छत्तीसगढ़ में अब सरकार पूरी हुई, काम की चुनौतियां

22 मई 2015
संपादकीय

एक तरफ केंद्र में मोदी सरकार का एक बरस पूरा होने जा रहा है, और उसी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल का विस्तार हो रहा है, और पौन दर्जन विधायकों को मंत्री और संसदीय सचिव बनने मिल रहा है। इसके साथ ही सरकार का अपना ढांचा निर्वाचित लोगों से पूरा हो रहा है। हफ्ते भर के भीतर ही सरकार के निगम-मंडलों में सत्तारूढ़ पार्टी के लोगों का मनोनयन होना तय है, और करीब दर्जन भर नेता कुर्सियां और लालबत्तियां पा लेंगे। लेकिन इसके साथ-साथ सत्ता पर नए-नए आने वाले लोगों से कुछ गलतियां, और कुछ गलत काम होने का एक खतरा बढ़ भी जाएगा, जो कि सरकार के आने वाले बरसों में परेशानी खड़ी कर सकेगा। 
छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ पार्टी अगला महीना अपने तकरीबन सारे निर्वाचित और मनोनीत नेताओं के ढांचे के साथ सरकार चलाना शुरू कर देगी। लोकसभा चुनाव और म्युनिसिपल-पंचायत चुनावों के चलते हुए यह काम रूका हुआ था, और इसके साथ अब सरकार का पूरी रफ्तार से काम करना, नए मोर्चो पर नई कल्पनाओं के साथ आगे बढऩे की संभावनाओं का एक मौका खड़ा होता है। रमन सिंह सरकार के लिए  आने वाले दिन सरकार के कामकाज को जनता की नजरों में बेहतर साबित करने की चुनौतियों वाले रहेंगे। तीन नए मंत्रियों के साथ कुछ मंत्रालयों में फेरबदल भी हुए हैं, और सारे ही मंत्रालयों से जुड़े हुए निगम-मंडल भी अब राजनीतिक मुखिया पा जाएंगे। ऐसे में एक खतरा यह भी रहता है कि लोगों के बीच आपस में कुछ खींचतान हो, और कुछ लोग सत्ता की गलतियां करने लगें। लेकिन इस बीच ऐसी संभावना भी बनती है कि अगर राजनीतिक मनोनयन वाले लोग अच्छा काम करें, तो वे सरकार की साख बढ़ा भी सकते हैं। 
वैसे इस बात को अनदेखा नहीं करना चाहिए कि मंत्रिमंडल से लेकर निगम-मंडल तक मुख्यमंत्री और पार्टी के नेताओं के जाति के आधार पर, क्षेत्र के आधार पर, वरिष्ठता और वजन के आधार पर कई तरह के समझौते करने पड़ते हैं। लेकिन इनके बीच ही लोकतंत्र में राजनीति चलती है, और मुख्यमंत्री के सामने इन सबके बीच तालमेल बिठाना एक बड़ी बात रहेगी। फिर राज्य सरकार के सामने अपने कुछ विभागों के पकड़ाए हुए बड़े भ्रष्टाचार से उबरने की एक चुनौती भी है। यह खतरा बाकी विभागों पर भी है, और दूसरी जगहों पर नागरिक आपूर्ति निगम जैसे संगठित व्यापक भ्रष्टाचार के पकड़ाए जाने के पहले उसे रोकना होगा। अपने शासन के बारहवें बरस में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह विपक्ष और जनता से किसी तरह की रियायत की उम्मीद नहीं कर सकते। और केंद्र में मोदी सरकार और अमित शाह के राजनीतिक नेतृत्व के चलते हुए भी छत्तीसगढ़ केंद्र के प्रति एक बरस पहले के मुकाबले आज अधिक जवाबदेह है। 
देश के संघीय ढांचे में केंद्र सरकार से राज्य को बहुत कुछ हासिल करने की अपार संभावना है। राज्य सरकार को अब अपने इस पूरे ढांचे के साथ इस बारे में गंभीरता से मेहनत करनी चाहिए, क्योंकि जो राज्य केंद्र के सामने अच्छे प्रस्ताव लेकर जाते हैं, वे वहां से खासा बजट भी लेकर आते हैं। 

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