कुछ लोग गुजर जाते हैं, बिना कोई शून्य छोड़े, भरीपूरी दुनिया छोड़कर...

संपादकीय
22 जनवरी 2016

देश की विख्यात नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई कल गुजरी, तो वे सौ के करीब पहुंच रही थीं। इतनी लंबी जिंदगी, और दुनिया के कई देशों में सीखना, सिखाना, नृत्य की कई विधाओं में महारथ हासिल करना, यह सब आम बात नहीं है। अपनी बेटी मल्लिका साराभाई के साथ वे हजारों शिष्य-शिष्याओं का एक बहुत समुदाय छोड़ गई हैं। कल उनकी देह के इर्द-गिर्द जब बेटी और बाकी शिष्य-शिष्याएं नृत्य करके उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे थे, तो वह बड़ा अनोखा नजारा था। बहुत से लोग गुजरते हैं, और उनकी उम्र चाहे जो भी हो, उनके चाहने वाले, परिवार के लोग, रोते रह जाते हैं। किसी के गुजरने का दुख-दर्द तो एक स्वाभाविक बात है, लेकिन कुछ जिंदगियां ऐसी रहती हैं, जो शून्य नहीं छोड़ जातीं, एक बहुत ही संपन्न विरासत छोड़ जाती हैं, जो उनके गुजरने के दशकों बाद तक उनकी याद दिलाती रहती है, और उनका सम्मान भी बढ़ाती रहती है।
हर किसी के लिए यह तो मुमकिन नहीं हो सकता कि वे मृणालिनी साराभाई जैसे महान कलाकारों का दर्जा हासिल कर सकें, लेकिन एक मौत के बाद के श्मशान वैराग्य जैसे इस पल पर हमको लगता है कि लोगों को इतनी कोशिश तो करनी ही चाहिए कि उनके जाने के बाद उनका नाम सम्मान से लिया जा सके। बहुत से मामलों में किसी के गुजरने के बाद शोक सभा, या श्रद्धांजलि सभा में मृतक को सम्माननीय साबित करने के लिए लोगों को बहुत बड़े-बड़े सफेद झूठ बोलने पड़ते हैं, तब कहीं जाकर मृतक की इज्जत बच पाती है। लोग ताकतवर तो हो जाते हैं, मशहूर भी हो जाते हैं, दौलतमंद भी हो जाते हैं, और बड़े ओहदों पर भी पहुंच जाते हैं, लेकिन असली इज्जत के हकदार बनना खासा मुश्किल होता है। और ऐसा करने के लिए किसी कला में पारंगत होना जरूरी नहीं है, जिंदगी में छोटे-छोटे अच्छे काम करते हुए भी लोग ऐसे हो सकते हैं कि उनके गुजरने पर घरवालों के रोने-पीटने से अधिक भी कुछ हो सके, और लोगों के कुनबे, या उनके नौकर-चाकर, या उनके संगठन के लोगों से परे भी उनके कुछ नामलेवा दिखते रहें। 
अच्छे काम करने के लिए किसी ऊंची और लंबी सीढ़ी पर एक साथ चढऩे की जरूरत नहीं रहती है। रोज अगर लोग किसी अच्छे काम की सोचें और रोज कुछ अच्छा काम करते चलें तो भी धीरे-धीरे जिंदगी में उनके किए हुए अच्छे काम की ऐसी लंबी फेहरिस्त बन सकती है कि उनका कुल मिलाकर हिसाब-किताब ही उन्हें महान योगदान के लिए गिन सकता है। और जो लोग सचमुच बड़े और महान बनते हैं, वे बड़े और महान बनने के मकसद को लेकर आगे नहीं बढ़ते, वे अच्छा करते चलते हैं, और महानता आकर उन्हें गले लगा लेती है। जिंदगी में जो लोग जिस काम को कर रहे हैं, जिस दायरे में जी रहे हैं, जिन लोगों के साथ उनका बर्ताव है, उन सब जगहों पर अगर लोग अपने आपको बेहतर बनाने में लगे रहें, बेहतर काम करते रहें, तो दुनिया की तस्वीर बदल सकती है। 

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