हर प्रदेश के नौजवानों के इस जलसे की संभावनाएं

संपादकीय
12 जनवरी 2016

छत्तीसगढ़ में आज राष्ट्रीय युवा उत्सव में देश भर से हजारों नौजवान पहुंचे हुए हैं। यह एक बड़ा ही महत्वपूर्ण मौका है जब देश के तकरीबन हर राज्य से युवक-युवतियां यहां आए हैं, और चार-पांच दिनों तक उन्हें साथ में रहने, उठने-बैठने, और साथ काम करने का मौका मिलेगा। एक दूसरे की बोली, कला, संस्कृति, और उनके समकालीन मुद्दों को समझने का एक अभूतपूर्व मौका यह रहेगा। हमें यह तो नहीं मालूम है कि आयोजकों और आयोजन में शामिल होने वाले लोगों ने इस पीढ़ी की जिंदगी के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के अधिक से अधिक बेहतर इस्तेमाल की क्या तैयारी की है, लेकिन हमारी अपनी सोच है कि इन सभी लोगों को अपने खुद के दायरे तक सीमित रहने के बजाय, दूसरे तमाम प्रदेशों के अपने साथियों के साथ दोस्ती बनाने और बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। 
हमारा अपना लंबा अनुभव यह कहता है कि जिंदगी में इस तरह के मौके लोगों को स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई के मुकाबले कहीं अधिक सीखने का मौका देते हैं, और ये ही अंतरसंबंध लोगों को बेहतर इंसान बनाते हैं, अधिक जानकार बनाते हैं, और अधिक जागरूक बनाते हैं। इस कार्यक्रम में जो लोग पहुंचे होंगे उनमें से अधिकतर ने आधा दर्जन से अधिक राज्य नहीं देखे होंगे। और इनमें से बहुत कम ऐसे होंगे जो अपनी बाकी जिंदगी में भी भारत के दर्जन भर से अधिक राज्य देख पाएंगे। और फिर किसी राज्य को देखने का जो मतलब भारत में निकाला जाता है, वह वहां की कुछ दर्शनीय जगहों को देख लेने तक सीमित रहता है। जबकि होना यह चाहिए कि वहां की जिंदगी को देखा जाए। आज इंटरनेट और सोशल मीडिया की मदद से लोगों के बीच दूर बैठे हुए भी एक-दूसरे की जिंदगी को जानने के जितने रास्ते मौजूद हैं, उनको देखते हुए छत्तीसगढ़ के इस आयोजन के आयोजकों को चाहिए कि इसमें हिस्सेदार लोगों के लिए फेसबुक और ट्विटर जैसी वेबसाइटों पर अलग से पेज बनाएं, और यहां आए हुए, एक-दूसरे से मिले हुए, या न मिले हुए लोग इस दोस्ती को, इस संबंध को आगे बढ़ा सकें। अगर इन चार-पांच दिनों का रिश्ता आगे बढ़ता है, तो वही इस आयोजन की असली कामयाबी हो सकती है। 
देश के ऐसे नौजवान जो यहां मिल रहे हैं, वे अगर आगे एक-दूसरे के शहरों में, और प्रदेशों में जा सकें, उनके घरों में रूक सकें, उनके साथ उनका इलाका देख सकें, और फिर इस मेजबानी के जवाब में और दोस्तों को बुला सकें, तो यह पीढ़ी एक बेहतर समझ वाली हिन्दुस्तानी पीढ़ी होगी, उसकी सहिष्णुता बहुत अधिक रहेगी, उसमें धार्मिक उन्माद नहीं रहेगा, उसमें जातिवाद का जहर खत्म हो पाएगा, और उसमें क्षेत्रीयता भी एक आक्रामक भावना नहीं पनप पाएगी। इससे भी और आगे बढ़कर यह भी समझा जा सकता है कि किस तरह भारतीय समाज की लड़के-लड़की की असमानता, गरीब और अमीर की असमानता, खान-पान की असमानता, धार्मिक रीति-रिवाजों की असमानता घट सकेगी। लोगों में विविधता के लिए एक सम्मान पैदा हो सकेगा, और यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि इस कार्यक्रम से हो सकती है।
इस कार्यक्रम को एक सांस्कृतिक जमावड़ा बनाकर एक औपचारिकता भी पूरी हो सकती है, जिसमें चकाचौंध तो पूरी रहेगी, लेकिन जिसका राष्ट्रीय योगदान बड़ा सीमित रहेगा। इसलिए हम अभी से यह बात सुझाते हैं कि आने वाले चार दिनों में इस कार्यक्रम की मेजबान छत्तीसगढ़ सरकार को चाहिए कि यहां पहुंचे हजारों नौजवानों के बीच दोस्ती आगे बढ़ाने के लिए अलग से कई तरह की डिजिटल-कोशिश की जाए और यहां हुई पहचान को आगे बढ़ाया जाए, और यहां न हो पाई मुलाकात को वेबसाइट पर करवाया जाए। यह छोटी बात नहीं होती है कि देश के हर राज्य से लोग इस तरह पहुंचे और चार-पांच दिन साथ रहने का मौका मिले। अब तक भी जो तैयारी नहीं हो पाई होगी, उसके लिए भी इन सभी लोगों के संपर्क-सूत्र लेकर बात को बाद में आगे बढ़ाया जा सकता है। देश के इस नौजवान-कुंभ के लिए हमारी शुभकामनाएं, और हमारी उम्मीद कि इसमें आए तमाम लोग अपनी जिंदगी के लिए यहां से बहुत ही संपन्न अनुभव लेकर, अनगिनत दोस्ती लेकर लौटें। 

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