एनडीए के भीतर शिवसेना घरेलू ऑडिटर सरीखी...

7 अपै्रल 2015
संपादकीय
महाराष्ट्र की शिवसेना वैसे तो बहुत से मुद्दों पर एक आक्रामक और उग्र मराठीवाद और महाराष्ट्रवाद को लेकर चलती है, और बाल ठाकरे के वक्त से मुस्लिमों के खिलाफ उसकी जो बातें रहते आई हैं, उनसे देश के समझदार और धर्मनिरपेक्ष तबके की सहमति की कोई गुंजाइश नहीं रहती। लेकिन एनडीए के भीतर भाजपा के एक भागीदार की हैसियत से, और महाराष्ट्र में सत्ता के गठबंधन की हिस्सेदार के रूप में जब वह भाजपा की रीति-नीति के खिलाफ खुलकर कहती है, अपनी पार्टी के अखबार में अकसर लिखती है, तो उसकी बातें महत्वपूर्ण हो जाती हैं। उसने पिछले कई महीनों में, या कि मोदी की सरकार बनने के पहले से लेकर अब तक मोदी से लेकर भाजपा के दूसरे नेताओं तक की जो आलोचना की है, वह भाजपा के लिए एक आत्ममंथन की बात रहते आई है। उसने महाराष्ट्र सरकार के कई फैसलों के खिलाफ भी लगातार लिखा है और कहा है। कल शिवसेना ने अपने अखबार में संपादकीय में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो झाड़ू लेकर गंदगी साफ करने के लिए निकले हैं, लेकिन उनकी पार्टी के नेता, सांसद और मंत्री अपने मुंह से जिस तरह की गंदगी फैला रहे हैं, वैसे मुंह वे कैसे साफ करेंगे? 
हमारे पाठकों को याद होगा कि मोदी के सत्ता में आने के बाद से हर हफ्ते-दो हफ्ते देश में मोदी के साथियों या उनके समर्थक संगठनों, या उनके मंत्री-सांसदों ने ऐसे भयानक बयान दिए हैं कि उनकी वजह से हमें भी नरेन्द्र मोदी और भाजपा को यह सलाह देनी पड़ी कि वे अपने लोगों को काबू करें। आज ही किसी एक बड़े अंगे्रजी अखबार में किसी का लेख है कि किस तरह बकवासी बयानों ने मोदी के इतने महीनों की उपलब्धियों को ढांककर रख दिया है। उनका सारा आर्थिक एजेंडा, और देश-विदेश में उनकी बनाई हुई कल्पना की तस्वीर पर आए दिन उनके साथ के लोग पीकते चलते हैं। यह सिलसिला उनको इसलिए खत्म करवाना चाहिए क्योंकि इससे उनकी पार्टी और उनकी अपनी छवि का चाहे जो नुकसान हो रहा हो, इससे देश के माहौल का भी एक बड़ा नुकसान हो रहा है। और जब विविधताओं वाले इस विशाल देश में एक निहायत गैरजरूरी और थोपी हुई साम्प्रदायिकता हावी रहेगी, तो यह जाहिर है कि सारे आर्थिक सपने धरे रह जाएंगे। जब राज्य साम्प्रदायिकता, कट्टरता, और अवैज्ञानिक मुद्दों से जूझते रहेंगे, तब केंद्र की मोदी सरकार भी अपने खुद के तय किए हुए लक्ष्य पूरे नहीं कर पाएगी। आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें जमीन पर गिर पड़ी हैं, इसलिए मोदी को देश में अधिक दिक्कत नहीं हो रही है। लेकिन अगर ये कीमतें कुछ बरस की तरह आसमान पर पहुंची हुई रहतीं, तो आज देश की जनता की बेचैनी मोदी को घायल भी करती।
मोदी और भाजपा को शिवसेना की कही हुई इस बात को अपने खुद के हित में गंभीरता से लेना चाहिए। देश के माहौल में आज अगर भाजपा मंत्री और नेता अठारहवीं सदी की कट्टरता को बढ़ावा देने में लगे हैं, अवैज्ञानिक बातों को फैलाने में लगे हैं, वैज्ञानिक तथ्यों को नकारने में लगे हैं, संसदीय समितियों में रहते हुए अपने खुद के तंबाकू कारोबारों को बढ़ाने में लगे हैं, तो यह सिलसिला थमना चाहिए। एनडीए के भीतर शिवसेना आज एक घरेलू ऑडिटर जैसा काम कर रही है। भाजपा को, और बाकी एनडीए को भी इसका फायदा उठाना चाहिए।

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