हर निजी बात के पोस्टर के लिए लोगों को तैयार रहना चाहिए...

11 सितंबर 2014
संपादकीय
दुनिया में सबसे अधिक प्रचलित ई-मेल सेवा जी-मेल के पचास लाख पासवर्ड चुराकर इंटरनेट पर सार्वजनिक कर देने का दावा रूसी हैकरों ने किया है। रूस के लोग साइबर अपराधों में बाकी देशों के मुकाबले आगे रहते हैं, या कम से कम खबरों में अधिक रहते हैं। अमरीका और चीन की सरकारें अपने देश के साइबर मुजरिमों को मौका ही नहीं देतीं, और खुद ही पूरी दुनिया की जानकारी चुराते रहती हैं। अमरीकी खुफिया एजेंसियों की नजर इंटरनेट, कम्प्यूटर, फोन, और हर किस्म की डिजिटल जानकारी पर रहती है, और वहां की सरकार पूरी बेशर्मी से अपने दोस्त देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक की साइबर जासूसी करती है। चीन के बारे में खबर है कि वहां की सरकार ने दसियों हजार साइबर हैकरों को नौकरी पर रखा हुआ है, और वे दुनिया भर से सरकार और कारोबार की जानकारी चुराते रहते हैं। 
हम हर कुछ महीनों में लोगों को चौकन्ना करने के लिए इस मुद्दे पर यहां पर इसलिए लिखते हैं कि आम लोगों का पासवर्ड पर एक अंधविश्वास सा रहता है कि उनके ई-मेल खाते, फेसबुक या ट्विटर के अकाउंट का पासवर्ड अगर सिर्फ उनके पास है, तो उसमें वे जैसी चाहें वैसी जानकारी रख सकते हैं, और वह हिफाजत से रहती है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, और पश्चिम की फिल्मी दुनिया के नामी-गिरामी सितारों की बहुत ही अंतरंग और नग्न तस्वीरें पिछले दिनों उनके ई-मेल बॉक्स से चुराकर इंटरनेट पर फैला दी गईं, और उसे कोई रोक नहीं सका। इसे लेकर यहां तक चर्चा हुई कि नामी-गिरामी कंपनी एप्पल की किसी गड़बड़ी से ये तस्वीरें बाहर आईं, और इस कंपनी को सामने आकर अपना बचाव करना पड़ा। 
चाहे चीन हो, या रूस, या अमरीका, या फिर खबरों में कम रहने वाली इजराइल की सबसे घातक और शातिर खुफिया एजेंसी, इनमें से किसी पर भी यह भरोसा नहीं करना चाहिए कि वे दुनिया में कोई भी बात खुफिया रहने देंगी। आज जो लोग अपने आपको महत्वहीन मानते हैं, और यह सोचते हैं कि उनकी जानकारी पाकर सीआईएफ क्या कर लेगी, उन लोगों को भी यह याद रखना चाहिए कि एक दिन तो नरेन्द्र मोदी भी चाय बेचा करते थे, और उस दिन तो अगर ई-मेल होता, तो वे भी यही सोचते कि उनकी निजी जानकारी को दुनिया की कोई सरकार क्यों देखना चाहेगी। इसलिए आज जो लोग आम लोग हैं, जिंदगी कब उनको खास बना देगी, इसका कोई ठिकाना तो है नहीं। और चाय वाले के प्रधानमंत्री बनने के बाद तो और भी नहीं है। इसलिए लोगों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। 
एक तो यह कि अपने किसी भी डिजिटल खाते, किसी भी डिजिटल उपकरण के पासवर्ड लगातार बदलते रहना चाहिए, और उनको बहुत आसान भी नहीं रखना चाहिए। दूसरी बात यह कि अपनी किसी भी निजी या गोपनीय बात को यह मानकर ही रखना चाहिए कि किसी दिन सुबह उसके पोस्टर छपे हुए दीवारों पर दिख सकते हैं। ऐसे खतरे को देखते हुए जिन बातों को, तस्वीरों और दस्तावेजों को खत्म करना ठीक लगे उनको खत्म कर देना चाहिए। और ऐसी बातों को किसी कम्प्यूटर, फोन, या इंटरनेट सर्वर पर रखने के पहले यह समझ लेना चाहिए कि उनके मिटा देने पर भी वैसी जानकारी हमेशा के लिए मिट नहीं जाती। एक बार जो बात कम्प्यूटर या इंटरनेट पर चली गई, फोन पर टाईप हो गई, वह बात दुनिया की एजेंसियां शायद सौ बरस बाद भी ढूंढकर निकाल सकती हैं। अब अगर गुजरात के एक चाय वाले बच्चे के पास उस वक्त मोबाइल होता, उसका ई-मेल बॉक्स होता, तो आज अमरीका कम्प्यूटर की डस्टबिन से भी उन बातों को निकाल चुका होता। लोगों को याद रखना चाहिए कि ओसामा-बिन-लादेन तभी तक सुरक्षित था, जब तक उसे इंटरनेट और फोन का इस्तेमाल नहीं किया था। एक बार वह साइबर दुनिया में पहुंचा, तो अमरीका के सरकारी हत्यारे उसके दरवाजे तक पहुंच गए। और ये तमाम बातें दुनिया के कारोबार पर भी लागू होती हैं, जिन पर एकाधिकार के लिए अमरीका और चीन, इजराइल और पश्चिम के कई दूसरे देश रात-दिन लगे हुए हैं। इसलिए यह वक्त आज ही इतना नाजुक है, कि लोगों का कुछ भी सुरक्षित नहीं है, आने वाला वक्त और भी नाजुक रहेगा, और लोगों को ही अपनी आदतें, अपने शौक, अपने चाल-चलन, और अपने कामकाज को ठीक रखना पड़ेगा, वरना हर निजी बात के पोस्टर के लिए लोगों को तैयार रहना चाहिए। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें