जिसके ऐसे-ऐसे यार, उसको दुश्मन की क्या दरकार...

संपादकीय
3 जुलाई 2015

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे ट्विटर पर गालियों का इस्तेमाल न करें। उनको ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि उनके साथ हाथ मिलाते हुए जिन लोगों ने अपनी तस्वीरें अपने ट्विटर खातों पर पोस्ट की थीं, और जो रात-दिन मोदी और भाजपा के गुणगान में लगे हुए थे, उनमें से बहुत से लोग मां-बहन की गालियां उन लोगों के लिए लिख रहे थे जो कि मोदी या भाजपा से सहमत नहीं हैं। अब कम्प्यूटर तकनीक की वजह से यह आसान हो गया है कि ऐसी गालियां मिटाने के पहले भी उनकी तस्वीर सम्हालकर रखी जा सके, और मिटा देने के बाद भी कम्प्यूटर सर्वरों पर उनको ढूंढा जा सके। ऐसी ही गालियों के साथ-साथ जो हिंसक बातें लिखी जा रही हैं, वे दूसरे धर्म के लोगों की थोक में हत्या करने की बातें हैं, और ऐसा लिखने वाले हजारों लोग हो गए हैं। 
सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत सोशल मीडिया पर विचार रखने वाले लोगों की तुरत-फुरत गिरफ्तारी पर तो रोक लगाई है, लेकिन जो लोग दूसरों के लिए गंदी गालियां लिखते हैं, हिंसा की धमकी देते हैं, साम्प्रदायिक नफरत फैलाते हैं, उनकी गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट की कोई रोक नहीं है, और राज्य सरकारों को इस पर तेजी से काम करना चाहिए। फिर कम्प्यूटर और संचार तकनीक मिलकर सोशल मीडिया को जिस तरह की आजादी उपलब्ध कराते हैं, उसके चलते राज्य की पुलिस के लिए यह आसान भी नहीं रहता कि वह इंटरनेट को लेकर आई हर शिकायत की जड़ तक पहुंच सके। इसलिए केन्द्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे निगरानी-ढांचे को विकसित करना चाहिए, जैसा कि विकसित देशों में बच्चों के सेक्स-शोषण करने वाले लोगों की निगरानी के लिए किया हुआ है। सरकारों के लिए यह मुश्किल बात नहीं रहती कि वे जिस तरह के शब्द या चित्र इंटरनेट पर ढूंढना चाहें, जिन जगहों से इन बातों को पोस्ट करने पर निगरानी रखना चाहें, वे रख सकती हैं। भारत में केन्द्र सरकार को यह चाहिए कि साम्प्रदायिक नफरत और हिंसा की बातें करने वालों पर कानूनी कार्रवाई के सुबूत जुटाए, और फिर राज्य सरकारों को मामले चलाने के लिए दे दे। 
आज भारत के लोग आजादी के नाम पर जितनी हिंसा और नफरत फैला रहे हैं, और उसके जवाब में दूसरे तबके भी इन्हीं औजारों का हथियारों की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, वह भयानक है। यह बात भी भयानक है कि ऐसे बहुत से ट्विटर खातों को प्रधानमंत्री के ट्विटर खाते की तरफ से, या नरेन्द्र मोदी के निजी ट्विटर खाते की तरफ से फॉलो भी किया जाता है। ऐसे में भारत सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है क्योंकि जब प्रधानमंत्री के साथ जुड़े हुए ट्विटर खातों की नजर में ऐसी हिंसक और साम्प्रदायिक बातें सार्वजनिक रूप से आ रही हैं, तो सरकार यह बहाना भी नहीं बना सकती कि उसके पास कोई शिकायत नहीं आई है। देश को तोडऩे वाली बातों को लेकर किसी शिकायत की कोई जरूरत नहीं है, सरकार खुद होकर भी कार्रवाई कर सकती है, और सोशल मीडिया ऐसी सार्वजनिक जगह है कि वहां हिंसा और जुर्म की बात करने वाले लोगों पर कार्रवाई सरकार की सीधी-सीधी जिम्मेदारी बनती है। 
आज न सिर्फ प्रधानमंत्री, बल्कि देश के सभी प्रमुख लोगों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उनके साथ जुड़े हुए लोग सोशल मीडिया पर कैसा बर्ताव करते हैं, और वैसे समर्थकों की वजह से इन प्रमुख लोगों की अपनी छवि कैसी बर्बाद हो रही है। एक बहुत पुरानी कहावत है कि जिसके ऐसे-ऐसे यार, उसको दुश्मन की क्या दरकार...। 
केन्द्र और राज्य सरकारों को इंटरनेट पर हो रहे जुर्म पर निगरानी रखने के लिए, और कार्रवाई करने के लिए अपनी संस्था, अपने संगठन विकसित करने चाहिए, वरना यह तनाव बढ़ते-बढ़ते देश को कब आग के लपेटे में ले लेगा, पता नहीं।
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