महाराष्ट्र के डांस बार पर से रोक खत्म, एक सही फैसला

संपादकीय
15 अक्टूबर 2015

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आठ बरस से मुंबई के डांस बार पर राज्य सरकार द्वारा लगाई गई रोक को खत्म कर दिया है। कांग्रेस-एनसीपी की महाराष्ट्र सरकार ने जब यह रोक लगाई थी तब भी हमने इस फैसले का विरोध किया था और इसे एक दकियानूसी कदम बताया था। हमारे नियमित पाठकों को याद होगा कि इन बरसों में हमने दर्जनभर से अधिक बार इसका जिक्र करते हुए कांग्रेस पार्टी की आलोचना की थी, और कहा था कि बार में काम करने वाली दसियों हजार लड़कियां इसके बाद कुछ और अधिक बुरा पेशा करने के खतरे में पड़ गई थीं, और वयस्क मनोरंजन के लिए ऐसी जगहों पर जाने वाले लोग कुछ और खतरनाक बालिग तफरीह की तरफ मुड़ गए। 
शुद्धतावादियों की सोच जिस तरह के सामाजिक सुधार का दावा करती है वैसा सुधार होने के बजाय समाज का नुकसान अधिक होता है। महाराष्ट्र देश का सबसे विकसित और आधुनिक राज्य माना जाता है लेकिन उस राज्य में शिवसेना जैसी सोच के चलते कई राजनीतिक ताकतों के मन में शुद्धतावादी होने की बात उड़ान भरने लगती है। लेकिन यह सिलसिला खतरनाक है और निजी पसंद-नापसंद की आजादी के खिलाफ है ही। मुंबई से लेकर असम तक और राष्ट्रीय महिला आयोग से लेकर इस पार्टी की सरकारों के अफसरों तक, महिलाओं की इज्जत के मामले में इस पार्टी की समझ का दीवाला निकला हुआ है। यह पार्टी एक पुरूषप्रधान हिंसक सोच वाली कट्टर संस्कृति को उसी तरह बढ़ावा दे रही है जिस तरह शिवसेना या श्रीराम सेना देती हैं, जिस तरह से मुस्लिम पंचायतें या खाप पंचायतें फतवे जारी करती हैं। लेकिन अभी सुप्रीम कोर्ट ने जो रोक हटाई है, वह रोक तो महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी की सरकार ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर लगाई, और अदालती हार के बाद भी विधानसभा में नया कानून बनाकर उसे फिर जारी रखा था। आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला महाराष्ट्र की पिछली सरकार के उस अडिय़ल रवैये के खिलाफ है। 
मुंबई के डांस बार शराबखाने थे और वहां पर सिर्फ वयस्क ग्राहक ही पहुंचते थे। बिना डांस के भी वहां बार चल रहे हैं, जहां सिर्फ बालिग लोगों को ही दाखिला है। इसलिए अगर शराब पीने के साथ-साथ लोग मनोरंजन के लिए नाच देख लेते थे तो उसमें ऐसी कोई सामाजिक बुराई नहीं थी जो कि वेश्यावृत्ति या और कई किस्म के देह संबंधों से अधिक खराब रही हो, या अधिक खतरनाक रही हो। इस देश की संस्कृति में दरबारी नृत्यांगनाओं से लेकर कोठों की तवायफों तक, और सामाजिक जलसों में स्थानीय लोक नर्तकियों तक की लंबी परंपरा रही है। और डांस बार बंद हो जाने के बावजूद देश में जगह-जगह सबसे महंगी होटलों में कैबरे जैसे डांस चलते ही हैं। इसलिए डांस बार पर प्रतिबंध ने ऐसी कोई चीज देश में नहीं रोक दी थी जो कि इस देश के रईसों को हासिल न हो। आज भी देशभर में निजी पार्टियों में हर तरह के डांस के लिए देश-विदेश की नर्तकियां कतार लगाकर काम ढूंढती हैं। 
हिन्दुस्तान को जिस पाखंड से आजाद होना चाहिए, और जिसके लिए कट्टर धर्मान्ध और दकियानूसी लोग अड़े रहते हैं, उनकी पसंद का काम कांग्रेस की अगुवाई वाली महाराष्ट्र की सरकार ने किया था, यह शर्मनाक था। इससे देश में उस हिंसक संस्कृति को बढ़ावा मिलता है जो कि वेलेंटाइन डे पर या नए साल की दावत पर हमले करती है। आज भी सुप्रीम कोर्ट की इस फैसले के बाद आशंका है कि महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार इसके खिलाफ फिर कोई तरकीब सोच सकती है। अब महाराष्ट्र की यह जिद खत्म होनी चाहिए, और बिना खतरों वाला यह वयस्क मनोरंजक लोगों को मिलने देना चाहिए। डांस बार में अगर कोई अधिक नुकसानदेह चीज है तो वह शराब है न कि डांस। शराब जारी रहे और डांस रोक दिया जाए, यह बहुत ही बेवकूफी की बात थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस रोक को खत्म करके एक सही फैसला दिया है। 
वयस्क मनोरंजन पर रोक का यह सिलसिला इसलिए खतरनाक है क्योंकि भारत में समाज और सरकार इस हकीकत को मानने से ही इंकार कर देते हैं कि इस देश में वेश्यावृत्ति मौजूद है। जब कभी वयस्क मनोरंजन को खत्म किया जाएगा, ऐसी जरूरत वाले वयस्क लोग किसी अधिक गंभीर बुराई की तरफ मुड़ेंगे। जब चकलाघरों पर पुलिस के छापे बढ़ जाते हैं या बाजार में शरीर का मिलना मुश्किल होने लगता है तो बलात्कार या छेडख़ानी, या देहशोषण के मामले बढऩे लगते हैं। हमने बार-बार यह लिखा है कि सरकारों को समझदारी के जो फैसले करने चाहिए, उसका बोझ सरकारों ने अदालतों पर छोड़ रखा है। जजों से कड़वे फैसले करवाए जाते हैं, और नेता मतदाताओं के सामने चापलूस बने खड़े रहते हैं। इस देश में समलैंगिकता, पोर्नोग्राफी, शराब, जुआ, वयस्क मनोरंजन, ऐसे बहुत से मुद्दों पर सरकारें अपने को संस्कृति का ठेकेदार बनाए रखती हैं, और जजों को सामाजिक मुद्दों पर फैसले देने पड़ते हैं। महाराष्ट्र सरकार के मुंह पर यह अदालती तमाचा पडऩे के बाद के इन बरसों में लाखों पेट क्या-क्या करके जिए होंगे, यह सोचना भी मुश्किल है। 

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