इस राज्य को जरूरत है एक इवेंट मैनेजमेंट-निगम की

संपादकीय
11 जनवरी 2016

छत्तीसगढ़ में सरकार के कई निगम-मंडल, या आयोग ऐसे हैं, जो कि नाम के हैं, और राजनीतिक मनोनयन से वहां लोगों को कुर्सी, दफ्तर, बंगला, दर्जा तो मिल जाता है, लेकिन उनका कोई काम नहीं होता। दूसरी तरफ यह राज्य लगातार प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर के ऐसे कार्यक्रम देखते रहता है जिनमें सरकार का बहुत बड़ा अमला लगातार जुट जाता है। लोग दफ्तरों में बैठकर काम नहीं करते, और कभी स्टेडियम में खड़े तैयारी करवाते रहते हैं, तो कभी राज्योत्सव के मैदान पर किसी और कार्यक्रम के लिए जुटे रहते हैं। इस राज्य में एक-एक कार्यक्रम के लिए अलग-अलग विभागों के लोग लगते हैं, और जरूरत एक ऐसे निगम या मंडल की है जो कि सरकार के सभी विभागों के लिए कार्यक्रमों का इंतजाम करे। 
आज केन्द्र सरकार अपने मंत्रालयों को मिलाकर उनकी गिनती घटा रही है, राज्य में भी निगम-मंडल को प्रदेश की जरूरतों के मुताबिक दुबारा ढालने की जरूरत है। एक ऐसा निगम यहां पर चाहिए जो कि राज्योत्सव से लेकर सिरपुर उत्सव तक, या राष्ट्रीय खेलों से लेकर प्रधानमंत्री के प्रवास तक का इंतजाम कर सके। यह काम एक अलग तरह की विशेषज्ञता का रहता है, और इसके लिए अलग शिक्षण-प्रशिक्षण पाए हुए लोगों की जरूरत रहती है। आज तो किसी बड़ी शादी में भी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी काम सम्हालती है, और उसके मातहत बाकी लोग काम करते हैं। राज्य सरकार चाहे जिस नाम से करे, उसे एक इवेंट मैनेजमेंट निगम की जरूरत है, ताकि सरकार के अपने नियमित विभागों के लोग इंतजामअली बनकर दफ्तरों से बाहर व्यस्त न रहें, और कार्यक्रम भी बेहतर तरीके से हो सके। 
आज हालत यह है कि राजधानी रायपुर एक जिले के रूप में प्रदेश की बहुत सारी योजनाओं में पिछड़ गया है, क्योंकि यहां के अफसर राज्य स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों, और देश-परदेश से आने वाले लोगों की मेजबानी में कई-कई दिन अपने दफ्तर से बाहर रहते हैं। राज्य सरकार को अपने ऐसे तमाम काम नियमित विभागों से परे कर देना चाहिए, और उससे ऐसे निगम की अपनी संपत्ति भी बनती चलेगी, सभास्थल बन सकेंगे, सभागृह बन सकेंगे, और इस पर सरकार का सैकड़ों करोड़ रूपए सालाना का खर्च घट सकेगा। आज सरकार के कई आयोग ऐसे कागजी हैं कि उनका इस्तेमाल सत्तारूढ़ पार्टी के लोगों का एक झूठा सम्मान बनाने के लिए किया जाता है। इसके बजाय सरकार को राज्य स्तर का एक आयोजन-निगम बनाना चाहिए, जो सरकार की तरफ से मेजबानी कर सके, टूर्नामेंट का इंतजाम कर सके, साहित्य महोत्सव करवा सके, पर्यटन और संस्कृति विभाग के कार्यक्रमों का इंतजाम कर सके। ऐसा न होने पर आज हर जगह लोग सरकारी दफ्तरों में धक्के खाते हैं, और अधिकारी शामियाने खड़े करवाते हुए बाहर दिखते हैं। 
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