अगली पीढ़ी को अपनी जिंदगी जीने न देने से ऐसे नुकसान

संपादकीय
27 अगस्त 2015

वैसे तो हिन्दुस्तान में रोज ही कहीं न कहीं से प्रेम संबंधों को लेकर परिवार के हाथों जान खोने वालों की खबरें आती हैं, लेकिन अभी मुम्बई से जो ताजा खबर आई है, उसमें बड़े-बड़े चर्चित नाम हैं, और पारिवारिक संबंधों की जैसी जटिलता इस मामले में दिख रही है, वैसी कत्ल के किसी मामले में कम ही दिखती होगी। मीडिया से जुड़े एक नामी-गिरामी आदमी, पीटर मुखर्जी की दूसरी या तीसरी पत्नी के वे तीसरे या चौथे पति थे। इस पत्नी की पहले की किसी शादी से एक बेटी थी, जिसे उसने अपने मौजूदा पति से भी छुपाकर, उसे अपनी बहन बताकर रखा था, ताकि मां की अपनी उम्र अधिक न लगे कि वह एक जवान बेटी की मां है। अब इस मौजूदा पति का एक बेटा जो कि उसकी पहले की किसी बीवी से था, उसका अपनी सौतेली मां की इस पिछली बेटी से प्रेम हो गया। और इसी प्रेम का विरोध करते हुए इस मां ने अपनी ही बेटी का कत्ल करवा दिया, ऐसा पुलिस का दावा है, और उसने इसे गिरफ्तार भी किया है। अब इस मां के साथ-साथ, उसका एक कोई पिछला पति भी इस कत्ल में मददगार होने के नाते गिरफ्तार किया गया है। 
समाज के सबसे संपन्न और सबसे आधुनिक तबके, इस तरह की पारिवारिक व्यवस्था वाले लोग भी अपने बच्चों के प्रेम संबंध देख नहीं पाते, और उनका कत्ल करवा दिया। अब सवाल यह है कि दो अलग-अलग माता-पिता के, दो अलग-अलग लोगों से पैदा हुए बच्चों का आपस में तो कोई रिश्ता था नहीं, और अपने पिता, और अपनी मां की दूसरी-तीसरी शादी के चलते वे किसी तरह से सौतेले भाई-बहन करार दिए जा सकते थे। लेकिन ऐसे रिश्ते का कोई मतलब नहीं था, क्योंकि ये बच्चे न साथ में बड़े हुए, न इनका खून का कोई रिश्ता था। और ऐसे में उनकी आपस में शादी कोई वर्जित संबंध भी नहीं थी, न तो जेनेटिक्स के हिसाब से, और न ही इस किस्म की पारिवारिक व्यवस्था के हिसाब से। और फिर दो बालिग लोगों का साथ रहना उनकी अपनी मर्जी है, और यह भी देखने लायक बात है कि यह कत्ल उस मां का किया या करवाया हुआ बतलाया जा रहा है जो अपनी बेटी को बेटी न कहकर बहन बताकर चल रही थी। 
हिन्दुस्तान में मां-बाप बच्चों पर अपनी मर्जी थोपने को अपना हक मानते हैं। ऐसे में बहुत से बच्चे खुदकुशी कर लेते हैं, और बहुत से बच्चे घुट-घुटकर जीते हैं, मर जाते हैं। दूसरी तरफ अपनी मर्जी थोपने वालों में जो अधिक हिंसक होते हैं, वे इस तरह के कत्ल करवाते हैं। हिन्दुस्तान के बाहर भी ब्रिटेन जैसे देश में बसे हुए हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी मां-बाप इस किस्म की ऑनर-किलिंग कहे जाने वाले जुर्म में सजा पा चुके हैं। भारतीय समाज को इस किस्म की हिंसा से उबरना होगा। हम इन सौतेले भाई-बहनों की आपसी शादी की बात नहीं कर रहे, इस संबंध में और भी बहुत से लोगों को आपत्ति हो सकती है, लेकिन किसी भी किस्म के प्रेम संबंधों को लेकर अगर आधुनिक विचारधारा वाले, और बहुत ही दुस्साहसी किस्म की अपनी निजी जिंदगी वाले मां-बाप भी अगर औलाद का कत्ल करवा रहे हैं, तो यह ही भयानक हालत है। समाज को यह समझना होगा कि अपने जवान बच्चों पर अपनी मर्जी को इस हद तक थोपना न तो जायज है, और न ही मौजूदा कानूनों के चलते हुए यह मुमकिन ही है। इस किस्म के दो अलग-अलग मां-बाप के बच्चों के बीच शादी के खिलाफ कोई कानून भी नहीं है। 
देश में समाज व्यवस्था को अपनी फौलादी जकड़ को खत्म करना होगा, क्योंकि फौलाद अब फैशन में नहीं रह गया। टेक्नालॉजी में भी फौलाद के कई किस्म के विकल्प इस्तेमाल होने लगे हैं, और रूस जैसा देश जिसे सोवियत संघ रहते हुए एक वक्त फौलादी पर्दे वाला देश कहा जाता था, वह भी उस फौलाद को छोड़ चुका है। इसलिए लोगों को अपने आपको लचीला बनाना चाहिए, और अगली पीढ़ी को अपने हिसाब से जीने का हक देना चाहिए। मां-बाप को बच्चों की जिंदगी में दखल सलाह-मशविरे तक सीमित रखना चाहिए, और किसी भी हालत में आत्मघाती या किसी और किस्म की हिंसक नौबत नहीं आने देनी चाहिए। 

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