नए साल के मौके पर चर्चा करें खामियों से आजादी पाने और खूबियों को हासिल करने की

संपादकीय
27 दिसंबर 2015
नया साल दो-चार दिन में ही दरवाजा खटखटाते आने वाला है, और नववर्ष की पूर्वसंध्या पर लोग यह तय करने लगेंगे कि आने वाले बरस में वे क्या-क्या करेंगे, और क्या-क्या नहीं करेंगे। यह मौका बहुत से सपनों को देखने का होता है, और अपने आपके लिए तरह-तरह के झांसे खड़े करने का भी होता है। लेकिन बेहतर यह है कि लोग अपने इस बीत रहे बरस पर एक नजर डालें, यह याद करें कि पिछले बरस इस हफ्ते में उन्होंने क्या-क्या तय किया था, और खुद से किए गए उन वायदों का साल भर में क्या हुआ, वैसा क्यों हुआ, और उसके बाद इस बरस के बारे में सोचना चाहिए। लेकिन नए साल का यह मौका नए कैलेंडर, नई डायरी, और नए संकल्पों का रहता है, और इसका इस्तेमाल भी करना चाहिए। 
दुनिया में भला ऐसे कौन से इंसान हो सकते हैं जिनमें कोई खामियां न हों, और जिनको अपने आपको बेहतर बनाने की कोई संभावनाएं न सूझ सकें। लोगों को अगले दो-तीन इस बारे में सोचना चाहिए कि नए साल की पहली सुबह से वे कौन से बुरे काम छोड़ सकते हैं, और कौन से अच्छे काम शुरू कर सकते हैं। हमने शायद पिछले बरस भी ऐसे ही मौके पर इन्हीं बातों को लिखा था, और हर बरस इसकी जरूरत भी है। आगे हम जो लिखने जा रहे हैं, वे बहुत से लोगों को कुछ अधिक मामूली बातें लग सकती हैं, लेकिन हमारे पाठकों के शुभचिंतक होने की वजह से हमको यह लगता है कि इन बातों को लिखना जरूरी है ताकि पढऩे वाले सभी लोग आसपास भी इसकी चर्चा कर सकें, और परिवार के सारे लोग, दोस्तों की सारी टोली, दफ्तरों के सारे लोग कुछ बेहतर कर सकें। 
आज जो सबसे जरूरी बात लगती है वह दुपहिया चलाने वालों के हेलमेट लगाने की है, और कार चलाने वालों के सीट बेल्ट लगाने की है। चलाने वालों के साथ-साथ बैठने वालों के लिए भी यह बात उतनी ही जरूरी है। अभी जो लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं उन्हें एक तारीख का इंतजार करने के पहले ही इसे पढ़ते ही ऐसा करना चाहिए, क्योंकि इन शब्दों के छपने से लेकर एक तारीख के बीच बहुत सी जिंदगियां खत्म होने जा रही हैं, जो कि हेलमेट या सीट बेल्ट की सावधानी नहीं बरतेंगी। 
दूसरी बात जो इस पहली बात की तरह ही हर किसी को मालूम है, लेकिन लोग अपने आपको उस खतरे से भी परे मानकर चलते हैं, वह है तम्बाकू की। सिगरेट से लेकर गुटखा तक, हिन्दुस्तान में मुंह, गले, और फेफड़े के कैंसर के सबसे बड़े जिम्मेदार सामान हैं। शायद ही कोई इंसान हो जिसे यह जानकारी न हो, लेकिन फिर भी लोग अपनी इस खतरनाक आदत को छोड़ते नहीं हैं, और अपने घरवालों के कंधों पर अपनी लाश के बोझ की तस्वीर साफ-साफ देखते हुए भी उसे अनदेखा करते चलते हैं। यह मौका पूरे परिवार और तमाम दोस्तों के यह तय करने का भी है कि वे खुद भी इस आदत को छोड़ें, और आसपास के तमाम लोगों से इसे छुड़वाने की कोशिश भी करें। तम्बाकू और कैंसर का जन्मजात रिश्ता है, और इसे सामने आने में वक्त लग सकता है, लेकिन ऐसी मौत से बचाव नहीं हो सकता। और जितने पैसे लोग इस लत पर खर्च करते हैं, उतने पैसों में वे रोज कम से कम एक-दो भूखे लोगों के पेट भर सकते हैं। 
एक बात यहां पर यह भी याद दिलाना ठीक है कि आज मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के जमाने में लोग अर्जी-फर्जी तस्वीरों और बातों को, एक-दूसरे के बारे में या किसी नेता, किसी चर्चित इंसान के बारे में लिखी गई गंदी बातों को तेजी से आगे बढ़ाते चलते हैं। इस नए साल में लोगों को इस बारे में भी सोचना चाहिए कि कल को अगर उनके परिवार की किसी लड़की या महिला के बारे में वैसी बातें फैलने लगें, तो उनके दिल पर क्या गुजरेगी, और वे उसे कैसे रोक सकेंगे? सच या झूठ किसी भी तरह की ऐसी बात, जिससे भला किसी का नहीं है, लेकिन निजी जिंदगी की निजता जिससे खत्म होती हो, ऐसी बातों को फैलाने वाले दूसरों की इज्जत तो कम बिगाड़ते हैं, अपनी खुद की इज्जत अधिक बिगाड़ते हैं कि वे किस तरह की बातें फैलाने वाले गैरजिम्मेदार या मुजरिम किस्म के लोग हैं। लोगों को यह तय करना चाहिए कि वे नफरत फैलाने वाली बातें, हिंसा फैलाने वाली बातें, किसी की निजी जिंदगी में ताकझांक करके निकाली गई बातें आगे बढ़ाने के पहले पल भर को यह सोचेंगे कि यही सब अगर उनके परिवार के साथ होगा तो उनको कैसा लगेगा। 
इसी तरह सार्वजनिक जीवन में लोगों को अपने बर्ताव के बारे में सोचना चाहिए कि गंदगी फैलाने, गालियां बकने, लोगों के साथ बदसलूकी करने, सड़कों पर अपनी गाडिय़ां अड़ाने जैसे काम करके वे अपनी खुद की बेइज्जती अधिक करते हैं, दूसरों के लिए दिक्कत कम खड़ी होती है। आज कदम-कदम पर लोग कैमरों और वीडियो कैमरों से लैस हैं, आपकी हर हरकत की कोई वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकते हैं, और बात की बात में वैसी क्लिप इंटरनेट पर, मोबाइल फोन फैल सकती है। ऐसी गंदगी फैलाने वाले लोग अपनी खुद की एक बड़ी बदनामी करा सकते हैं। इसलिए गालियां देने के पहले भी यह सोच लें कि अपने मां-बाप के सामने, अपने बच्चों के सामने वे कौन-कौन सी गालियां दे सकते हैं, क्योंकि फैला हुआ वीडियो तो उनके अपने घर तक भी पहुंच ही सकता है। 
हम इस लिस्ट को अखबार के कई पन्नों तक फैला सकते हैं, लेकिन हम इस चर्चा को शुरू करके लोगों के लिए छोड़ रहे हैं, और उम्मीद करते हैं कि हमारे पाठक अपने-अपने घर-बाहर के दायरों में इस पर चर्चा करेंगे, और अपने-अपने हिसाब से तय करेंगे कि वे इस अगले बरस में कौन-कौन सी खामियों से आजादी पाएंगे, और कौन-कौन सी खूबियों को हासिल करेंगे। जो लोग अपने आपको बेहतर नहीं बना पाएंगे, वे दुनिया में बेहतर बनने वाले बाकी लोगों के मुकाबले वैसे भी पिछड़ जाएंगे, और उनके मुकाबले वैसे भी खराब दिखने लगेंगे। इसलिए जिंदगी के आने वाले दिन बेहतर बनाने की कोशिश करना हर जिम्मेदार की जिम्मेदारी है। 

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