अखबार न चला पाने वाली कांग्रेस टीवी चैनल शुरू तो कर सकती है, देखेंगे कौन?

संपादकीय
12 अगस्त 2015

केरल कांग्रेस ने कुछ समय पहले जयहिन्द टीवी नाम से एक चैनल शुरू किया है, और अब कांग्रेस पार्टी उस चैनल को एक राष्ट्रीय चैनल बनाने का विचार कर रही है। यह कांग्रेस पार्टी का अपना चैनल होगा, और इससे पार्टी की विचारधारा लोगों के सामने रखने में मदद मिलेगी। आज भी कई प्रदेशों में पार्टियों के अपने घोषित या अघोषित टीवी चैनल हैं भी, और यह एक अच्छी बात है कि अपने अखबार, अपनी पत्रिकाओं के साथ-साथ पार्टियां अपने टीवी या रेडियो चैनल भी चलाएं। आज का वक्त मीडिया और सोशल मीडिया पर अपने को बेचने का इस तरह का हो चुका है कि देश के सबसे नामी-गिरामी पत्रकार, कलाकार, नेता, सभी ट्विटर और फेसबुक पर अपने आपको बढ़ावा देते चलते हैं, और अमिताभ बच्चन से लेकर लालकृष्ण अडवानी तक, नरेन्द्र मोदी से लेकर लता मंगेशकर तक, अपने ब्लॉग या दूसरे एकाऊंट पर अपने मन की बातों को पोस्ट करते जाते हैं। एक समय था जब मीडिया के लोग मशहूर लोगों से बात करके खबर बनाते थे, अब मीडिया ऐसे लोगों के इंटरनेट-खातों पर नजर रखकर वहां से खबर ले लेता है। 
लेकिन हम बात को कांग्रेस के इस चैनल तक रखना चाहते हैं। इसके पहले की भी बात याद करें, तो नेहरू के वक्त कांग्रेस पार्टी ने नेशनल हैराल्ड नाम का एक अखबार शुरू किया था, और नेहरू ने वंशवाद का अपना किया हुआ पहला मनोनयन इसी अखबार की कंपनी में किया था। उन्होंने अपने दामाद फिरोज गांधी को इस अखबार की प्रकाशन कंपनी का चेयरमेन बनाया था, और इसके साथ-साथ आजाद भारत की पहली और सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल के चेयरमेन पद पर भी उन्होंने फिरोज गांधी को मनोनीत किया था। नेशनल हैराल्ड ठीक से निकल सके इसलिए नेहरू के वक्त से ही देश भर में इस अखबार के लिए बड़ी-बड़ी जमीनें सरकार ने दी थीं, और आज अंदाज यह है कि इसके पास हजारों करोड़ की जमीन-जायदाद है। इस कंपनी के शेयरों को लेकर सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के कुछ नेताओं के खिलाफ अदालत में मामला भी चल रहा है। 
जो पार्टी अपने अखबार को ऐसे बुरे हाल में रखने का लंबा इतिहास रखती है कि वहां के कर्मचारियों को तनख्वाह तक नहीं मिली, और अखबार बंद होते चले गए। ऐसी पार्टी ने यह परवाह भी नहीं की, कि अपने उपाध्यक्ष का कोई सोशल मीडिया खाता खोले। अब अचानक वह सीधे एक टीवी चैनल के बारे में सोच रही है, जो कि हो सकता है कि आज की चुनावी राजनीति की एक जरूरत हो, लेकिन कांग्रेस पार्टी ऐसे चैनल पर क्या कहेगी? जहां तक हमारी समझ है, किसी राजनीतिक दल का ऐसा चैनल चुनाव के पूरे दौर में आचार संहिता की वजह से प्रसारित नहीं हो पाएगा। ऐसे में उसका राजनीतिक उपयोग चुनाव से परे ही हो पाएगा, और वह भी तब हो पाएगा जब उस चैनल पर जनता को बांधने के लायक कुछ होगा। देश की सबसे बड़ी पार्टी अगर चाहती तो अपने खुद के अखबार के करोड़ों ग्राहक बनाकर अपनी पार्टी के लोगों तक अपनी विचारधारा पहुंचाती। लेकिन कांग्रेस यह काम नहीं कर पाई, न एक अखबार ठीक से जारी रख पाई, न उस पर खर्च करने की कांग्रेस की नीयत रही, और न ही अपनी पार्टी के लोगों को वह इस अखबार से जोड़ पाई। ऐसे में उसके टीवी चैनल को कौन देखेगा? 
कांग्रेस पार्टी हो, या कोई और पार्टी, अगर उसकी कही बातों में लोगों को बांधने की ताकत है, तो देश के अनगिनत समाचार चैनल ही घंटों तक मोदी को मुफ्त में दिखाते हैं, वे सोनिया या राहुल को भी दिखा सकते थे, लेकिन कांग्रेस के नेताओं के पास बोलने को कम है, मुद्दे कम हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी एक मजबूत विपक्ष के रूप में लगातार लड़ रही है, तो मीडिया उसकी खबरों को खासी जगह देता भी है। लेकिन बाकी देश में कांग्रेस का हाल बदहाल है। इसलिए टीवी चैनल हो या अखबार, किसी राजनीतिक दल के हाथ में यह औजार तभी काम का हो सकता है, जब उसे इस्तेमाल करने का हुनर पार्टी के पास हो। एक टीवी चैनल सिर्फ टेक्नालॉजी और खर्च, इन दो चीजों से चल सकता है, लेकिन जब तक जनता से जोडऩे के मुद्दे नहीं रहेंगे, तब तक उसे देखेंगे कौन? 

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