धर्म को कान पकड़कर स्कूलों से बाहर निकाल देने की सख्त जरूरत

16 नवम्बर, 2015
संपादकीय 

ब्रिटेन की स्कूलों में धार्मिक प्रार्थनाएं बंद करने का विचार चल रहा है। लेकिन एक तरफ ब्रिटेन विचार ही कर रहा है दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि वहां एक नया कानून बना लिया गया है, और स्कूलों में धर्म की पढ़ाई को पूरी तरह से रोक दिया जा रहा है। अगर स्कूलें धर्म पढ़ाते मिलेंगी, तो उनको सजा दी जाएगी। और भारत में चारों तरफ फैलाई जा रही धार्मिक असहिष्णुता से लेकर पेरिस पर हुए ताजा धर्मांध हमले की खबरें तो हैं ही जिनके बाद आज से फ्रांस ने सीरिया की जमीन पर चल रहे आइसिस के आतंकी कैंपों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। 
दरअसल, जिंदगी में जो धर्म की जो जगह होनी चाहिए, उसे बढ़ाकर जिंदगी पर पूरी तरह और बुरी तरह थोप दिया जा रहा है। यह सिलसिला न सिर्फ जानलेवा हो रहा है, बल्कि दुनिया की तबाही भी साबित हो रहा है। देशों के बीच की तनातनी, आतंक से बचने और निपटने की महंगी तैयारी, कारोबार की तबाही, और लोगों की मानसिकता पर धर्मांध नफरत का वजन, इन सबके बढ़ते चलने से दुनिया की तरक्की एक टूटे हुए पांव की रफ्तार से चल रही है। लोगों के मन में एक-दूसरे देश के लिए, एक दूसरी संस्कृति के लिए, एक दूसरे धर्म के लिए जितना अविश्वास बढ़ता चल रहा है, जितना खून बह रहा है, वह भयानक है। और यह सब धर्म के नाम पर चल रहा है, शायद धर्म की वजह से चल रहा है। 
ऐसे में भारत में भी तमाम स्कूल और कॉलेजों से धर्म को पूरी तरह बाहर कर देना जरूरी है। जब धर्म किताबों में लिखी हुई अपनी कुछ अच्छी बातों से परे महज हिंसा के लिए इस्तेमाल हो रहा है, तो उसके बारे में कुछ सोचने की जरूरत है, और सार्वजनिक जिंदगी से उसकी दखल घटाने की जरूरत है। बच्चों को बचपन से ही अगर धर्म पढ़ाया जाए, और वे अपने चारों तरफ धर्म के नाम पर हिंसक इस्तेमाल ही देखते रहें, तो इससे उनकी मानसिकता पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। लोगों को धर्म को अपनी निजी आस्था तक सीमित रखना चाहिए, और सड़कों के किनारे अवैध कब्जों, अवैध निर्माण से लेकर सांप्रदायिक दंगों तक, नफरत और हत्या तक धर्म का इस्तेमाल खत्म करने का सिलसिला स्कूलों से ही शुरू करना पड़ेगा। 
ऑस्ट्रेलिया शायद कम्यूनिस्ट देशों के बाहर का पहला ऐसा देश है जिसने धर्म को कान पकड़कर स्कूलों से बाहर कर दिया है। दुनिया में जो और समझदार देश हैं, उनको भी इससे नसीहत लेनी चाहिए, खासकर भारत को। 
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