ताकत और प्रभाव का असर समाज के भले के लिए हो

संपादकीय
3 फरवरी 2016

छत्तीसगढ़ में कल राईस मिल मालिकों के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने सभी से रसोई गैस सब्सिडी छोडऩे की अपील की। एक अपील से ही डेढ़ हजार से अधिक मिल मालिकों ने केन्द्र सरकार की यह रियायत छोडऩे की घोषणा की है।  यह पहल सरकार के दूसरे स्तरों पर भी जरूरी है। देश में जो लोग आयकर पटाने वाले हैं, उनको कोई सरकारी रियायत लेनी भी नहीं चाहिए। मुख्यमंत्री अगर संपन्न लोगों  के हर कार्यक्रम में लोगों से ऐसे फॉर्म भरवाने का एक सिलसिला शुरू करें तो वे हर महीने कम से कम हजारों लोगों से तो रियायत वापिस करवा ही सकते हैं। 
बहुत पहले जब अविभाजित मध्यप्रदेश में एक अफसर रायपुर संभाग के आयुक्त थे, तो किसी भी शहर-कस्बे में दौेरे पर जाने, या किसी कार्यक्रम में बुलाए जाने पर  वे आयोजकों को पहले पेड़ लगाने की शर्त बतला देते थे। नतीजा यह हुआ था कि उनका नाम जे.एल. बोस को तोड़-मरोड़कर उन्हें झाड़ लगाओ बोस कहा जाने लगा था। और एक अफसर की पहल से यह काम होने लगा था। मुख्यमंत्री या राज्यपाल, या ऐसे दूसरे ताकतवर-ओहदों पर बैठे हुए लोग अपने प्रभाव से कई तरह के सामाजिक सुधार या विकास-कल्याण के कामों को बढ़ावा दे सकते हैं। 
इसी तरह की पहल किसी राज्य या शहर के उन तमाम बड़े आयोजनों में होनी चाहिए जहां पर लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इसी जगह हम राजिम कुंभ को लेकर पिछले बरसों में यह लिख चुके हैं कि जहां लाखों लोग पहुंचते हैं, वहां सरकार के अलग-अलग विभागों के अपने कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार का सस्ता रास्ता मिल सकता है। सरकार को चाहिए कि हेलमेट जैसे जान बचाने वाले छोटे से सामान के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए राजिम कुंभ में पहुंचने वाले लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जाए। इसी तरह सिगरेट-तम्बाकू से होने वाले कैंसर के प्रति लोगों को सचेत करने के लिए इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग को कोशिश करनी चाहिए। बाकी बातों के लिए भी अलग-अलग विभाग कुछ न कुछ कर सकते हैं क्योंकि यहां पर लाखों की भीड़ रेडीमेड मौजूद रहती है। 
सरकार या समाज चाहे तो यह पहल भी कर सकते हैं कि धार्मिक आयोजनों में पहुंचने वाले धर्मगुरुओं या प्रवचनकर्ताओं को समाज सुधार के संदेश फैलाने से जोड़ा जाए। धर्म का एक पहलू पाखंड का है, लेकिन धर्म का एक दूसरा पहलू बड़ी संख्या में लोगों पर असर का भी है। धर्म को अगर सकारात्मक बदलाव का साधन बनाने की कोशिश हो, तो आस्थावान लोगों पर उसका आसानी से गहरा असर हो सकता है। अगर कोई धर्मगुरू यह कहे कि ईश्वर के दिए हुए सिर को बचाना ईश्वर की उपासना के बराबर है, और आस्थावान लोग दुपहियों पर चलते हुए अगर हेलमेट नहीं लगाएंगे, तो वे ईश्वर के दिए हुए सिर का अपमान करेंगे, तो यह बात ट्रैफिक पुलिस की कही हुई बात के मुकाबले अधिक असर की होगी। ताकत और प्रभाव रखने वाले सारे लोगों को अपने असर का समाज के भले के लिए इस्तेमाल करना चाहिए, और जैसा कि मुख्यमंत्री ने गैस-सब्सिडी छुड़वाने का काम किया है, तो संपन्न तबकों के हर कार्यक्रम में ऐसी पहल जारी रखनी चाहिए। यह राज्य चाहे तो देश में आसानी से ऐसी सब्सिडी छोडऩे का रिकॉर्ड कायम कर सकता है। 

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