सिगरेट और शराब के मोर्चे पर सरकारों की कथनी और करनी

01 जून 2015
संपादकीय

धूम्रपान का सालाना दिन आया, और चले गया। प्रधानमंत्री से लेकर नीचे तक बहुत से लोगों ने इस दिन जनता से कुछ अपीलें कीं, कहीं-कहीं कुछ समारोह हुए और बात आई-गई हो गई। दरअसल भारत में बहुत सी जरूरी बातों को सालाना जलसों के लायक मान लिया जाता है। सिगरेट और शराब बनाने वाली कंपनियों की ताकत इतनी अधिक रहती है कि बहुत सी सरकारें उनके सामने झुकी खड़ी रहती हैं। शराब और सिगरेट के इश्तहारों को देखें, तो उन पर रोक का कानून जमाने से चले आ रहा है। लेकिन इन दोनों सामानों के ब्रांड को लेकर सौ किस्म के दूसरे सामान बाजार में उतार कर इन दोनों प्रतिबंधित सामानों के ब्रांड को बढ़ावा दिया जाता है। विल्स नाम से कपड़ों की दुकानें पूरे देश में है, और शराब के तो हर ब्रांड के नाम से कहीं पानी बाजार में है, तो कहीं म्युजिक सीडी के नाम पर दारू के ब्रांड को बढ़ावा दिया जाता है और कहीं-कहीं तो शराब के नाम वाली ताश की गड्डियों के इश्तहार किए जाते हैं। सरकार में बैठे हुए तमाम लोगों को यह मालूम रहता है कि ऐसे फर्जी विज्ञापनों पर जितना खर्च किया जाता है, उतने की तो सीडी भी नहीं बिकती, लेकिन बाजार की ऐसी साजिशों को सरकारें अनदेखा करते चलती हैं। 
दूसरी तरफ सिगरेट और शराब के सार्वजनिक इस्तेमाल के खिलाफ केन्द्र और राज्य सरकारों के बड़े कड़े कानून बने हुए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि रेलगाडिय़ों में लोग खुलकर शराब पीते हैं, सरकारी दफ्तरों में और बाग-बगीचों में लोग खुलकर सिगरेट पीते हैं, और नियम-कायदे लागू करने वाली सरकारी एजेंसियां न तो इतनी बड़ी हैं कि वे ऐसे हर मामले पर कार्रवाई कर सकें, और न ही उनकी कोई दिलचस्पी होती कि बिना किसी कमाई वाले ऐसे मामलों में वे अपना वक्त खराब करें। 
लेकिन इसी बीच एक नई उम्मीद संचार तकनीक में सामने रखी है। रेलगाडिय़ों में अब शिकायत करने के लिए सरकार ने टेलीफोन नंबर दिए हैं जिन पर लोग किसी भी तरह से संदेश भेजकर रेल के डिब्बे के भीतर के हाल की शिकायत कर सकते हैं, और इसका फायदा भी हो रहा है। अब अकेले सफर करने वाली महिलाएं भी फोन पर एक संदेश भेजकर रेल कर्मचारियों को बुला सकती हैं, और चूंकि यह शिकायत पल भर में रिकॉर्ड में आ जाती है, इसलिए चाहे अनचाहे रेल कर्मचारियों को, रेल पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ती है। एक संचार तकनीक एक औजार की तरह कारगर साबित हो रही है, और इसे अधिक बढ़ावा देने की जरूरत है। कहने के लिए तो छत्तीसगढ़ की ट्रैफिक पुलिस ने भी शिकायत का एक नंबर घोषित किया हुआ है, लेकिन न तो वह नंबर लगता, और न ही उस पर की गई शिकायत पर किसी कार्रवाई के बारे में आज तक सुनने में आया है। सरकार, न सिर्फ केन्द्र सरकार को, बल्कि राज्य सरकारों को, और म्युनिसिपलों को भी चाहिए कि वे वेबसाइट बनाएं, जिन पर लोग शिकायत या बदहाली की तस्वीरें पोस्ट कर सकें, और संदेश भेजकर शिकायत दर्ज कर सकें। 
सिगरेट-बीड़ी को लेकर हमने आज की बात यहां शुरू की है, और इस बारे में कई तरह की जागरूकता की जरूरत है। अभी-अभी दो दिन पहले यह खबर आई है कि भारत में बड़ी तादाद में सिगरेट विदेशों से तस्करी के रास्ते आ रही है। अब ऐसी सिगरेट से सरकार की टैक्स चोरी का नुकसान तो अलग रहा, यह भी अंदाज नहीं लगेगा कि देश में सिगरेट की खपत बढ़ रही है या घट रही है। सरकार के आंकड़े सिर्फ सरकारी टैक्स के आधार पर तय होते हैं, और स्मगलिंग से आने वाली सिगरेट कितनी हैं, उनसे कितना नुकसान हो रहा है, लोगों के बीच इसका इस्तेमाल घट रहा है कि बढ़ रहा है, इसका कोई अंदाज नहीं लग सकता। तो एक तरफ तो इस पर काबू की जरूरत है, दूसरी तरफ सरकार को कड़ाई से सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट का इस्तेमाल रोकना चाहिए। ऐसा करने वाले लोग न सिर्फ अपना नुकसान करते हैं, बल्कि आसपास के दूसरे लोगों का भी नुकसान करते हैं। सिगरेट के खिलाफ जो भी थोड़े-बहुत नियम-कानून हैं, उनको कड़ाई से लागू करना चाहिए। लोग भी फोटो खींचकर इसकी शिकायत दर्ज करवा सकें, और उस पर कार्रवाई होते दिखे, तो दूसरे लोगों का हौसला पस्त होगा।

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