राहुल को लेकर सवाल ही सवाल, जवाब एक नहीं

14 मार्च 2015
संपादकीय
दिल्ली में एक अखबार की खबर के आधार पर कांगे्रस के प्रवक्ता को खासे अरसे बाद मीडिया में कुछ बोलने का मौका मिला। खबर यह है कि दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी के घर जाकर कुछ पूछताछ की, और यह बहुत मजेदार जानकारी इस खबर में है कि पुलिस ने राहुल गांधी का हुलिया भी पूछा। इसे लेकर सुबह से टीवी चैनलों ने सनसनी शुरू की, और कांगे्रस को मोदी सरकार के तहत आने वाली दिल्ली पुलिस की इस कथित कार्रवाई को लेकर हंगामा खड़ा करने का एक मौका मिला। अभी तक यह साफ नहीं है कि इस खबर में सच कितना है और गलत कितना, लेकिन यह बात अपने-आपमें अटपटी है कि पिछले कुछ हफ्तों से कांगे्रस पार्टी के नेताओं को भी यह पता नहीं है कि राहुल गांधी हैं कहां?
वैसे तो सार्वजनिक जीवन में भी हर किसी को एक निजी जिंदगी का हक रहता है, और राहुल गांधी के छुट्टी पर जाने को लेकर कोई सवाल खड़े नहीं हो सकते, लेकिन देश का एक बड़ा नेता, एक बड़ी पार्टी का अगला अध्यक्ष समझे जाने वाला यह अधेड़ सांसद कहां है, इस बात को लेकर इतनी लुकाछिपी लोकतंत्र में ठीक नहीं है। अगर सुरक्षा कारणों से राहुल गांधी का पता बताना ठीक नहीं है, तो भी इतनी पारदर्शिता तो लोकतंत्र में होनी चाहिए कि राहुल क्या करने गए हैं, कब तक लौटेंगे, और इस बात को जाहिर क्यों नहीं किया जा रहा है? 
जिस तरह सोनिया गांधी की बीमारी के वक्त भी कांगे्रस पार्टी और अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी सेहत और इलाज के बारे में लोगों को कुछ जानकारी दी थी। पूरी दुनिया में यह माना जाता है कि सार्वजनिक जीवन के लोग अपनी कुछ बातों के लिए समाज के प्रति जवाबदेह होते हैं, और इसीलिए तमाम चर्चित लोगों की सेहत को लेकर स्वास्थ्य बुलेटिन जारी होते हैं। वरना उनके निजी इलाज की सार्वजनिक जानकारी की जरूरत ही क्या है? पश्चिम के देशों में लोग अपने पे्रम-प्रसंग, सगाई या शादी, या तलाक की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से देते हैं। लोगों को याद होगा कि ब्रिटेन के शाही घराने में प्रिंस चाल्र्स और लेडी डायना के तलाक की औपचारिक शाही घोषणा की गई थी। सार्वजनिक जीवन का यह एक दाम चुकाना पड़ता है। 
भारत में कांगे्रस पार्टी एक निहायत गैरजरूरी रहस्य बनाकर चल रही है कि राहुल गांधी कहां हैं, क्या कर रहे हैं, कब लौटेंगे, और क्या करेंगे। उसे ऐसा करने का पूरा हक तो है, लेकिन अगर इस पार्टी को जनता के बीच जिंदा रहना है, तो इसे जनता की भावनाओं और जनता की जिज्ञासाओं का सम्मान भी करना चाहिए। यह पार्टी वैसे भी पिछले बरसों के अपने अहंकार के चलते हुए लोकतंत्र के हाशिए पर जा चुकी है, और आज भी वह इसे अगर एक घरेलू कारोबार की तरह चलाना चाहती है, तो उसमें जनता को कोई तकलीफ तो है नहीं। जहां तक दिल्ली पुलिस की पूछताछ का सवाल है, तो यह खबर हमें बहुत भरोसेमंद नहीं लग रही है, और राहुल गांधी की सुरक्षा के लिए तैनात दर्जनों सुरक्षा कर्मचारियों को यह बेहतर पता होगा कि वे कहां हैं।

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