औरों की जिंदगियां बचाते जान देनी वाली बहादुर छत्तीसगढ़-महतारी महिलाएं

संपादकीय 
3 नवंबर 2015
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीती रात दो ऐसी महिला कामगारों की मौत हुई है, जिनकी बहादुरी की अधिक चर्चा शायद न हो। ये दोनों एक कन्या-छात्रावास में खाना पकाने का काम करती थीं, और वहां रसोई में गैस सिलेंडर में आग लगी, तो जलते हुए सिलेंडर को तीन महिलाओं ने उठाकर बाहर फेंका, और इसी कोशिश में वे बुरी तरह झुलस गईं, और इनमें से दो की मौत अस्पताल में हो गई। इस वक्त हॉस्टल में बहुत सी लड़कियां थीं, और सिलेंडर अगर फटता तो उन सबकी जान जा सकती थी। इन लगभग मजदूर महिलाओं के सामने भी यह रास्ता तो खुला हुआ था ही कि वे भी भागकर अपनी जान बचा लेतीं, और सिलेंडर की आग बुझाने का काम फायर ब्रिगेड जब पहुंचती, तब वह करती। लेकिन इन्होंने जान पर खेलकर जलते सिलेंडर को बाहर निकाला, और अपनी जिम्मेदारी से अधिक का यह खतरनाक काम करते हुए खुद की जान दे दी, लेकिन बाकी लोगों को बचा लिया।  पता नहीं केंद्र या राज्य सरकार के बहादुरी के पुरस्कारों में ऐसी बहादुरी के लिए कोई पैमाना है या नहीं, लेकिन ये गरीब महिलाएं किसी तरह अपने परिवार को चला रही थीं, और इनके चले जाने से इनके घरों की कमर टूट गई होगी। 
बस्तर जैसे नक्सल मोर्चे हों, जहां पर कि तैनात पुलिस को यह पता रहता है कि जान खतरे में डालकर ही ड्यूटी करनी है, तो वहां तो बहादुरी की उम्मीद की जाती है। इसी तरह दमकल कर्मियों से भी आग बुझाते हुए खतरों से जूझने की उम्मीद की जाती है। लेकिन जब मामूली काम में लगे हुए लोग एक गैरमामूली हौसला दिखाते हैं, तो उनकी स्मृतियों का सम्मान सरकार को भी करना चाहिए, और समाज को भी। दरअसल ऐसा हौसला दिखाने वाले लोग बहुत कम होते हैं, अधिकतर लोग तो किसी खतरे के वक्त अपने परिवार की सोचकर पीछे हट जाते हैं, या आंखें बंद कर लेते हैं। जब कोई गरीब-मजदूर महिला खतरे में कूदती है, तो वह अपने पूरे परिवार की हिफाजत को दांव पर लगा देती है। छत्तीसगढ़ में इन तीन महिलाओं ने जो हौसला दिखाया है, उसे हम किसी हादसे में गुजरने वाले आम लोगों की आम मौत की तरह नहीं मानते। हमारा मानना है कि सरकार को इनके लिए आज घोषित मुआवजा बढ़ाना चाहिए, और जिस विभाग के छात्रावास की बच्चियों को बचाने के लिए इन महिलाओं ने अपनी जिंदगी दी है, उस विभाग के नेताओं और अफसरों को भी इनके परिवारों की सीधी मदद करनी चाहिए। ऐसा अगर नहीं होगा, तो बहुत से लोग इस मामले की गंभीरता को भी नहीं समझेंगे, और इनकी बहादुरी का कोई मूल्यांकन भी नहीं होगा।

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