जो लोग मीडिया को देश की नब्ज मानते हैं, वे धोखे में...

17 मार्च 2015
संपादकीय

दिल्ली का मीडिया कल से जिस तरह इलाज से लौटते अरविन्द केजरीवाल को दिखाने के लिए बावला हो गया है, उससे यह सवाल उठता है कि क्या अपने-आपको राष्ट्रीय मीडिया कहने वाला यह राजधानी-केंद्रित तबका बाकी देश को भी देख पाता है, या फिर काम की सहूलियत ने उसकी दूरदृष्टि खत्म कर दी है? टीवी चैनलों के और अखबारों के भी कैमरे ताकतवर होते गए हैं, उनके लेंस दूर-दूर तक देख पाते हैं, लेकिन देश के बाकी तबकों को देखने की नजर राजधानी के मीडिया में देश में भी घटती चली गई है, और शायद प्रदेश की राजधानियों में भी। 
आज जो लोग मीडिया की खबरों को देखकर यह समझते हैं कि देश की नब्ज पर उनका हाथ है, और वे देश के हाल से वाकिफ हैं, उनको राजधानियों और महानगरों में केंद्रित एक बहुत छोटे से हिंदुस्तान को देखना ही नसीब होता है, और खासकर टीवी चैनलों के दर्शकों को तो महज वही देखने मिलता है जो कि बहुत कम शब्दों में बताया जा सकता है, जिसके साथ जाने के लिए सनसनीखेज तस्वीरें हैं, और जो बांधकर रख सकता है। इसी तरह की एक बड़ी खाई देश के उत्तर और दक्षिण में हो गई है, मीडिया की बदौलत। हम दक्षिण का मीडिया तो अधिक नहीं देख पाते, लेकिन उत्तर के मीडिया के लिए दक्षिण तब तक परदेश सरीखा है, जब तक वहां कोई बड़ी घटना न हो जाए। और उत्तर-पूर्व तो मानो चीनी मीडिया के भरोसे छोड़ दिया गया है। राष्ट्रीय होने का दावा करने वाले मीडिया में उत्तर भारत की एक-एक आगजनी, हर मौत, हर छोटी-बड़ी घटना राष्ट्रीय चैनलों के प्राइम टाईम पर भी आ जाती हैं, और बाकी देश की बड़ी घटनाएं भी धरी रह जाती हैं। दूसरी तरफ देश के अधिकतर गंभीर मुद्दे भारत के लगभग गैरगंभीर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से परे रहते हैं, और कई बार तो दूरदर्शन देखने पर ऐसा पता लगता है कि मानो वह किसी और हिंदुस्तान की खबरें दिखा रहा है जिनका कि देश के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से कोई लेना-देना नहीं है।
कुल मिलाकर गलाकाट बाजारू मुकाबले में जुटे हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को अगर कोई भारतीय समाज और देश की एक तस्वीर मानते हों, तो वे बड़े धोखे में हैं। इस नौबत पर कोई चर्चा भी नहीं होती, और लोग शायद सबसे अधिक सनसनीखेज को देखने के इस तरह, और इस कदर आदी भी हो गए हैं कि बाजारू मीडिया के वे एक वफादार ग्राहक रहे गए हैं, और देश की व्यापक सच्चाई के आईने की उनको मानो जरूरत भी नहीं रह गई है।

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