ऐसे आदित्यनाथों से दहशत फैल रही है, हिकारत भी

9 जून 2015
संपादकीय

न चाहते हुए भी आज फिर आदित्यनाथ सरीखे के बयान को लेकर इस जगह लिखना पड़ रहा है। भाजपा के इस योगी कहे जाने वाले सांसद की हिंसक और साम्प्रदायिक बातों को लेकर मोदी सरकार की कई अच्छी खबरें पहले पन्ने से भीतर के पन्नों पर खिसकते रही हैं, और आज फिर वही हुआ है। आदित्यनाथ ने कहा है कि जो लोग योग का विरोध कर रहे हैं, उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए, और जो लोग सूर्य नमस्कार को नहीं मानते, उन्हें समुद्र में डूब जाना चाहिए। भारत छोडऩे की बात नई नहीं है। कुछ ही दिन पहले मोदी के एक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा था कि जिन लोगों को गोमांस खाना है, उन लोगों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए। इसके पहले भी भाजपा के एक और बड़े बिहारी नेता गिरिराज सिंह ने कहा था कि जो लोग मोदी सरकार का विरोध करते हैं, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। 
अब कुल जमा बात यह बन रही है कि इस देश के वे तमाम हिंदू पाकिस्तान चले जाएं जो कि गोमांस खाते हैं, तो ऐसे में दलितों-आदिवासियों सहित दसियों करोड़ हिंदू इस देश से कम हो जाएंगे। इसके बाद केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर-पूर्व, कश्मीर, और दक्षिण भारत की कुछ दूसरी जगहों के अल्पसंख्यक भी कुछ करोड़ कम हो जाएंगे। फिर जो लोग मोदी सरकार का विरोध करते हैं, वे भी अगर पाकिस्तान भेज दिए गए, तो दसियों करोड़ लोग और कम हो जाएंगे, क्योंकि इतने लोगों ने तो मोदी के खिलाफ वोट दिया ही था। अब जो बचे-खुचे हैं, उनमें से जो लोग देर से सोकर उठते हैं, और सूर्य नमस्कार पर जिनकी आस्था नहीं है, ऐसे दसियों करोड़ लोग और चल बसेंगे। इन सबको मिला लें तो भाजपा के ये तीन नेता ही मिलकर देश की आबादी को आधी करने पर उतारू हैं। 
अब एक सवाल यह उठता है कि मोदी जैसे ताकतवर के मुखिया रहते हुए और उनके सबसे करीबी सहयोगी के भाजपाध्यक्ष रहते हुए क्या भाजपा के भीतर किसी की यह मजाल हो सकती है कि मोदी की सहमति और अनुमति के बिना इस तरह की बातें करे? आज कांगे्रस मुख्यमंत्रियों की बैठक में कांगे्रसाध्यक्ष सोनिया गांधी ने यह बात कही भी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने सहयोगी की कही हुई साम्प्रदायिक बातों को अनदेखा करते हैं, और दूसरी तरफ अपने-आपको अच्छी सरकार का चैंपियन बताते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी अपने साथियों को ऐसे बयान देने की छूट देते हैं। 
यह बात मोदी के समर्थकों और प्रशंसकों में से जो लोग साम्प्रदायिक हिंसा वाले नहीं हैं, उनके बीच भी चल रही है कि मोदी के मौन को सहमति के अलावा और क्या माना जा सकता है? संस्कृत में बहुत पहले लिखा गया था कि मौन: सम्मति लक्षणम्..., आज मोदी के साथी अच्छे भले विज्ञान को, अच्छे भले योग को साम्प्रदायिक लहू में लपेटकर बहुत से लोगों से परे करवा दे रहे हैं। यह पूरी की पूरी सोच बहुत ही हिंसक और साम्प्रदायिक है, यह देश को काटने और बांटने वाली है, देश को छोड़कर लोगों को बाहर जाने के लिए कहना देश की बहुत बड़ी आबादी का अपमान है। और अगर मोदी या उनकी पार्टी का यह सोचना है कि लोगों को काट-काटकर, अपने से दूर करके भाजपा का कोई चुनावी फायदा हो रहा है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह सिलसिला ऐसे किसी चुनावी गणित से परे भी थमना चाहिए, क्योंकि इससे देश के कई तबकों में दहशत फैल रही है, और हिकारत भी।

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