पाकिस्तान में घुसकर दाऊद को मारना भारत की जिम्मेदारी

24 अगस्त 2015
संपादकीय

भूतपूर्व केन्द्रीय गृहसचिव और आज के भाजपा सांसद आर.के. सिंह ने एक टीवी चैनल पर बातचीत में यह कहा है कि एनडीए की पिछली सरकार के रहते हुए, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री-कार्यकाल में भारत में ऐसी तैयारी हो गई थी कि दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान से भारत लाया जाए। उन्होंने इस तैयारी के सिलसिले में दी गई फौजी ट्रेनिंग की जानकारी देते हुए कहा कि जिस तरह अमरीका ने पाकिस्तान में जाकर ओसामा-बिन-लादेन को मारा था, उसी तरह भारत, पाकिस्तान से दाऊद को उठाकर लाने की तैयारी कर चुका था, लेकिन इस मुहिम से जुड़े मुम्बई पुलिस के कुछ लोग दगाबाज निकले जो कि दाऊद से जुड़े हुए थे, और उन्होंने यह जानकारी वहां तक पहुंचा दी, इसलिए यह अभियान छोड़ देना पड़ा। आर.के. सिंह ने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन के लिए दाऊद के जानी दुश्मन छोटा राजन गैंग के कुछ लोगों को महाराष्ट्र में ही फौजी ट्रेनिंग दी गई थी। 
देश में सत्तारूढ़ भाजपा के एक सांसद, जो कि केन्द्रीय गृहसचिव रह चुके हैं, उनका यह भांडाफोड़ बड़ा खतरनाक है। और उन्होंने चूंकि एक टीवी चैनल पर कैमरे के सामने ये बातें कही हैं, इसलिए इन बातों के उनके कहन को लेकर कोई शक नहीं रह जाता। लेकिन भारत के किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने पहली बार ये बातें कही हैं। अब यह एक अलग बात है कि सरकार से जुड़े किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति को ऐसा राज उजागर करना चाहिए, या नहीं? हमारे नियमित पाठकों को याद होगा कि बरसों पहले हमने इसी तरह की एक बात लिखी थी, जिसमें हमने यह माना था कि किसी देश के हित कई बार नैतिकता के कड़े पैमानों से परे भी रहते हैं, और मूल्यों की ईमानदारी निभाना किसी देश के लिए हमेशा मुमकिन नहीं भी हो सकता है। यह बात हमने दाऊद पर हाथ डालने के सिलसिले में ही लिखे संपादकीय में इसी जगह लिखी थी। और शायद ओसामा-बिन-लादेन को मारने के लिए अमरीका के पाकिस्तान में घुसकर फौजी कार्रवाई करने के संदर्भ में ही लिखी थी। 
यह बात सही है कि दो देशों के अपने-अपने दायरे हैं, लेकिन जब कोई देश किसी दूसरे देश के मामलों में इतनी बड़ी दखल दे, कि वहां के सबसे बड़े मुजरिम को अपने यहां सरकारी हिफाजत में डेरा डालने दें, उसका बचाव करे, तो ऐसे में जुर्म के शिकार देश को यह हक रहता है कि वह देशों के संबंधों से परे जाकर अपना हिसाब सीधे-सीधे चुकता करे। यह दुनिया के इतिहास में कोई नया या अनोखा काम नहीं होगा, अधिकतर देश अपना बस चलने पर ऐसा करते हैं, और हमारा मानना है कि अगर दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान में रखा गया है, तो भारत को एक फौजी कार्रवाई करने का, या किसी भाड़े के हत्यारे को लेकर दाऊद इब्राहिम को खत्म करने का एक राष्ट्रीय-हक भी बनता है, और ऐसा करना उसकी राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी बनती है। अब ऐसा करना कूटनीति के खिलाफ हो सकता है, नैतिकता के खिलाफ हो सकता है, लेकिन अपने देश के हजारों लोगों की जिंदगी की कीमत पर नैतिकता निभाना हर समय शायद मुमकिन भी नहीं हो सकता, और शायद ऐसी नैतिकता जायज भी नहीं हो सकती। 
ऐसी कार्रवाई भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में बड़ी खटास ला सकती है। लेकिन आज ही कौन सी मोहब्बत का वक्त चल रहा है? लोगों को याद होगा कि बाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए पाकिस्तान ने भारत के कारगिल पर जो हमला किया था, और जो बाद में जंग में तब्दील हो गया था, उसके बारे में उस वक्त वहां के फौजी शासक जनरल परवेज मुशर्रफ ने अनगिनत टीवी कैमरों के सामने सौ-सौ बार बड़ी फख्र के साथ यह खुलासा किया है कि किस तरह उन्होंने एक लापरवाह और सोए हुए हिन्दुस्तान की सरहद में दूर तक फौजी घुसपैठ की थी, और वह कितनी कामयाब फौजी कार्रवाई थी। इसलिए किसी देश की सीमा में घुसकर फौजी कार्रवाई करना कोई बड़ी बात नहीं है, और कई देश ऐसा करते हैं। अब यह भारत पर है कि वह बरसों से अपने किए जा रहे इस दावे को सही साबित करके दिखाए कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान सरकार की हिफाजत में, पाकिस्तान में बसा हुआ है। ऐसे दाऊद को जाकर मारना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। 

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