बिना बात बतंगड़ बनाकर संसद में कांग्रेस बुरी फंसी

संपादकीय
16 मार्च 2015

कोई राजनीतिक दल देश और प्रदेश में कितने अलग-अलग किस्म का बर्ताव कर सकता है, यह देखना हो तो कांग्रेस को देश की राजधानी में, और छत्तीसगढ़ की राजधानी में देखना चाहिए। यह बात हम पिछले कुछ महीनों में तीसरी-चौथी बार लिख रहे हैं कि इस राज्य में विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस पार्टी लगातार वजनदार मुद्दों को उठाकर लगातार सड़कों पर है, और सरकार को घेरे हुए है। आज भी जनता की भारी दिक्कतों के दाम पर कांग्रेस रायपुर में विधानसभा घेरने का आंदोलन कर रही है और उसके हाथ में धान खरीदी में सरकार की वादाखिलाफी का आरोप है, और प्रदेश में इन दिनों खबरों में बने हुए नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले का मुद्दा है। ये दोनों ही बातें दमदार हैं, और सरकार के लिए परेशानी का सबब है। दूसरी तरफ पिछले तीन दिनों से एक अखबारी खबर के आधार पर कांग्रेस ने दिल्ली में इस बात को एक मुद्दा बनाया कि राहुल गांधी के घर पर पुलिस कुछ जानकारी लेने पहुंची थी। इसे जासूसी और निगरानी का घटिया गुजरात-मॉडल करार देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने मोदी सरकार पर बहुत से भारी-भरकम आरोप लगाए थे, और सीधे प्रधानमंत्री-गृहमंत्री से जवाब मांगा था। आज संसद में मोदी सरकार की तरफ से बताया गया कि ऐसी पूछताछ और जानकारी का यह सिलसिला 1980 के दशक से कांग्रेस का शुरू किया हुआ है, और यूपीए सरकार के पिछले दस बरसों में लगातार सभी पार्टियों के प्रमुख नेताओं के बारे में यह जानकारी ली गई। लगातार बिस्तर पर बने हुए भाजपा के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर, प्रणब मुखर्जी तक हर किसी के बारे में ऐसी जानकारी पुलिस ने जाकर ली। संसद में सरकार ने मजबूती के साथ इन आरोपों को चूर-चूर कर दिया, और कांग्रेस की एक बुरी फजीहत हुई है। दूसरी तरफ यह भी है कि गोवा में गांधी जयंती पर छुट्टी हटाने के सरकारी आदेश को लेकर चर्चा करने के बजाय संसद में कांग्रेस ने राहुल गांधी के बारे में नियमित और साधारण पूछताछ को मुद्दा बनाया, तो उससे यह भी जाहिर होता है कि कांग्रेस के लिए कौन सा गांधी अधिक मायने रखता है। 
कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय लीडरशिप एकदम बिखर चुकी दिख रही है। सोनिया गांधी की चुप्पी, और राहुल गांधी की गैरमौजूदगी के बीच संसद में अल्पसंख्यक हो चुकी कांग्रेस आज लोकसभा में विपक्ष भी नहीं बची है, और संसद के बाहर भी वह मुद्दों के बिना खाली हाथ बयान जारी करते दिख रही है। हमने पहले भी यह बात लिखी थी कि कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन को छत्तीसगढ़ कांग्रेस से यह सीखना चाहिए कि विपक्ष का काम कैसे किया जाता है। कांग्रेस को किसी मुद्दे को संसद के बाहर और संसद के भीतर बहुत बड़े-बड़े विशेषणों के साथ उठाने के पहले उसे ठोक-बजा लेना चाहिए। नेताओं की सुरक्षा के लिए पुलिस के नियमित कामकाज का इस्तेमाल राजनीतिक कीचड़बाजी के लिए करके कांग्रेस ने अपना दीवालियापन ही उजागर किया है। 

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