भारत में पाकिस्तानी पोशाक और झंडों को लेकर खतरे

संपादकीय 
6 नवंबर, 2014 
उत्तर भारत के कुछ हिस्सों से ऐसी खबरें हैं कि मोहर्रम के मौके पर कहीं-कहीं के कार्यक्रमों में लड़कों ने पाकिस्तान की क्रिकेट टीम की पोशाक पहनकर आपस में टीमें बनाकर मैच खेले। जानकारी यह है कि दूसरी टीमों की पोशाक भी इन्हीं लड़कों की दूसरी टीमों ने पहनी थी। लेकिन इसे लेकर कुछ जगहों पर तनाव हुआ, पुलिस के पास शिकायतें पहुंचीं, ऐसे खिलाड़ी लड़कों की तस्वीरें इंटरनेट पर फैलीं। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि दुनिया के दूसरे देशों के खिलाडिय़ों की पोशाक भी भारत के खेल प्रेमी पहनते हैं, दुनिया के दूसरे देशों और शहरों के छापों वाले टी-शर्ट तो बहुत से लोग पहनते हैं।
लेकिन इस बात पर देश के लोगों को कुछ गंभीरता से सोचना होगा, और खासकर पाकिस्तान को लेकर भारत के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को यह सावधानी बरतनी होगी कि जब तक पाकिस्तान के साथ सरहद पर तनातनी चल रही है, भारत में हुए कई आतंकी हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ पाया गया है, तब भारत में पाकिस्तान की तारीफ वाली सार्वजनिक हरकतों का एक सांप्रदायिक मतलब निकाला जा सकता है, और ऐसा मतलब निकालने वाले लोग भारत के ऐसे मुस्लिम लोगों को देश विरोधी कहकर एक तनाव भी खड़ा कर सकते हैं। यह बात अपने आप में बहुत साफ है कि भारत के लोगों के लिए पाकिस्तान बाकी देशों के मुकाबले खासा अलग है। और अभी पिछली सदी का ही यह इतिहास है कि धर्म के आधार पर एक देश से ये दो देश बने थे, और दोनों देशों में दोनों धर्मों के लोग रहते आए हैं, लेकिन दोनों जगहों पर सामुदायिक या सांप्रदायिक तनाव बीच-बीच में होते रहता है। 
यह बात सही है कि भारत में लोकतंत्र अधिक मजबूत है, और इस देश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अधिक सुरक्षित भी हैं। लेकिन यह बात भी उतनी ही सही है कि भारत में सांप्रदायिक तनाव खड़ा करने के लिए कुछ ताकतें लगातार लगी रहती हैं। ऐसे में अगर किसी भी धर्म के लोग सावधान नहीं रहेंगे, तो उन्हें बदनाम करने में दिलचस्पी रखने वाले लोग मौके का फायदा उठाएंगे। पाकिस्तान की टीम की तारीफ किसी मैच के वक्त तो चल सकती है, लेकिन किसी भी धर्म के त्यौहार के मौके पर अगर पाकिस्तानी टीम की पोशाक पहनकर, या उस देश के झंडे लेकर भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग सार्वजनिक जगहों पर निकलेंगे, तो यह चाहे कानून के खिलाफ न हो, लेकिन देश की भावनाओं के खिलाफ हो सकता है, और इससे एक ऐसा बिल्कुल ही अनचाहा तनाव खड़ा हो सकता है, जो कि अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ जाए। 
लोकतंत्र में जहां हर किसी को अधिकार मिलते हैं, वहां हर किसी की कुछ जिम्मेदारियां भी होती हैं। हर किसी को अपने देश-प्रदेश, अपने इलाके और अपने माहौल की संवेदनशीलता का ध्यान रखते हुए ही लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा न होने पर कानून जब तक उनके अधिकारों को बचाने के लिए पहुंचेगा, तब तक उनको एक नुकसान हो सकता है। हमको आज भारत में ऐसी कोई जायज वजह नहीं दिखती कि लोग सार्वजनिक प्रदर्शन के रूप में ऐसे देश की पोशाक, या उसके झंडे पहनकर-लेकर निकलें, जिसके साथ सरहद पर तनातनी चल रही है। लोकतंत्र के तहत मिली हुई छूट का संभालकर इस्तेमाल करना चाहिए। 

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