विदेशी छात्रा से बदसलूकी, फैलती नफरत का नतीजा

संपादकीय
04 फरवरी 2016

भारत में इंफरमेशन टेक्नालॉजी के सबसे बड़े केन्द्र समझे जाने वाले कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में एक सड़क हादसे के बाद उसमें शामिल लोगों के धोखे में एक अलग विदेशी छात्रा को पीटा, और उसके कपड़े फाड़ दिए। अफ्रीका के तंजानिया की 21 बरस की यह छात्रा किसी और कार में थी, और हादसा किसी और कार से हुआ था। इसे लेकर कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के मुखिया राहुल गांधी ने भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है, और केन्द्र सरकार ने भी इस मामले पर फिक्र जाहिर की है। यह मामला भीड़ की बेदिमागी का मानकर नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि पिछले बरसों में इसी कर्नाटक में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें रहते हुए उत्तर-पूर्वी भारत के लोगों को मार-मारकर भगाया गया था, और उनसे भरी हुई रेलगाडिय़ां बेंगलुरू से रवाना हुई थीं। इसी तरह आम आदमी पार्टी के एक मंत्री ने दिल्ली में एक अफ्रीकी महिला के घर पर छापा मारकर कई तरह की तोहमतें लगाई थीं, और वह एक बड़ा नस्लवादी मुद्दा बना था। 
भारत में हिन्दू और मुस्लिम, धर्मनिरपेक्ष और साम्प्रदायिक, भाजपाई और कांग्रेसी, ऐसे तबकों के बीच सहिष्णुता और असहिष्णुता की बहस बहुत ही हिंसक और अश्लील हो चुकी है, और इंसानों की हैवानियत खुलकर सामने आ रही है। ऐसे माहौल के बीच में भारत में विदेशियों को न्यौता देने के लिए पिछले ब्रांड एम्बेसडर आमिर खान से लेकर नए बनाए गए ब्रांड एम्बेसडर अमिताभ बच्चन तक खबरों में हैं। लेकिन क्या किसी मशहूर चेहरे के साथ अविश्वसनीय-भारत के नारे पर कोई तब विश्वास कर सकते हैं, जब इस तरह के हादसे होते रहें? 
भारत में विदेशियों का अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहता है। हत्या, बलात्कार, लूटपाट जैसे संगीन जुर्मों से परे, छोटी-मोटी ठगी, परेशान करने, और छेडख़ानी जैसे मामले लगातार होते रहते हैं। इसके बावजूद भारत में बहुत से गैर-इंसानी, कुदरती और ऐतिहासिक आकर्षण ऐसे हैं कि समर्पित-पर्यटक यहां आते ही रहते हैं। विदेशी सैलानियों का आम हिन्दुस्तानियों के साथ तजुर्बा बड़ा खराब भी रहते आया है, यहां के शहर, यहां की रेलगाडिय़ां, एक बहुत ही गंदी तस्वीर लोगों के सामने पेश करती हैं, भारतीय प्रदेशों की पुलिस जगह-जगह लोगों को परेशान करती हैं, और इसके बावजूद भारत सरकार या भारत के लोग उम्मीद करते हैं कि विदेशी सैलानी बड़ी संख्या में भारत आते रहें, ताकि भारत की कमाई बढ़ती रहे। 
इस देश को सलीका सीखने की जरूरत है, यहां की सरकार को कानून लागू करने की जिम्मेदारी समझने की जरूरत है, और हिन्दुस्तानी राजनीतिक दलों को यह समझने की जरूरत है कि जब लोगों के मिजाज में किसी भी तबके के लिए नफरत और हिंसा भरी जाती हैं, तो वे चार कदम आगे चलकर दूसरे तबकों के खिलाफ भी हमले करने लगती हैं। लोगों को किसी एक जाति, किसी एक धर्म, या किसी एक इलाके के लोगों के खिलाफ हिंसक बनाकर हालात काबू में नहीं रखे जा सकते। भारत में आज जिस तरह की हिंसक-असहिष्णुता चल रही है, वह जगह-जगह भारत की तस्वीर को बर्बाद कर रही है। एक नहीं, दस-बीस अमिताभ बच्चन भी आ जाएं, तो भी विदेशी सैलानियों के हिन्दुस्तानी-तजुर्बे के जख्मों को मरहम से भर नहीं सकते। इस देश में जब तक एक वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक समझ बढ़ाई नहीं जाएगी, यह देश हमेशा के लिए सदियों पहले की एक धर्मान्ध और कट्टर गुफा में भीतर धकेला जाता रहेगा। 

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