बेवफाई पर हैकिंग का हमला इंसान क्या इंसान भी न रहे?

संपादकीय
22 जुलाई 2015

इंटरनेट पर अभी एक मजेदार और खतरनाक मामला हुआ है। पश्चिमी दुनिया में खासी लोकप्रिय एक बेवफाई की वेबसाईट को नैतिकतावादी हैकरों ने हैक कर लिया, और करीब पौने चार करोड़ लोगों की डेटिंग की जानकारी, उनकी बातचीत, बेवफाई के उनके सुबूत, उनकी शिनाख्त सहित हासिल कर लिए हैं। अब उनकी मांग है कि या तो यह वयस्क-डेटिंग वेबसाईट बंद की जाए, या फिर वे इस तमाम जानकारी को सबसे अधिक दाम देने वाले को बेच देंगे। यह एडल्ट-डेटिंग-वेबसाईट शादीशुदा लोगों में बेवफाई के संबंधों के लिए लोकप्रिय थी, और इस पर एक बार दर्ज हो जाने के बाद यहां से अपनी जानकारी हटाने के लिए लोगों को हजार रूपये से कुछ अधिक देने पड़ते थे। अब इस हैकिंग की खबर मिलने के बाद अपनी जानकारी मिटाने के लिए लोगों की भीड़ ऑनलाईन दौड़ पड़ी है, लेकिन जानकारी चोरी हो चुकी है, और नैतिकतावादी अपनी नजर में अनैतिक इस वेबसाईट को बंद करवाने पर उतारू हैं। 
एशले मैडिसन नाम की इस वेबसाईट का नारा था- जिंदगी छोटी है, एक चक्कर चलाओ। यह लोगों को शादी के बाद या शादी के पहले दूसरों से संबंध बनाने के लिए तरह-तरह की सहूलियतें देती है, लेकिन आज इसे इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोग दहशत में पड़े हुए हैं। इंटरनेट पर जो लोग अपनी जानकारी को पूरी तरह गोपनीय मानकर वैध-अवैध समझे जाने वाले तन-मन के रिश्ते बनाकर चल रहे थे, वे सब आज खतरे में पड़ गए हैं। निजी जीवन में रिश्तों में ईमानदारी की वकालत करने वाले इन नैतिकतावादियों का कहना है कि लोगों को बुराई की तरफ धकेलने वाली ऐसी वेबसाईट को अगर बंद नहीं किया गया तो वे करोड़ों लोगों की निजी जानकारी सार्वजनिक कर देंगे। पश्चिम में आज इस बात को लेकर एक बड़ा तनाव खड़ा हो गया है कि ऐसा अगर होता है तो उससे दसियों लाख लोगों के पे्रम संबंध या शादी के रिश्ते किस तरह तबाह हो जाएंगे। 
इंसानी जिंदगी की हकीकत यह है कि बहुत से लोग अपनी भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए एक से अधिक लोगों से संबंध रखते हैं, और शादीशुदा जिंदगी की सरहदें इसमें अधिक बाधा नहीं बनतीं। लोग इंटरनेट पर मिलने वाली गोपनीयता के चलते दाएं-बाएं कई तरफ मुंह मार लेते हैं, फिर भी उनका मुंह साफ दिखते रहता है। बहुत से परिवारों की तो हकीकत यह है कि कोई एक साथी, या दोनों ही साथी, शादी के बाहर कुछ पलों के लिए अपनी-अपनी खुशी जुटाकर लौटते हैं, तो वे अपने साथी को बर्दाश्त कर पाते हैं, या उसे खुश रख पाते हैं। कई बार खुश रखने की जिम्मेदारी बाहर की अपनी करतूत से उपजे अपराध-बोध की वजह से आती है। लेकिन समाज में नैतिकता के जो पैमाने हैं, वे ऐसे रिश्तों के खिलाफ रहते हैं, और अमरीका की संसद ऐसे रिश्तों पर लंबी बहस और महाभियोग भी देख चुकी है। 
दरअसल इंसानी मिजाज बहुत अधिक वफादारी का रहता नहीं है। शादी नाम की एक सामाजिक संस्था का ढांचा अपनी फौलादी गिरफ्त में शादी के दोनों भागीदारों को कड़े शिकंजे में रखता जरूर है, लेकिन वह गिरफ्त इंसान के बुनियादी मिजाज के खिलाफ ही रहती है। लोग इस ताक में रहते हैं कि कब इस गिरफ्त से परे, चाहे कुछ देर के लिए ही सही निकला जा सके। लेकिन जो पश्चिम दूर बैठे पूरब के लोगों को बड़ा अनैतिक और बेवफा लगता है, वहां पर भी नैतिकता के कई किस्म के अभियान चलते हैं। अमरीका में ही ऐसे बड़े-बड़े सामाजिक जमावड़े होते हैं जिनमें किशोरियां अपनी शादी तक अपने कौमार्य को बचाकर रखने का वायदा सामूहिक और सार्वजनिक रूप से अपने माता-पिता से करती हैं। पश्चिम में बेवफाई शादी के टूट जाने की काफी वजह मान ली जाती है, और ऐसे में ऑनलाईन डेटिंग से लोगों को चोरी-छिपे खुशी हासिल करने का एक जरिया मिल जाता है। 
अब नैतिकतावादियों की यह हैकिंग एक अलग किस्म का खतरा पेश करती है। कल के दिन शाकाहारी लोग ऐसी हैकिंग कर सकते हैं जिससे वे सार्वजनिक रूप से शाकाहारी बने हुए, लेकिन मांसाहार खरीदने वाले लोगों के भुगतान की जानकारी का भांडाफोड़ कर दें, मालिश से लेकर वेश्या तक को के्रडिट कार्ड से भुगतान करने की जानकारी उजागर कर दें, और धीरे-धीरे किसी राजनीतिक विचारधारा को रखने वाले लोगों की जानकारी हैक कर ली जाए, और फिर उनसे बदला निकाला जाए। जब कानून से परे किसी जुर्म के रास्ते से कोई भांडाफोड़ होता है, तो उससे निजी जिंदगी का भरोसा भी खत्म हो जाता है। और आज हैकिंग से यह आसान हो गया है कि लोगों की निजी जिंदगी का एक-एक अक्षर, एक-एक पल, एक-एक तस्वीर, और एक-एक सांस की जानकारी लूट ली जाए, बेच दी जाए, दीवारों पर चिपका दी जाए। 
इस पूरे सिलसिले से एक ही नसीहत निकलती है कि आज के डिजिटल युग में कुछ भी सुरक्षित नहीं है, सिवाय अच्छी सोच के, अच्छी बातों के, अच्छे कामों के, और अच्छे संपर्कों के। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतना अच्छा होना इंसान के मिजाज के तो ठीक खिलाफ है, और इंसान जीते जी एक अच्छे किस्म का भगवान भला कैसे हो जाए?

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