वह भयानक है। सार्वजनिक पार्किंग की जगहों पर साइकिलों को रखना सबसे ही दिक्कत वाले कोने पर होता है, ट्रेन और बसों में लोग साइकिल नहीं ले जा सकते, और सड़कों पर ट्रैफिक के बीच साइकिलों के लिए हिफाजत की कोई लेन नहीं होती। जो लोग पेट्रोल बचाने के लिए और अपनी सेहत बचाने के लिए, प्रदूषण बचाने के लिए, और ट्रैफिक जाम बचाने के लिए साइकिल चलाना चाहते हैं, वे दूसरी गाडिय़ों तले कुचल जाने के डर से ऐसा हौसला नहीं कर पाते। और फिर राज्य सरकारें हैं जो कि हजारों करोड़ के खर्च से चौड़ी सड़कें बनवाती हैं ताकि बड़ी-बड़ी गाडिय़ां तेज रफ्तार से चल सकें, लेकिन साइकिल पर टैक्स खत्म करने की जो सलाह हम बरसों से देते आ रहे हैं, उस पर किसी का ध्यान भी नहीं जाता क्योंकि फैसले लेने वाले लोगों में से कोई भी साइकिलों पर नहीं चलते। 
पूरे देश में साइकिलों पर किसी भी तरह का टैक्स एकदम खत्म कर देना चाहिए। कम से कम साधारण साइकिलों पर तो कोई टैक्स नहीं रहना चाहिए, और पांच-दस हजार रूपए से अधिक दाम वाली महंगी फैशनेबल साइकिलों पर सरकार जितना चाहे उतना टैक्स लगाए। लोग अगर साइकिलों पर चलेंगे, जो कि मजबूरी में चलते ही हैं, तो वे विदेशी मुद्रा से खरीदे जाने वाले पेट्रोलियम को भी बचाते हैं, सड़कों पर कम जगह घेरते हैं, किसी दूसरे को कुचलकर मार नहीं सकते, और प्रदूषण नहीं बढ़ाते। साइकिल चलाने वालों की सेहत पर सरकारी इलाज की जरूरत भी कम पड़ती है, और सरकार पर बोझ नहीं पड़ता। इन तमाम बातों को देखते हुए पूरे देश को एक साथ, या अलग-अलग प्रदेशों को अपने स्तर पर भी साइकिलों को पूरी तरह टैक्स फ्री करना चाहिए, और उनको रखने के लिए सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षित और सुविधाजनक इंतजाम भी करना चाहिए। 

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