मध्यप्रदेश के विस्फोट हादसे से सबक लेने की जरूरत

संपादकीय
13 सितंबर 2015

मध्यप्रदेश के झाबुआ में कल हुए विस्फोट में मरने वाले शायद सौ तक पहुंचने को होंगे, और विस्फोट ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। वहां न कोई कारखाना था, और न कोई वजह थी कि इतनी मौतें होतीं, लेकिन फिर भी एक धमाका हुआ, और आसपास के लोगों के टुकड़े-टुकड़े हो गए। अब सरकार इस बात पर जांच-पड़ताल कर रही है कि विस्फोटक वाली दुकान में इतना विस्फोटक रखने का लाइसेंस था या नहीं? एक अलग चर्चा यह भी है कि यह दुकान भाजपा के किसी नेता की थी, जो कि अब फरार है। यह बात सच हो या न हो, इतना तो सच है ही कि सरकारी अमले ने अपना काम जिम्मेदारी से किया होता, और विस्फोटक जैसे स्टॉक की जांच-पड़ताल समय रहते हुए रहती, तो इतने बेकसूर नहीं मारे गए होते। लेकिन इस विस्फोट से परे, और मध्यप्रदेश से बाहर भी छत्तीसगढ़ जैसे अधिकतर राज्यों में गली-मोहल्ले तक, और बाजार से लेकर स्कूल-अस्पताल के अगल-बगल तक कहीं विस्फोटक के अवैध गोदाम रहते हैं, तो कहीं जलने वाले रबर और रसायनों के गोदाम। ऐसे खतरों को स्थानीय प्रशासन अनदेखा करते चलता है, तब तक, जब तक कि कोई हादसा न हो जाए। और जब ऐसी कोई बड़ी आग लगती है, तो आग बुझाने की क्षमता भी अब स्थानीय संस्थाओं के दमकल विभाग में नहीं रह गई है, और छत्तीसगढ़ की राजधानी में तो यह सुनाई पड़ता है कि कभी दमकल ड्राइवर नहीं है, तो कभी दमकल में डीजल नहीं है। 
किसी भी हादसे से बाकी तमाम लोगों को सबक लेना चाहिए। छत्तीसगढ़ और बाकी प्रदेशों के हर शहर को यह देखना चाहिए कि उनके इलाकों में विस्फोटकों के गोदामों और उनकी दुकानों का क्या हाल है? गैस सिलेंडरों के गोदाम और उनके कारखानों का क्या हाल है? जलने वाले सामानों के गोदाम कहां-कहां पर हैं, और वहां आग बुझाने का क्या इंतजाम है? ऐसा भी नहीं है कि स्थानीय पार्षद को, या स्थानीय थाने को इसकी खबर नहीं होती। और ऐसा भी नहीं है कि ऐसे सामानों की बिक्री करने वाले दुकानदारों के नाम सरकार के दूसरे विभागों के पास नहीं हैं। रबर के सामान, पेट्रोलियम सामान, गैस सिलेंडर जैसे सामानों के कारोबारियों से उनके गोदामों को लेकर हलफनामा लिया जाना चाहिए कि उन्होंने कहां-कहां इसका स्टॉक रखा है। ऐसा अगर जिम्मेदारी के साथ किया जाएगा, तो आग लगने पर या कोई विस्फोट होने पर ऐसी जगहें सरकार की नजर में रहेंगी, और नियम-कानून के तहत अगर उनको घनी बस्तियों से दूर रखना जरूरी होगा, तो सरकार किसी हादसे के पहले ही इनको हटा सकेगी। 
भारत में अधिकतर हादसे लोगों की लापरवाही से नहीं होते, बल्कि नियम तोड़कर गलत काम करने से होते हैं। और ऐसे तकरीबन हर हादसे के पीछे सरकार के किसी जिम्मेदार विभाग की लापरवाही और अनदेखी होती है। छत्तीसगढ़ सरकार को चाहिए कि मध्यप्रदेश में मौतों की इस बड़ी गिनती को देखते हुए तुरंत इससे सबक ले, और किसी भी तरह के हादसे को टालने के लिए जो-जो सावधानी मुमकिन हो सकती है, उसका इंतजाम करे। 

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