दुनिया में लोग भारतवंशियों के साथ रहने से कतराएंगे

संपादकीय
1 नवंबर 2015

न्यूजीलैंड की एक खबर है कि वहां एक फ्लैट में साथ रहने के लिए कोई दूसरा किराएदार छांटते हुए एक आदमी ने विज्ञापन में लिखा कि उसे हिन्दुस्तानी या एशियाई लोग नहीं चाहिए। इस बात पर वहां बसे हिन्दुस्तानियों ने विरोध करना शुरू किया, तो उस आदमी ने यह साफ किया कि वह नस्लभेदी नहीं है, लेकिन हिन्दुस्तानी या एशियाई लोग अच्छी अंग्रेजी नहीं बोलते, और वे रोज करी पकाते हैं, जो कि उसे पसंद नहीं है। जो हिन्दुस्तानी वहां पर इस बात का विरोध कर रहे हैं, उनको हिन्दुस्तान में भी झांककर देखना चाहिए। यहां तो मुम्बई जैसे बड़े और आधुनिक महानगर में बड़े-बड़े रिहायशी कॉम्पलेक्स ऐसे हैं जिनमें किसी धर्म या किसी जाति के लोगों के मकान खरीदने पर मनाही है, या उनके किराए पर भी वहां रहने की मनाही है। लोग ऐसी कड़ी नापसंद को लेकर अदालती लड़ाई तक लड़ रहे हैं, लेकिन शाकाहारी लोगों की बहुतायत वाली रिहायशी इमारतों में दूसरे घरों में मांसाहार का भी तगड़ा विरोध किया जा रहा है। ऐसी लड़ाई में वहां शिवसेना भी शामिल हो चुकी है, और ठाकरे परिवार के दूसरे नेता राज ठाकरे भी। ऐसे टकराव के कई मामले पुलिस तक जा चुके हैं। 
इस बात से बिल्कुल अलग एक दूसरी बात यह है कि एक अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने दो दिन पहले ही भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार को आगाह किया है कि उसके मंत्री जिस तरह से गोमांस को लेकर या धर्म और जाति के मुद्दों को लेकर आक्रामक बयान दे रहे हैं, उससे दुनिया में भारत और मोदी सरकार की साख को नुकसान पहुंच चुका है। और इस बात को जानने के लिए भारत के समझदार लोगों को मूडीज की जरूरत नहीं है, यहां पर देश के एक सबसे प्रतिष्ठित कम्प्यूटर-उद्योगपति नारायण मूर्ति ने कल ही यह चेतावनी दी है कि देश में अल्पसंख्यक डरे हुए जी रहे हैं, और ऐसे माहौल से देश की आर्थिक तरक्की को भी नुकसान पहुंच रहा है। 
हिन्दुस्तान में मोदी सरकार से जुड़े हुए जो लोग आज देश में बहुत हमलावर तेवरों के साथ धर्मान्धता और कट्टरता फैला रहे हैं, उनको यह अंदाज नहीं है कि दुनिया के दूसरे देशों में जाकर मोदी भारतवंशियों के बीच जिस तरह की लोकप्रियता साबित कर रहे हैं, वे भारतवंशी भारत की आज की धर्मान्ध हवा का नुकसान उन देशों में काम करते हुए भी झेल रहे हैं। भारत के लोगों को पूरी दुनिया में शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है कि जो देश इक्कीसवीं सदी की दुनिया की एक सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने का दावा कर रहा है, वह अठारहवीं सदी के भी पहले की सोच को लगातार बढ़ाते चल रहा है, और उसी सोच से सड़कों पर कत्ल कर रहा है। जिन लोगों को हिन्दुस्तान में झंडे-डंडे लेकर एक फर्जी इतिहास को दुबारा भविष्य बनाने का अभियान सुहा रहा है, वे पूरे देश के भविष्य को तबाह कर रहे हैं। धर्मान्धता और कट्टरता के चलते खाड़ी के बहुत से देश, भारत के पड़ोस का पाकिस्तान, और अफ्रीका के कुछ देश इस तरह की तबाही में पहुंच चुके हैं कि वहां पहुंचकर दुनिया के कोई पूंजीनिवेशक एक चवन्नी  भी न लगाएं। 
भारत के लोगों की ऐसी तस्वीर दुनिया में बन रही है कि दूसरे देशों में बसे हुए हिन्दुस्तानियों के साथ शादी करने के पहले भी दूसरी संस्कृतियों के लोग चार बार सोचेंगे, और उनके साथ एक फ्लैट में रहने से भी कतराएंगे। और ऐसा भी नहीं है कि दुनिया में नौकरी देने वालों, कारोबार करने वालों के मन में किसी व्यक्ति को लेकर उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक सोच मायने नहीं रखती। आज का भारत जिस तरह का धब्बा बाहर के भारतवंशियों पर लगा रहा है, उससे एक अघोषित नुकसान उन सबको झेलना पड़ रहा है। भारत में जो मूढ़ लोग गाय को बचाकर, और झूठे आरोप लगाकर इंसान मारकर खुश हो रहे हैं, उनको बाकी दुनिया का कोई अंदाज ही नहीं है। लेकिन नरेन्द्र मोदी अगर अपने बचे कार्यकाल में देश को आगे ले जाना चाहते हैं, तो उनको अपने धर्मान्ध और हिंसक साथियों को काबू में रखना होगा, अगर वे ऐसा चाहते हैं तो। 

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