अफसर की ऐसी मौत की सीबीआई जांच जरूरी

19 मार्च 2015
संपादकीय
कर्नाटक में एक लोकप्रिय और धाकड़ आईएएस अफसर की जिस तरह मौत हुई है, उससे देश भर के वे तमाम लोग भी हिल गए हैं, जिन्होंने कभी कर्नाटक देखा भी नहीं है। हर बरस कुछ ऐसे ताकतवर लोग भी कैद जाते दिखते हैं जिन्होंने भारत के बड़ी-बड़ी सरकारी सेवाओं के लोगों की हत्या की। अभी-अभी इंडियन ऑयल के एक अधिकारी मंजूनाथ को उत्तरप्रदेश में मारने वाले लोगों को ऊंची अदालती से भी सजा मिली है। इस अफसर ने पेट्रोलियम मिलावट करने वालों को पकड़ा था। कर्नाटक के इस अधिकारी के बारे में खबरें हैं कि उसने रेत माफिया पकड़ा था, जमीन माफिया पर कार्रवाई की थी, और अब बिल्डर माफिया पर कार्रवाई के करीब था। ऐसे अधिकारी के आत्महत्या की बात लोगों को गले नहीं उतर रही है, और इसके परिवार का यह कहना है कि उसे कर्नाटक का एक सत्तारूढ़ कांगे्रस विधायक धमकी देते आ रहा था। परिवार ने उसका नाम भी बताया है, और मुख्यमंत्री दफ्तर के बाहर धरना देते हुए यह चेतावनी दी है कि अगर इस मौत की सीबीआई जांच नहीं करवाई जाती है, तो परिवार वहीं आत्मदाह कर लेगा। 
अच्छे अफसरों का ऐसा अंत देश के लिए बहुत ही बुरा है। कई राज्यों में ऐसी नौबत आती है, और हमारा यह मानना है कि जब कभी सत्तारूढ़ दल पर, या मरने वाले अफसर से बड़े अफसरों पर कोई सीधे आरोप रहते हैं, तो मामले को राज्य के बाहर ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सौंप देना चाहिए। इससे एक तो सत्ता पर बैठे लोग जांच को प्रभावित करने के आरोपों से बचते हैं, और दूसरी तरफ जांच निष्पक्ष होने की एक संभावना बनती है। आज ताकतवर लोग जब किसी जुर्म के पीछे रहते हैं, तो उसमें ईमानदार जांच और असरदार अदालती कार्रवाई, किसी की भी गुंजाइश नहीं रहती है। और यह बात सिर्फ कर्नाटक के इस मामले पर लागू नहीं होती है, देश भर में ऐसी एक परंपरा कायम होनी चाहिए।
अच्छे अधिकारियों को काम करने का मौका जिस राज्य में नहीं मिलता, उस राज्य में तबाही आती है। जनता की दौलत लूटी जाती है। कर्नाटक में इस नौजवान आईएएस की मौत पर वह जिला बंद रहा जहां वह कलेक्टर रह चुका था। और भी बहुत से लोगों का यह मानना है कि उसने इतने बड़े-बड़े लोगों पर हाथ डाल दिया था, और इतनी बेबाकी से कार्रवाई कर रहा था, कि उसे ताकतवर लोगों से धमकी मिलने में हैरानी की बात नहीं है। कर्नाटक कांगे्रस के पास बचे इक्का-दुक्का राज्यों में से है, और पिछले बरसों में वहां भाजपा और कांगे्रस की सरकारों के भ्रष्टाचार सामने आते रहे हैं, मंत्री, अफसर सभी किस्म के लोग जेल जाते रहे हैं, और सुप्रीम कोर्ट तक मामले चले हैं। ऐसे राज्य में भी अगर लोग सबक नहीं ले रहे हैं, तो उस राज्य के मामले सीबीआई जांच के लायक हैं, और बिना देर किए कर्नाटक सरकार को यह अनुरोध केंद्र सरकार को भेज देना चाहिए।

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