अमरीका-ईरान की समझदारी बाकी दुनिया के लिए मिसाल

संपादकीय
18 जनवरी 2016

अमरीका और ईरान के बीच तनाव घटने, ईरान पर से आर्थिक प्रतिबंध हटने, और दुनिया भर के देशों के साथ ईरान के बाजार खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम जमीन पर आ गए हैं। आज कच्चा तेल बारह बरस पहले के दाम पर आ गया है, और दुनिया भर में उन देशों की सरकारें इसे लेकर अधिक खुश होंगी, जहां पर तेल के दाम सरकार तय करती है। जहां-जहां निजी कंपनियां सरकारी नियंत्रण से परे यह काम करती हैं, वहां ग्राहक खुश होंगे। कुल मिलाकर ग्राहक या सरकार, जिसकी भी जेब में यह बेतहाशा बचत जा रही है, उसे यह तय करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय चढ़ाव-उतार वाले इस सामान से हो रही बचत का क्या किया जाए? 
हमारी आज की बात दोनों के लिए है, ग्राहकों को भी अगर सीधी बचत हो रही है, तो उनको सोचना चाहिए कि इस अप्रत्याशित बचत को बचाकर वे किस तरह रख सकते हैं ताकि किसी दिन अगर कच्चे तेल के दाम आसमान पर पहुंच जाएं, तो भी वे पेट्रोल-डीजल या रसोई गैस खरीद सकें। दूसरी तरफ सरकारों को भी यह चाहिए कि यह बचत बाकी बजट से अलग रखकर क्या इससे सीधे-सीधे सड़कों का ऐसा ढांचा खड़ा किया जा सकता है जिससे कि देश के लोगों को सहूलियत भी हो, और सड़कों का ईंधन भी बचे? होता यह है कि बचत कब आती है, और कब आदत बिगाड़ जाती है, यह पता भी नहीं चलता। लेकिन कल के दिन अगर खाड़ी के देशों में अमरीका या रूस, या वैसे किसी और देश के हमले से तेल के दाम आसमान पर पहुंच जाएंगे, तो उसके लिए दुनिया के कोई भी देश या ग्राहक तैयार नहीं होंगे। 
तेल के दाम तो इस चर्चा का एक बहाना है, असल बात तो यह है कि लोगों को अपनी निजी जिंदगी में ऐसी हर अचानक बचत का ऐसा इस्तेमाल करना चाहिए जिससे कि बुरे वक्त पर मदद ताक पर धरी रहे। लोगों को नशा छोडऩे, या फिजूलखर्ची छोडऩे से बचत की आदत डालनी चाहिए, और उसे स्वास्थ्य बीमा पर, या बीमारी के वक्त के लिए बचत पर लगाना चाहिए। लोग अगर थोड़ी सी सावधानी से सोचें, तो रोज वे दस-बीस रूपए तम्बाखू या ऐसी किसी और आदत से बचा सकते हैं, जिससे एक तरफ तो सेहत बचेगी, और दूसरी तरफ किसी बीमारी की नौबत आने पर उससे निपटने के लिए रकम भी रहेगी। 
अच्छे और बुरे दिन किसी को चि_ी लिखकर नहीं आते, और अमरीका और ईरान ने समझदारी दिखाते हुए जो अच्छे दिन दुनिया के लिए लाए हैं, उनसे सबक लेते हुए भारत और पाकिस्तान जैसे देशों को भी यह समझना चाहिए कि फौजी तनाव घटने से किस तरह के कारोबार बढ़ते हैं, और सभी देशों की कितनी बचत होती है। तेल के दाम गिरना एक बड़ी बात है, इससे पूरी दुनिया के कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। ऐसी ही समझदारी की जरूरत अफगानिस्तान से भारत तक आने वाली गैस की पाईप लाईन को लेकर दिखाने की जरूरत है, और भारत से लेकर कई दूसरे देशों तक रेल लाईन बिछाने की संभावना पर भी जरूरी है। लोगों के दिमाग अच्छे हो जाएं, तो अच्छे दिन तो अपने आप ही आ जाते हैं। 

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