सलमान के फैसले से निकली कुछ और बातें

संपादकीय
06 मई 2015

सलमान खान को शराब पीकर, बिना ड्रायविंग लाइसेंस गाड़ी चलाने और फुटपाथ पर सोए गरीब लोगों को देर रात कुचलकर, मारकर, वहां से भाग जाने का कुसूरवार पाकर अदालत ने सजा सुनाई है। इस जुर्म के तेरह बरस बाद जाकर अभी निचली अदालत से सजा हुई है, और हो सकता है कि ऊपर की अदालतों तक पहुंचते हुए इस सजा को बरकरार रहने में कई बरस और भी लग जाएं। लेकिन एक बात जो सोचने लायक है, वह यह है कि फुटपाथ के गरीबों से लेकर बहुत मामूली कमाई वाले, या गरीब लोग गवाह के कटघरे में एक फौलादी मजबूती के साथ खड़े रहे। उन्हीं गवाहों के बयान की बुनियाद पर आज यह सजा खड़ी हुई है, जो कि सैकड़ों करोड़ के मालिक इस अरबपति, और उसके लाखों करोड़ के फिल्म उद्योग की तमाम ताकत के बावजूद टस से मस नहीं हुए। 
हम यह नहीं कहते कि गरीब गवाह आमतौर पर बिक जाते हैं, हम यह भी नहीं कह रहे कि सलमान खान या उनके वकीलों ने गवाहों को खरीदने की कोई कोशिश की। लेकिन यह बात अपनी जगह स्थापित हुई है कि इतने मशहूर फिल्मी सितारे की तमाम ताकत के तूफान के मुकाबले गरीब और बहुत गरीब फुटपाथी गवाहों के दिए जिस तरह आखिरी तक जलते रहे, वह देखने लायक बात है। सलमान ही नहीं उनकी जगह कोई भी रहे, अपनी ताकत तक हर कोई काबिल से काबिल वकील रखते हैं, और बचने की कोशिश करते हैं। भारत के अदालती सिलसिले में बहुत से ऐसे मामले रहते हैं जिनमें ताकतवर और दौलतमंद गवाह भी अदालती कटघरे में जाकर याददाश्त खोने लगते हैं, और पुलिस को दिए बयान से मुकरने लगते हैं। ऐसे में छोटे-छोटे लोगों ने इस मामले में जिस मजबूती से काम किया है, वह देखने लायक है। इस मामले में कई गवाह मुकर भी गए हैं, लेकिन वैसा तो बहुत से मामलों में होता है, जो गवाह टिके रहते हैं वे चर्चा और तारीफ के लायक हैं। भारत के संपन्न तबके में यह आम धारणा रहती है कि गरीब को तो खरीदा जा सकता है, और अमीर मानो बिकाऊ हो ही नहीं सकते। यह मामला एक बार फिर इस हकीकत को खबरों में लाता है कि छोटे-छोटे गरीब लोग भी करोड़ों कमाने की एक संभावना से परे सच के साथ खड़े रहते हैं। और इससे गैरगरीब लोगों को भी अपने खुद के बारे में यह सोचना चाहिए कि क्या उन्हें बिना किसी बेबसी की अपनी जिंदगी में कुछ हौसला नहीं दिखाना चाहिए?
सलमान खान का मामला अदालत के इस दौर तक पहुंचने के बाद देश के ताकतवर लोगों को भी एक नसीहत देता है कि शराब, बददिमागी, और गाड़ी के इंजन की ताकत मिलकर सड़क पर आम लोगों को कुचल तो सकती है, लेकिन ऐसे सैकड़ों मामलों में से कोई एक मामला ऐसा भी हो सकता है जिसमें कि सजा से न बचा जा सके। हम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ही आए दिन देखते हैं कि किस तरह संपन्न तबके की बड़ी-बड़ी गाडिय़ां पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ शराब से भी चलते हुए छोटे लोगों को कुचल रही हैं, ऐसे लोगों को भी सलमान के हाल को देखना चाहिए, और अपनी बददिमागी कम करनी चाहिए। ऐसे फैसले देश के गरीब और आम लोगों के मन में अदालतों के प्रति भरोसा एक बार फिर बचाते हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि पुलिस या जांच एजेंसी, प्रयोगशाला, सुबूत, गवाह, वकील, और जज, इनमें से कुछ न कुछ को, या हर किसी को खरीदा जा सकता है। देश के ताकतवर लोगों के खिलाफ जब ऐसे फैसले होते हैं तो भारतीय लोकतंत्र में अदालतों पर से लोगों का उठता हुआ भरोसा, उठते-उठते थोड़ी देर के लिए और बैठ जाता है।

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