हिन्दुस्तान में नफरत को लग रहा है कि उसके अच्छे दिन आ गए

7 मार्च 2015
संपादकीय
नगालैंड के दीमापुर में बलात्कार के एक आरोपी को सैकड़ों स्थानीय लोगों ने जेल पर हमला करके वहां से निकाल लिया और सड़कों पर पीट-पीटकर मारकर एक टॉवर पर टांग दिया। इस आरोपी पर बांग्लादेशी होने का आरोप है, और ऐसा माना जा रहा है कि स्थानीय समुदायों की बांग्लादेश से आकर बसे लोगों से जो तनातनी चलती है, उसी का नतीजा इस हत्या की शक्ल में सामने आया। इसके बाद गैरस्थानीय लोगों के छोटे-छोटे कारोबार भी हमले और आगजनी की शिकार हुई। केन्द्र सरकार ने असम और नगालैंड की सरहद पर सेना को तैयार रखा है कि जरूरत पडऩे पर वह तुरंत दखल दे सके। इससे बिल्कुल अलग एक दूसरी खबर यह है कि उत्तर भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकसभा सीट वाराणसी में छेडख़ानी के आरोप पर एक अधेड़ आदमी को सड़क पर ही पीट-पीटकर मार डाला गया। इसी वाराणसी की एक तस्वीर कल से सोशल मीडिया पर छाई हुई है कि वहां डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद घाट पर अंग्रेजी में छपा एक बैनर टांगा गया है, जिस पर विदेशी सैलानियों के लिए चेतावनी है- यह त्यौहार लड़कियों के लिए खतरनाक है, और इस दिन सारे मर्द नशे में पूरी तरह धुत्त रहेंगे। इसीलिए सारी भारतीय महिलाएं इस दिन घर पर ही रहती हैं। सुरक्षा कारणों से पर्यटकों को सलाह है कि अपने होटल या गेस्ट हाउस में इस त्यौहार को किसी भारतीय परिवार के साथ ही मनाएं। आखिर में लिखा है कि इस दिन किसी को भी गले न लगाएं, क्योंकि किसी पर किसी का बस नहीं चलता, खतरा न उठाएं।
भीड़ जाकर जेल से किसी आरोपी को छुड़ाकर लाए, वहां मौजूद पुलिस हाथ बांधे खड़ी रहे, कफ्र्यू लगा रहे, और आरोपी को सड़कों पर पीट-पीटकर मार डाला जाए, यह कानून के राज का उस जगह पर खात्मा है। और देश भर में जगह-जगह लोग न सिर्फ बलात्कार के आरोपियों के खिलाफ, छेडख़ानी के आरोपियों के खिलाफ, बल्कि कई तरह के दूसरे बेकसूर तबकों के खिलाफ भी कानून हाथ में ले रहे हैं। और इसकी जड़ को समझना जरूरी है, इस पेड़ पर जो कांटे हैं, उनको सीधे खत्म नहीं किया जा सकता, इसकी जड़ को जानना ही होगा। और हम इसी जगह पहले कई बार लगातार यह लिख चुके हैं कि जब देश की सोच से इंसाफ खत्म होने लगता है, तब बेइंसाफी कई अलग-अलग शक्लों में सामने आती है। और आज तो भारत में सोच को कातिल बनाने की जैसी खुली कोशिश हो रही है, वह सदमा देने वाली है।
आज कहीं कोई मुस्लिम नेता किसी का सिर काटने के लिए एक ईनाम की मुनादी करता है, तो दर्जनों हिन्दू नेता, साध्वी और संत, प्रचारक और संगठनों के पदाधिकारी, इनकी बातों की हिंसा देखते नहीं बनती। अभी सोशल मीडिया पर लगातार एक वीडियो फैल रहा है जिसमें योगी आदित्यनाथ के संगठन के एक कार्यक्रम में बैनर लगे मंच पर यह योगी बैठा हुआ है, भगवा साड़ी में कोई एक साध्वी भी बैठी हुई है, और इस संगठन का एक नेता माईक पर मुस्लिमों के खिलाफ इतनी हैवानियत की, इतनी हिंसा की बातें कर रहा है, कि उनको सुनकर यह अंदाज लगाना नामुमकिन है कि ये बातें लोकतंत्र के भीतर कही जा सकती हैं, और प्रधानमंत्री का साथी सांसद उस मंच पर मौजूद रह सकता है। जब चारों तरफ किसी धर्म के खिलाफ, महिलाओं के खिलाफ, लड़कियों के खिलाफ, मोहब्बत के खिलाफ, प्रेम विवाह के खिलाफ, आधुनिक तौर-तरीकों के खिलाफ एक भयानक दकियानूसी हिंसा फैलाई जा रही है, जब वैज्ञानिक सोच को पूरी तरह खत्म किया जा रहा है तब सड़कों पर हत्या इसी सोच का एक विस्तार है। हम बार-बार यह लिखते आ रहे हैं कि जब लोकतंत्र और धार्मिक समानता के खिलाफ एक माहौल सोच-समझकर साजिश के तहत खड़ा किया जाता है, तो उस हिंसक सोच का असर दूर-दूर तक होता है, और लोग कानून अपने हाथ में लेने लगते हैं। जब सीधे प्रधानमंत्री के साथी ऐसी हिंसा फैलाने में लगे रहते हैं, और प्रधानमंत्री उस पर एक असाधारण चुप्पी साधे रखते हैं, तो इस चुप्पी को सहमति के सिवाय और कुछ नहीं माना जाता, और नफरत को आज यह लग रहा है कि उसके अच्छे दिन आ गए हैं।
लेकिन हिन्दुस्तान ऐसी हिंसा और ऐसी नफरत के साथ बहुत आगे नहीं बढ़ सकता। ऐसी हिंसा में मौत चाहे किसी की हो, उसके बाद खर्च तो सरकार का ही होता है। आज अगर देश भर में जगह-जगह ऐसी एक-एक हत्या से एक-एक शहर में कफ्र्यू लगते चले जाए, तो देश की कमाई के आंकड़े कहां जाएंगे? यह सिलसिला थमना चाहिए। और जब केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी हिन्दू संगठनों के लोग बड़े पैमाने पर इस तरह की हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं, तो इसका प्रधानमंत्री से नीचे किसी और ताकत से कम होना मुमकिन नहीं है, और आज बाकी देश में जो शहरी अराजकता फैल रही है, लोग अदालतों से परे अपने खुद के फैसलों को इंसाफ मानने लगे हैं, उसके पीछे देश में कानून का सम्मान खत्म होना है। भारत जैसे विविधता से भरे हुए देश में अगर वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक सोच इस तरह खत्म हो जाएगी, तो इस देश का ताना-बाना ही बिखर जाएगा, और धागे के टुकड़े कभी सोने की चिडिय़ा नहीं बना सकते।

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