आज की दुनिया में धर्म, और उसके नाम पर कर्म

3 सितंबर 2014
संपादकीय
नरेन्द्र मोदी जापान में भगवत् गीता तोहफे में देकर आए, तो इसके पहले कि कोई एक धर्म को बढ़ावा देने के लिए उनकी आलोचना करता, उन्होंने खुद ही कहा कि इस बात पर टीवी चैनलों पर उनकी आलोचना की बहस होने लगेगी। उन्होंने कहा कि गीता हिंदुस्तान की तरफ से पूरी दुनिया को आज तक का सबसे बड़ा उपहार है। वे बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों की सबसे बड़ी आबादी वाले जापान में थे, और वहां उनका बहुत गर्मजोशी से स्वागत हुआ था। 
लेकिन गीता वाला हिंदू धर्म हो, कुरान वाला इस्लाम हो, बौद्ध धर्म हो, या कोई और, आज दुनिया में चारों तरफ धर्म के नाम पर, धर्म से जुड़े हुए लोग, धर्म का झंडा-डंडा उठाकर जिस तरह खून बहा रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि धार्मिक किताबों, और धार्मिक नसीहतें, दुनिया की जिंदगी में कितना भला कर पा रही हैं, और उनका नाम लेकर दुनिया में कितना बुरा किया जा रहा है! कुछ आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के मुस्लिम आतंकी इस्लाम के नाम पर जो कत्लेआम कर रहे हैं, उसमें मारे जा रहे लोगों में निन्यानवे फीसदी लोग मुस्लिम ही हैं। हिंदुस्तान में हिंदू धर्म से जुड़े लोगों के कट्टर रीति-रिवाजों के चलते अजन्मी बच्चियों को मां के पेट में ही मार डाला जाता है, अभी कुछ दशक पहले तक धार्मिक रीति-रिवाजों का नाम लेकर पति की मौत के बाद महिलाओं को सती बनाने को सामाजिक मान्यता थी, दहेज हत्याएं आज भी होती हैं, और धर्म से जुड़े हुए, आसाराम से लेकर नित्यानंद तक, बलात्कार के आरोपों में लंबे समय से जेलों में हैं। दुनिया का इतिहास ऐसे ईसाई पादरियों से भरा पड़ा है जो बच्चों के देहशोषण के गुनहगार हैं, और जिनकी करतूतों के लिए पोप माफी मांगते हैं। इधर भारत के बगल के म्यांमार में देखें तो बौद्ध समुदाय वहां पर मुस्लिमों के साथ जिस तरह की नस्ली हिंसा कर रहा है, वह भयानक है। इसके जवाब में मुस्लिमों ने भारत में ही बोधगया में धमाके किए। अभी हिंदू संगठनों के ऐसे लोगों पर मुकदमे जारी हैं जिन्होंने भारत के भीतर आतंकी हमले किए। इधर पाकिस्तान में इस्लाम को मानने वाला एक तबका, एक दूसरे मुस्लिम तबके के लोगों को रात-दिन मार रहा है। दुनिया के इतिहास में इस बात को बड़े खुलासे दर्ज किया है कि जर्मनी में जब हिटलर लाखों यहूदियों की हत्या कर रहा था, तब वेटिकन में बैठा हुआ पोप चुप था, उसने मुंह भी नहीं खोला था। दुनिया के इतिहास में हर जगह यही हुआ है कि जब और जहां धर्म के नाम पर, उसे मानने वाले लोगों ने थोक में हिंसा की है, तो धर्म गुरुओं ने मुंह खोलने की जहमत भी नहीं उठाई।
हमने आज की बात गीता से शुरू की थी, और एक बार फिर हम धर्म और धर्मग्रंथों पर आते हैं। जो लोग यह मानकर चलते हैं कि धार्मिक नसीहतें अच्छी हैं, धर्म में हिंसा नहीं है, उनको दुनिया का पिछले सैकड़ों बरस का इतिहास देखना चाहिए कि धर्म के नाम पर, धर्म को मानने वाले लोगों ने जितने कत्ल किए हैं, उतनी मौतें दुनिया के तमाम युद्धों में मिलाकर भी नहीं हुई हैं। धर्म को एक बेअसर दस्तावेज मानकर अगर ताक पर रखना हो, तब तो ठीक है। लेकिन धर्म को अगर असरदार माना जाता है, तो फिर उसके खूनी असर को भी देखना होगा, और उसे अनदेखा करके धर्म का मूल्यांकन नहीं हो सकता। अपनी सहूलियत से धर्म को कभी एक महान दस्तावेज बता देना, और बाकी वक्त उसी धर्म के नाम पर पूरी दुनिया में चारों तरफ लहू बहाना, बिना एक साथ जोड़े नहीं देखा जा सकता। दुनिया के इतिहास, और दुनिया के वर्तमान में धर्म की भूमिका को कुल मिलाकर ही देखना होगा, और जब ऐसा देखते हैं, तो चारों तरफ बिखरा खून ही दिखता है। अब धर्म के लोग अपने-अपने धर्मों के बारे में, और अपने बारे में खुद ही सोचें।

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