डिजिटल खतरे

1 सितंबर 2015
संपादकीय
छत्तीसगढ़ में छात्रसंघ चुनाव के बाद मोबाइल फोन के वाट्सऐप पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर राजनांदगांव जिले के आधा दर्जन से अधिक छात्रों को जेल भेजा गया है, और उन्हीं में शामिल एक कमउम्र छात्र को सुधारगृह भेजा गया है। दो-चार दिन ही हुए हैं कि एक दूसरे जिले में ऐसे ही एक वाट्सऐप गु्रप पर गांधी के बारे में किसी भद्दे वीडियो को लेकर गिरफ्तारी हुई है, और कार्रवाई करने वाला पुलिस अफसर एक दूसरे पे्रस-पुलिस गु्रप में अश्लील फोटो पोस्ट करते हुए पकड़ाया है। यह सिलसिला कम होते दिख नहीं रहा है, क्योंकि लोगों को दीवारों पर, और शौचालयों के दरवाजों के पीछे हिंसक, अश्लील भड़ास निकालने की आदत पड़ी हुई है, और उनको यह अंदाज नहीं है कि डिजिटल टेक्नालॉजी और भारत का आईटी कानून मिलकर ऐसी हरकतों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। यह टेक्नालॉजी इंटरनेट या फोन पर पोस्ट की गई हर तस्वीर, लिखे गए एक-एक शब्द के पीछे के लोगों के सुबूत हमेशा के लिए संभालकर रख लेती है। दूसरी तरफ देश का सूचना-तकनीक कानून किसी भी दूसरे कानून के मुकाबले अधिक कड़क है, और जगह-जगह लोग इस कानून के तहत रिपोर्ट भी दर्ज कर रहे हैं, और सुबूत जुट जाने पर कार्रवाई भी हो रही है।
निजी संबंधों से लेकर सार्वजनिक समूहों तक, और इंटरनेट पर सोशल मीडिया की खुली जगहों तक लोग बहुत लापरवाही से, बहुत गैरजिम्मेदारी से लिखते हैं, और अपनी नफरत को उजागर करते हैं। हम इस बारे में पहले भी कई बार लोगों को खतरों से आगाह कर चुके हैं कि  ऐसी लापरवाही उनको जेल तक पहुंचा सकती है। फिर एक दूसरा खतरा यह भी है कि दो दिन पहले जैसे अमिताभ बच्चन के ट्विटर खाते को किसी ने हैक कर लिया, और उस पर अश्लील चीजें पोस्ट करना शुरू कर दिया। डिजिटल टेक्नालॉजी इस तरह की तमाम बदमाशी के लिए लोगों को आसान सहूलियत दे देती है। 
आज जरूरत इस बात की है कि सरकार और परिवार, दोनों अपने-अपने स्तर पर सभी लोगों को ऐसे डिजिटल खतरे से आगाह करें, क्योंकि महीनों की जेल के बाद लोग अगर सबक लेंगे, तो वह बड़ा महंगा सबक होगा। 

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