नवजात संतानों को तो ले गए माताओं को मरने छोड़ गए...

30 अपै्रल 2015
संपादकीय

नेपाल से लगातार दिल दहलाने वाली जो खबरें आ रही हैं, उनमें एक खबर भूकंप के बाद की, और भूकंप से परे की ऐसी है जिसे हैवानों पर भरोसा करने वाले लोग हैवानियत कहेंगे। इजराइल के समलैंगिकों ने अपने बच्चे पैदा करने के लिए भारत और नेपाल की गरीब महिलाओं को छांटा था, और किराए की कोख में ये बच्चे सैकड़ों की गिनती में पल रहे हैं, और पैदा भी होते जा रहे हैं। इजराइल की संपन्नता और वहां का कानून, नेपाल की गरीबी और वहां के बेबस-उदार कानून के साथ मिलकर एक ऐसी नौबत बना चुके हैं कि इजराइल समलैंगिक मामूली भुगतान करके नेपाल में अपने बच्चे पैदा करवाते हैं, और ले जाते हैं। 
अभी लगातार वहां से तस्वीरों के साथ ऐसी खबरें आ रही हैं कि इजराइल से फौजी विमान आकर अपने ऐसे समलैंगिक पिताओं और उनके नवजात बच्चों को लेकर वापिस जा रहे हैं। लेकिन इस देश और इसके ऐसे पिताओं में यह रहम भी नहीं है कि साथ-साथ वे ऐसे बच्चों की माताओं को भी ले जाएं। नतीजा यह है कि दूध पीते ऐसे बच्चे अपनी माताओं से भी दूर जा रहे हैं, और उनको जन्म देने वाली माताएं इस तरह वहां पर मरने के लिए छोड़ दी गई हैं। एक तरफ तो दुनिया के कई देश मदद के लिए नेपाल पहुंच रहे हैं और राहत में जुटे हुए हैं, दूसरी तरफ बच्चे पैदा करवाने के अपने मकसद के पूरे होते ही दुनिया के सबसे संपन्न और सबसे हिंसक इस देश, इजराइल की जनता और सरकार, दोनों ने इतनी भी नरमी नहीं दिखाई कि कुछ दिनों के लिए सही इन बच्चों की माताओं को भी साथ ले जाते। 
इसी तरह की एक दूसरी लापरवाही इसमें सामने आई है कि नेपाल को पहुंची पाकिस्तान की राहत सामग्री में गोमांस से बने हुए खाने के लिए तैयार सामानों के पैकेट भरे हुए हैं। नेपाल एक हिंदू राष्ट्र है, और वहां पर गाय को मारने के खिलाफ कड़ा कानून है, और आबादी का कम से कम एक बड़ा हिस्सा तो गोमांस नहीं खाता होगा। ऐसे में पाकिस्तान इस मदद को भेजने से पहले थोड़ी सी सावधानी बरत सकता था। हम यह भी नहीं मानते कि पाकिस्तान ने सोच-समझकर ऐसा किया होगा क्योंकि इससे एक तो उसका सामान खर्च हुआ, और दूसरा उसे बदनामी और नाराजगी हासिल हुई। लेकिन फिर भी यह एक बहुत मामूली समझ की बात है, और किसी भी देश की सरकार को यह तो समझ में आना ही चाहिए था। खासकर पाकिस्तान की बात करें तो इस मुस्लिम देश में कुछ जानवरों के गोश्त के खिलाफ सामाजिक वातावरण भी है, और मुस्लिमों के बीच जानवरों को मारने के तरीके को लेकर भी एक नियम-कायदा है। ऐसे में गोमांस भेजते हुए पाकिस्तान ने एक बुनियादी और न्यूनतम समझ का इस्तेमाल भी नहीं किया।
भूकंप से होने वाले नुकसान की मोटी-मोटी खबरों के बीच इन बारीक पहलुओं पर हम इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि इससे परे भी जिंदगी में बहुत से ऐसे मौके आते हैं जब लोग बेहतर और संवेदनशील इंसान बन सकते हैं, या लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचा सकते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें