नेपाल से तनाव भारत को बड़ा महंगा पड़ सकता है

संपादकीय
09 अक्टूबर 2015

नेपाल के साथ भारत का एक नया तनाव बड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। भारत से नेपाल सड़क के रास्ते उसकी जरूरत का लगभग पूरा सामान जाता है, क्योंकि नेपाल की कोई समुद्री सीमा नहीं है। और अभी वहां भारत की तरफ से चल रही एक अघोषित सड़क नाकाबंदी के चलते नेपाल में पेट्रोलियम की कमी हो गई है, और वहां की जनता भारत के खिलाफ सड़कों पर नाराजगी के नारे लगाते प्रदर्शन कर रही है। भारत में नेपाल के राजदूत का यह कहना है कि अगर भारत इसी तरह नेपाल की नाकेबंदी करेगा तो नेपाल को मजबूर होकर किसी और तरफ देखना होगा। किसी और तरफ से मतलब साफ है कि नेपाल चीन पर निर्भर होगा, और हो सकता है कि चीन ऐसी ही किसी नौबत की राह तक रहा हो। आज भी चीन के साथ भारत का टकराव अरुणाचल प्रदेश में चल ही रहा है, और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीन की भारी हलचल भारत के लिए एक फौजी फिक्र का सामान है ही। ऐसे में नेपाल के साथ रिश्ते बिगाडऩे के पहले भारत को दुबारा सोचना चाहिए। अभी यह बात साफ तो नहीं है कि भारत नेपाल के नए बने संविधान में किस-किस तरह के फेरबदल की उम्मीद कर रहा था, और किस नाउम्मीदी के चलते उसने ये संबंध तनावपूर्ण होने दिए हैं, लेकिन यह सिलसिला समझदारी का नहीं लग रहा है। 
भारत के करीब का श्रीलंका वैसे भी अपनी जमीन पर आतंक को काबू करने के लिए चीन की मदद ले ही चुका है, और म्यांमार के साथ भारत के संबंध अपने आप में भी अच्छे नहीं है, और म्यांमार में लोकतंत्र भी नहीं है, ऐसे में किसी पड़ोसी लोकतंत्र को उस पर अधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए। पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते पिछले कई बरसों में आज सबसे अधिक तनावपूर्ण लग रहे हैं, और उससे भारत की बातचीत भी बंद है। यह नौबत किसी भी देश के लिए ठीक इसलिए नहीं है कि दुनिया में आज कोई देश टापू की तरह नहीं जी सकता, और लोगों को अगल-बगल को देखते हुए अपनी फौजी तैयारी भी करनी पड़ती है, और देशों की आर्थिक नीतियां भी पड़ोसियों की जरूरतों और संभावनाओं के मुताबिक बदलती हैं। 
भारत आज वैसे भी मध्य-पूर्व के देशों को लेकर, तेल के कुओं वाले देशों को लेकर, फिलीस्तीन और इजराइल को लेकर, ईरान की बदलती हुई अंतरराष्ट्रीय स्थिति को लेकर एक किस्म की अस्थिरता की स्थिति से गुजर रहा है। पश्चिमी देशों की खाड़ी में दखल के चलते हुए वहां पर बहुत किस्म की नई घटनाएं हुई हैं, और भारत को उनके मुताबिक अपनी नीतियों को बदलना भी पड़ रहा है। ऐसे में पड़ोस के नेपाल को लेकर भारत का किसी भी तरह का गैरजरूरी तनाव बड़ा ही नाजायज है। अपनी किसी भी दूसरे पड़ोसी देश के मुकाबले भारत के संबंध नेपाल से सबसे अधिक जुड़े हुए हैं, और सरहद पर भी दोनों देशों में एक-दूसरे के लिए सबसे अधिक उदारता परंपरागत रूप से चली आ रही है। दोनों देशों के लोग एक-दूसरे की जमीन पर काम करते हैं, कारोबार करते हैं, और पीढिय़ों से बसे हुए हैं। ऐसे में अगर नेपाल में आज यह महसूस किया जा रहा है कि भारत उसकी आर्थिक नाकेबंदी कर रहा है, तो इस बारे मेें भारत के मुखिया को सार्वजनिक रूप से बयान देना चाहिए। ऐसी जो भी बातें तनाव खड़ा कर रही हैं, उनको खत्म करना चाहिए, और एक बड़े देश के नाते भारत को पड़ोस के छोटे देश की जरूरतों का अधिक ख्याल रखना चाहिए। आज अगर नेपाल में चीन की दखल बढ़ती है, तो उससे भारत के लिए एक नया फौजी खतरा खड़ा हो जाएगा, और यह आज की भारत की लीडरशिप के लिए एक नासमझी की बात होगी। 

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