पीएम के कमरे की पेंटिंग से देशभर के हस्तशिल्प तक...

संपादकीय
26 जुलाई 2015

आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेडियो पर अपने मन की बात के प्रसारण में छत्तीसगढ़-नागपुर में काम करने वाले एक रेल अधिकारी का जिक्र किया जिनकी पेंटिंग्स इन दिनों खबरों में हैं। इनमें से कई पेंटिंग्स उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा के रेलवे प्लेटफॉर्म को देखकर बनाई थीं। अब प्रधानमंत्री के मुंह से इस चर्चा के बाद यह कलाकार अचानक और शोहरत पा गया है। लेकिन इससे परे भी देखें तो रोजाना प्रधानमंत्री के घर-दफ्तर में उनसे मिलने वाले लोगों की जो तस्वीरें सरकार जारी करती है, उनमें प्रधानमंत्री के पीछे दीवार पर लगी हुई एक ही तस्वीर लगातार दिखती है, और जिसके बारे में यह खुलासा कहीं नहीं होता कि उसका कलाकार कौन है। दूसरी बात यह कि अब तक वे सैकड़ों मेहमानों से उसी एक तस्वीर के सामने लगी कुर्सियों पर बैठकर मिल चुके हैं। उसका कलाकार चाहे जो हो, प्रधानमंत्री के घर-दफ्तर का काम देखने वाले अफसरों या सलाहाकारों में से कोई अगर कला की कुछ अधिक समझ रखते होते, तो उस जगह की तस्वीर को कुछ-कुछ दिनों के बाद बदल भी सकते थे, ताकि कई कलाकारों का काम देश-विदेश तक ऐसी सरकारी तस्वीरों के रास्ते पहुंच पाता। इतने विशाल देश के प्रधानमंत्री के कमरे में अलग-अलग प्रदेशों के, अलग-अलग शैलियों के कलाकारों और चित्रों को जगह मिल सकती थी, और ओहदे की अहमियत के साथ-साथ कला का एक अतिरिक्त सम्मान भी हो सकता था। लेकिन यही बात ऐसे दूसरे महत्वपूर्ण लोगों के साथ हो सकती है जो कि मुख्यमंत्री हैं, या कि राज्यपाल हैं, और जिनके पास रोजाना कई लोग मिलने आते हैं। ऐसे दफ्तरों या घरों में साज-सज्जा में फेरबदल करके देश या प्रदेश की अलग-अलग तरह की कला को खींची जाने वाली तस्वीरों में जगह दी जा सकती है, और उससे बिना किसी अतिरिक्त प्रचार के कलाकृति और कलाकार को बड़ी संख्या में पाठक-दर्शक मिलते रहेंगे। 
प्रधानमंत्री मोदी चूंकि रंग-बिरंगे और तरह-तरह के कपड़ों को बनवाकर पहनने के शौकीन हैं, इसलिए वे, या उनकी तरह के और दूसरे मशहूर लोग भारत में बनने वाले हजारों इलाकों के लाखों किस्म के कपड़ों में से अलग-अलग को मौका भी दे सकते हैं, और तस्वीरों के साथ वे उन बुनकर-इलाकों या शैलियों का जिक्र भी हो सकता है। जब मेड-इन-इंडिया को कामयाब बनाना मकसद हो, तो ऐसे तमाम मौकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हमारे पाठकों को याद होगा कि जब मोदी ने दूसरे देशों के राष्ट्र प्रमुखों या शासन प्रमुखों को भारत की हस्तकला की कलाकृतियां भेंट कीं, तो हमने बहुत मेहनत करके उनके पीछे के कलाकारों को ढूंढकर निकाला, और पहले ही दिन की खबरों में उनकी तस्वीर और नाम सहित उनकी कला की जानकारी भी इस अखबार में छापी थी। हो सकता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय या उनके प्रचार-अधिकारी भी ऐसे हर मौकों पर चुनिंदा कलाकृतियों और कलाकारों के बारे में जानकारी देते चलें कि मोदी किन लोगों को किनकी बनाई हुई कृतियां भेंट कर रहे हैं। 
हम भारत में हस्तशिल्प और हाथकरघा के विकास की अपार संभावना देखते हैं। घरेलू बाजार में भी, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी। प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक, और केन्द्रीय मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक, अगर विदेशी मेहमानों के आने पर भारतीय कला-कौशल का सूझ-बूझ के साथ इस्तेमाल हो, और उनके बारे में रोचक जानकारी साथ-साथ मीडिया को दी जाए, तो देश के भीतर भी देश के हस्तशिल्प के बारे में एक नई जागरूकता पैदा होगी। और हस्तशिल्प-हाथकरघा के बारे में एक बात यह भी है कि इनके लिए न तो महंगी तकनीक लगती, न ही हर वक्त बिजली लगती, और न ही कोई आयातित कच्चा माल लगता। यह लोगों को सौ फीसदी रोजगार देने वाला काम है, और भारत के पर्यटन बाजार के साथ-साथ इसका गहरा रिश्ता है। आज जिस तरह देश में कौशल-विकास की बात चल रही है, तो कुछ आईआईटी के लोगों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हस्तशिल्पकारों के औजारों को अधिक उत्पादक और बेहतर बनाने का काम किया भी है। इस तरह के काम को भी बढ़ाने की जरूरत है ताकि भारत का परंपरागत कुटीर उद्योग बेहतर उत्पादकता के साथ हस्तशिल्प बना सके। 

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