नए साल पर क्या संकल्प लें? कुछ छोटी-छोटी नसीहतें...

29 दिसंबर 2014
संपादकीय

नया साल बस दो दिन परे खड़ा है। जो लोग इसके आने के जश्न को नहीं भी मना पाते हैं, वे भी नए साल के लिए कई किस्म की बातें सोचना शुरू करते हैं कि इस बरस में कौन-कौन सा बुरा काम छोड़ेंगे, और कौन-कौन से अच्छे काम करना शुरू करेंगे। इंसान का मिजाज ही ऐसा होता है कि वे कुछ तारीखों से जोड़कर कुछ तय करने की कोशिश करते हैं, कभी जन्मदिन से, तो कभी किसी और सालगिरह से, तो कभी किसी त्यौहार से जोड़कर लोग कुछ संकल्प लेते हैं। बहुत से लोगों का यह भी मानना है कि ऐसे दिनों पर लिए गए संकल्प किसी किनारे नहीं पहुंचते, और बेकार हो जाते हैं। 
लेकिन हमारा मानना है कि किसी संकल्प के पूरे होने की संभावना उसे लेने के बाद ही शुरू हो सकती है, जब तक लोग इस बात के लिए कसम खाने की सोचें भी नहीं, तब तक क्या हो सकता है। इसलिए हर किसी को ऐसे मौके पर अपने, और अपने आसपास के लोगों के बारे में सोचना-विचारना चाहिए, और कुछ अच्छे काम करने का इरादा जुटाकर उसकी कोशिश जरूर करनी चाहिए। कोशिश में नाकामयाब भी वे ही लोग हो सकते हैं, जो कि उसकी कोशिश करते हैं। जंग के बारे में कहा जाता है कि गिरते हैं शहसवार ही मैदाने जंग में...। मतलब यह कि जो कोशिश करते हैं उन्हीं का तो बाद में मूल्यांकन हो सकता है, जो इतने लापरवाह रहते हैं कि कभी कोशिश भी नहीं करते, उनको कौन आंकता है। 
हम कुछ छोटी-छोटी बातें आज यहां पर सुझाते हैं, जो कि हमारे तकरीबन हर पाठक पर लागू होती हैं, और इनमें से अपने फायदे की और अपनी मर्जी की बातों को छांटकर लोग अगले दो दिन अपने मन के भीतर, अपने परिवार में, और अपने दोस्तों में इसकी चर्चा करके खुद भी एक नया बरस तय कर सकते हैं, और आसपास के लोगों को इसके लिए सोचने पर मजबूर भी कर सकते हैं। अब जैसे सबसे पहली बात जो हमको सूझती है, वह है सिगरेट-बीड़ी, और तम्बाकू से परे रहने की। हमारे पाठकों में से शायद एक चौथाई ऐसे होंगे, जो इनमें से किसी एक आदत के शिकार होंगे। इनको यह सोचना चाहिए कि अगर मुंह या गले का कैंसर इनको हुआ, या कैंसर ने इनके फेफड़े खा लिए, तो ये लोग परिवार पर किस तरह का बोझ बन जाएंगे, और किस तरह आधे रास्ते में अपने परिवार को छोड़कर वे चल बसेंगे। इसी तरह की बात शराब पीने वालों के साथ हो सकती हैं, खासकर जो लोग अधिक पीते हैं, और गरीबी के बावजूद पीते हैं। जो लोग इसका खर्च उठा सकते हैं, और काबू के भीतर पीते हैं, उनके लिए यह शायद उतनी नुकसानदेह नहीं है, जितनी कि सिगरेट हो सकती है। लेकिन बुरी लत कब बढ़कर बेकाबू हो जाती है, यह किसने देखा है?
संपन्न तबकों के कुछ लोगों का खानपान बड़ा नुकसानदेह रहता है। जरूरत से अधिक घी-तेल, मुर्गा-मछली, या अधिक तला हुआ, अधिक नमक या अधिक शक्कर वाला खाना या तो आज ही तकलीफ दे देता है, या फिर लंबी बीमारियों की शुरुआत करता है। ऐसे परिवार यह तय कर सकते हैं कि नए साल में वे किस तरह अपने खानपान को अधिक सेहतमंद बनाएंगे, और इसकी जानकारी अधिक मुश्किल भी नहीं है, बाजार में ऐसी सस्ती किताबें मौजूद हैं जो कि खानपान की खामियों और खूबियों के वैज्ञानिक तथ्य बतलाती हैं। लोगों को एक-दूसरे को ऐसी कुछ अच्छी किताबें भी नए साल के तोहफे में देना चाहिए, और आगे का खानपान भी बेहतर बनाने का संकल्प लेना चाहिए। बहुत से लोगों को यह लगता है कि आजकल खानपान और जीवन शैली से होने वाली तमाम बीमारियों के इलाज कुछ दाम पर ही सही, मौजूद हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं है, कितना भी महंगा और अच्छा इलाज हो, वह पूरी भरपाई कभी नहीं कर सकता। इसलिए पूरे घर को इस बारे में बैठकर तय करना चाहिए, इससे बड़े लोगों का तो तुरंत ही भला होगा और छोटे बच्चों की बेहतर आदतें शुरू होंगी। 
एक और मुद्दा जो हमको बहुत जरूरी लगता है और जिसके बारे में हम लगातार लिखते और छापते हैं, वह है हेलमेट का। दुपहिया दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकतर मौतें ऐसी रहती हैं जो कि हेलमेट लगने से टल सकती हैं, या कम से कम बहुत गंभीर चोट से लोग बच सकते हैं, और बाकी पूरी जिंदगी अपाहिज की तरह रहने की बेबसी से भी। लोगों को अपने आसपास के लोगों के बारे में भी यह तय करना चाहिए कि वे बिना हेलमेट दुपहियों पर नहीं बैठेंगे। 
एक और बात जो जरूरी है और लोग जिसे अनदेखा करते हैं, वह है एक स्वस्थ जीवन शैली की। लोग घूमने नहीं जाते, कसरत नहीं करते, योग, ध्यान या प्राणायाम नहीं करते। ये तमाम बातें लोगों को मुफ्त में मिली हुई हैं, और जिसे यह लगता है कि उनके जीवन में इनके लिए समय नहीं है, उन्हीं के जीवन में इन बातों की जरूरत उतनी अधिक है। हम तो सिर्फ इतना ही याद दिला सकते हैं कि कसरत और योग जैसे बचाव के काम में लोग जितना समय लगाएंगे, उससे कई गुना अधिक समय उनकी जिंदगी में बढ़ जाता है, और जिंदगी कम तकलीफदेह भी हो जाती है, और अधिक उत्पादक भी हो जाती है। इस बारे में हर किसी को जरूरत सोचना चाहिए, और यह भी याद रखना चाहिए कि दुनिया के अधिकतर सफल लोग अपने तन और मन के लिए बचाव के ऐसे काम करते हैं, और नुकसान उनसे दूर रहता है। ऐसा करके लोग बुढ़ापे में महंगे इलाज की जरूरत से भी बच सकते हैं। इनमें से किसी भी बात के लिए कुछ खर्च करने की जरूरत नहीं रहती। 
इसके बाद की अच्छी बातों के लिए हम लोगों को उनकी कल्पना के साथ छोड़ देते हैं, क्योंकि जब भी वे आसपास के समझदार लोगों के साथ बैठकर नए साल के संकल्पों के बारे में बात करेंगे, लोग भी उनको सलाह दे सकेेंगे।

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