रोजगार का बुरा बाजार बेहतर और काबिल बनने की बड़ी जरूरत

6 दिसंबर 2015
संपादकीय

देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक, टाटा स्टील, ने ब्रिटेन में अपने एक कारखाने में सात सौ से अधिक लोगों को निकालने की तैयारी कर ली है। इसी तरह दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियां बुरी तरह से छंटनी करने जा रही हैं, और बड़े-बड़े ब्रांड इस बात के लिए आए दिन खबरों में हैं। ये खबरें भी तब बनती हैं जब सैकड़ों या हजारों लोगों को एक साथ हटाया जाता है, जब थोड़े-थोड़े लोग हटते चलते हैं, या जब रिटायर होने वाले लोगों की जगह किसी और को नियुक्त नहीं किया जाता, तो कोई खबर भी नहीं बनती। कुल मिलाकर हम यह कहना चाहते हैं कि दुनिया के कामगारों और बेरोजगारों, सभी को यह समझ लेना चाहिए कि कामकाज का बाजार अब आसान नहीं रह गया है। इसकी कई वजहें हैं, और अब वे दिन लद गए, जब झंडे-डंडे लेकर मजदूर संगठन छंटनी को रोक लेते थे। आज दुनिया के अधिकतर देश ऐसी किसी छंटनी के खिलाफ नहीं हैं, जिनको रोकने से कारखाने ही बंद हो जाएं। भारत में भी दशकों तक वामपंथी सरकार के तहत चलने वाले कारखानों के बारे में जनधारणा यह है कि यूनियनबाजी के चलते यूनियनें तो बच गईं, लेकिन न कारखाने बचे, न नौकरियां बचीं।  खैर, हम अभी यूनियन और कारखाने के विवाद में जाना नहीं चाहते, क्योंकि इन दोनों के रिश्ते किसी भी देश के कानून में चाहे जैसे हों, हमारी आज की यहां की चर्चा का मकसद बेरोजगारों और कामगारों से उनके हुनर और उनकी काबिलीयत पर बात करना है।
दुनिया में रोजगार का कारोबार अभी तक तो कम्प्यूटरों का हमला झेल रहा था, अब वह रोबो के निशाने पर भी है। कारखानों में कब अधिकतर कामगारों की जगह मशीनी रोबो काम करने लगेंगे, यह अंदाज लगाना भी अब अधिक मुश्किल नहीं है। बिना किसी यूनियनबाजी के रोबो लगातार बिना रूके, बिना गलतियों के, बिना बोनस और बढ़ोतरी की मांग के काम करते रहेंगे, और कई किस्म के कारखानों में ये मालिक की भारी बचत भी करेंगे। दूसरी तरफ घर तक सामान पहुंचाने वाली बहुत सी कंपनियां द्रोन का इस्तेमाल करके डिलीवरी करना शुरू कर चुकी हैं, और आज दुपहियों पर जो लोग दौड़-दौड़कर सामान पहुंचाते हैं, उनके रोजगार विकसित देशों के महंगे बाजार में घटना शुरू हो जाएंगे।
ऐसी मिसालें अनगिनत हैं, लेकिन किसी भी कारोबार में आखिरी तक वे कामगार बचे रहेंगे जिनका काम सबसे अच्छा होगा। कोई भी कारोबार या कारखाना जब लोगों को निकालना शुरू करते हैं, तो सबसे कमजोर, या सबसे निकम्मे, सबसे गैरजरूरी को सबसे पहले निकालते हैं। आज दुनिया के बाजार में खर्च को घटाने का जो गलाकाट मुकाबला चल रहा है, उसमें किसी भी मालिक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे सामान में, तनख्वाह में, या किसी भी और खर्च में बर्बादी जारी रखें। नतीजा यह है कि लोग सबसे पहला काम गैरजरूरी लोगों से छुटकारा पाने का कर रहे हैं। कम्प्यूटरों से लेकर संचार तकनीक तक, और देश-दुनिया के आधुनिक ढांचे तक, बड़ी मशीनों से लेकर बड़ी गाडिय़ों तक, हर किस्म की चीजों से अब यह मैनेजमेंट के लिए आसान हो गया है कि कम लोगों के सहारे अधिक काम कर लिया जाए। इसलिए आज लोगों को यह ख्याल रखना चाहिए कि अगर वे अपने-आपको बेहतर नहीं बनाएंगे, अगर मेहनत और ईमानदारी से काम नहीं करेंगे, तो वे खुली सड़क पर खड़े रह जाएंगे। और छंटनी झेल रहे कारोबार किसी जरूरत से अगर नए लोगों को नौकरी पर रखते भी हैं, तो वे रोजगार के बाजार से सबसे अच्छे लोगों को छांटने की आजादी भी रखते हैं। आने वाले दिन लोगों के लिए और अधिक मुकाबले के रहेंगे, और इसके लिए जो लोग तैयार नहीं रहेंगे, वे बेरोजगार रहेंगे इसकी गारंटी है।

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