पाकिस्तान की हिंसा को देखें, और भाजपा नेता की बात सुनें

संपादकीय
20 जनवरी 2016

पाकिस्तान के एक विश्वविद्यालय पर हुए तालिबानी हमले में अब तक दर्जनों मौतों की खबर आ रही है, और बड़ा आसानी से हमलावरों ने यह कर दिखाया है। पाकिस्तानी तालिबानी-दहशतगर्दों ने जो किया है, वह दुनिया के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले देश अमरीका में साल में कई बार होता है, और ऐसा कोई हमला भारत में अगर कहीं होगा, तो वह नामुमकिन नहीं रहेगा, और न ही ऐसे किसी हमले को रोकने के लिए किसी देश में पूरे इंतजाम किए जा सकते। पिछले दो दिनों से भारत में हैदराबाद के एक विश्वविद्यालय दलित मुद्दों को लेकर विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्रों में से एक की खुदकुशी के बाद एक बेचैनी बिखरी हुई है, और इस बीच केन्द्र की सत्तारूढ़ भाजपा के एक बड़े नेता संजय पासवान ने जो बयान दिया है, उस पर गौर करने की जरूरत है।  दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य संजय पासवान ने गंभीर चेतावनी जारी की है। संजय पासवान ने 2014 के चुनावों में पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे की कमान संभाली थी। हैदराबाद के छात्र रोहित की आत्महत्या के मामले में उन्होंने अपनी पार्टी का नाम लिए बिना, जैसे पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। संजय पासवान ने ट्वीट किया, सत्ता की राजनीति के भागीदारों को रोहित वेमुला प्रकरण को गंभीरता से लेना चाहिए या फिर विरोध, बदला, विद्रोह और प्रतिक्रियाओं के लिए तैयार रहना चाहिए।
भारत और पाकिस्तान के इन दो मामलों की तुलना कुछ लोगों अटपटी लग सकती है, लेकिन हम किसी तरह की तुलना करने के बजाय सिर्फ दो मामलों की चर्चा एक साथ कर रहे हैं, और अमरीकी विश्वविद्यालयों की भी। दुनिया के तमाम देशों को यह समझना होगा कि उनकी जमीन पर हिंसा के पीछे कौन सी वजहें हैं। क्योंकि अगर कुछ लोग हिंसा तय कर लेंगे, तो उनको रोकने में दुनिया की खासी बड़ी ताकत लग जाएगी। अमरीका में एक वजह हथियारों की अधिक मौजूदगी मानी जाती है, पाकिस्तान में यह बार-बार सामने आता है कि वहां कट्टरपंथी, धर्मान्ध आतंकी कभी फौज के उकसावे पर, तो कभी धर्म का नाम लेकर थोक में हिंसा करते हैं। पाकिस्तान की फौज भी ऐसे हमलों को रोक नहीं पा रही है, और गनीमत यह है कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबा तनाव चलते हुए भी पाकिस्तान के ऐसे घरेलू हमलों की तोहमत भारत पर नहीं लगाई जा रही क्योंकि वहीं के आतंकी अपना हाथ होने का दावा करते हैं। लेकिन भारत को कुछ दूसरी बातों के बारे में सोचने की जरूरत है। 
जैसा कि भाजपा नेता संजय पासवान ने कहा है कि सत्ता की राजनीति के भागीदारों को रोहित वेमुला प्रकरण को गंभीरता से लेना चाहिए या फिर विरोध, बदला, विद्रोह और प्रतिक्रियाओं के लिए तैयार रहना चाहिए, यह सामाजिक तनाव भारत में एक खतरनाक मोड़ ले सकता है। हम आए दिन इसी जगह इस बात को लेकर फिक्र करते हैं कि इस देश में जिस हमलावर तेवरों के साथ एक निहायत गैरजरूरी धार्मिक, साम्प्रदायिक, जाति आधारित हिंसा खड़ी की जा रही है, उसकी प्रतिक्रिया अनुपातहीन भी हो सकती है, और कल्पना से परे भी हो सकती है। कहीं दलितों को कुचला जा रहा है, कहीं आदिवासियों को, और कहीं अल्पसंख्यकों को। आज केन्द्र में मोदी सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े हुए बहुत से संगठनों के लोग जिस तरह से एक सवर्ण-ब्राम्हणवादी हिन्दुत्व को खान-पान से लेकर रहन-सहन तक थोपने में लगे हुए हैं, उसकी प्रतिक्रिया धर्मांतरण के रूप में तो सामने आ ही रही है, एक सामाजिक संघर्ष के रूप में भी सामने आ सकती है, जिसमें बड़ी हिंसा का बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है। भाजपा के एक दलित नेता ने जिन शब्दों में चेतावनी दी है, कम से कम उसे तो भाजपा को गंभीरता से लेना चाहिए, और अपनी पार्टी की सरकारों के देश-प्रदेश में उसे लागू करना चाहिए, और सहयोगी संगठनों को भी समझाईश देनी चाहिए। पड़ोस के देश में हिंसा की वजहें दूसरी हो सकती हैं, लेकिन हिंसा के वैसे खतरे को इस देश में भी हैं, और जब बहुत से तबकों को भारत में भी लगेगा कि यहां का लोकतंत्र उनके साथ इंसाफ नहीं कर पा रहा है, तो वे भी एक बगावत की तरफ देखने लगेंगे, जैसा कि भाजपा के संजय पासवान ने कहा है। 











































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