पूंजी निवेशकों को सुहाना लगना चाहिए छत्तीसगढ़

संपादकीय
15 फरवरी 2016

छत्तीसगढ़ सरकार महानगरों में जाकर देश के उद्योगपतियों और पूंजी निवेशकों को यहां आने का न्यौता दे रही है, और राज्य की खूबियां गिना रही है। बाकी देश के मुकाबिले अगर छत्तीसगढ़ पर एक नजर डाली जाए, तो वह बेमौके की बात नहीं होगी।
आज जब झारखंड, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्य दसियों हजार करोड़ के घोटालों में कई मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार या कटघरे में देख रहे हैं, तब छत्तीसगढ़ में सरकार अब तक ऐसी नौबत से बची हुई है। और यह इसी रमन सरकार का तीसरा कार्यकाल चल रहा है। जब देश के दर्जनभर राज्यों में जुटी हुई है, तब छत्तीसगढ़ में अभी तक स्वास्थ्य विभाग ऐसे एक मामले में फंसा है जो कि बाकी देश के मुकाबिले एक छोटा घोटाला है, शायद सौ-पचास करोड़ का।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने संभावित पूंजी निवेशकों के बीच इस राज्य की जो खूबियां गिनाई हैं, वे असरदार, वजनदार दिखती हैं, इस राज्य में मजदूर असंतोष से कोई हिंसा हुई है, ऐसे मामले इक्का-दुक्का ही इतिहास में दर्ज होंगे। उद्योगपतियों की  साजिश से शहीद शंकर गुहा नियोगी की हत्या हुई थी लेकिन पिछली आधी सदी में हुई ऐसी इस अकेली हत्या के अलावा राज्य शांत है। दिल्ली और हरियाणा में जिस तरह मजदूर, मैनेजरों को जला रहे हैं, वैसा यहां न है, और न शायद होगा। इस राज्य में पड़ोसी राज्यों, और दूर के राज्यों से आए मजदूरों के खिलाफ यहां कोई नफरत नहीं है, जैसी कि महाराष्ट्र में फैलाई जाती है।
छत्तीसगढ़ में कारखानेदार अपनी मनमानी करते हैं, खदानों से खूब चोरी होती है, लेकिन ये बातें शायद ही किसी पूंजी निवेशक को बुरी लगे। आजकल तो बड़े कारखानों और प्रोजेक्ट की रिपोर्ट तैयार करते हुए अलग से यह रिपोर्ट तैयार की जाती है कि किस राज्य में, किस सरकार में चोरी बेईमानी की कितनी गुंजाइश है। इस मामले में भी अब तक छत्तीसगढ़ ही किसी स्टिंग ऑपरेशन, भ्रष्टाचार के सुबूतों से बचा हुआ है। इस राज्य की सरकार का भ्रष्टाचार कर्नाटक, झारखंड और गोवा की तरह न जेल में है, न ही यहां सीबीआई ने राज्य सरकार के खिलाफ कोई केस ही दर्ज किया है। यह बात पूंजी निवेशकों के लिए कम तसल्ली की नहीं होती। इसके अलावा राज्य सरकार के भीतर, भाजपा में मुख्यमंत्री को लेकर पिछले 12 बरस से एक स्थिरता चली आ रही है। स्थिरता के कुछ और खतरे होते हैं, लेकिन पूंजी निवेशकों के नजरिए से देखें, तो उन्हें स्थिरता सुहाती है।
यह देश का अकेला राज्य है जहां जरूरत से अधिक बिजली है, जरूरत से अधिक खनिज हैं, देश के औसत से बहुत अधिक जंगल हैं। यह राज्य बंदरगाहों से जरूर दूर है, लेकिन देश के आधा दर्जन बड़े राज्यों के बीच है और यहां के औद्योगिक उत्पाद के लिए चारों तरफ बाजार है। उद्योगपतियों और पूंजी निवेशकों को तो यह बात भी सुहाती है कि किस राज्य में संगठित या आक्रामक मजदूर आंदोलन नहीं है। उसका नुकसान मजदूर हकों को चाहे कितना ही होता हो, पूंजी निवेश को तो वह पसंद ही आता है। पिछले साल दो साल से लगातार प्रदेश में औद्योगिक प्रदूषण के आंकड़े आ रहे हैं, और प्रदेश की हालत प्रदूषण के मामले में भयानक है। लेकिन इसके बावजूद यहां उद्योग धड़ल्ले से कानून के खिलाफ काम कर रहे हैं, और यह बात भी पूंजी निवेशकों को सुहाने वाली है, न कि उनका हौसला पस्त करने वाली।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को लेकर देशभर में यह जनधारणा है कि वे एक सज्जन व्यक्ति हैं। वे विवादों से परे रहने वाले व्यक्ति हैं और उन्होंने इस प्रदेश में साम्प्रदायिक हिंसा को रहने नहीं दिया। जब भाजपा के गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश जैसे राज्य साम्प्रदायिक के दाग-धब्बों से घिरे हैं, छत्तीसगढ़ में साम्प्रदायिक हिंसा की कोई जानलेवा वारदात नहीं हुई। रमन सिंह शायद अकेले भाजपाई मुख्यमंत्री हैं जो चुनावों में मंदिर-मस्जिद, मजहब, धर्मान्धरण जैसे कोई शब्द भी नहीं बोलते। और उद्योगपतियों को साम्प्रदायिकता से वैसे कोई तकलीफ नहीं लगती, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य की यह एक बात तो है ही कि यहां साम्प्रदायिक सद्भाव मजबूत है।
डॉ. रमन सिंह और उनके कुछ बहुत काबिल मंत्री-अफसर मिलकर अगर इस राज्य में पूंजी निवेश के साथ-साथ, गैर खनिज उद्योग भी ला सकेंगे, तो वह महत्वपूर्ण बात होगी। लेकिन जो एक बात बाकी देश के बारे में कही जाती है, वह छत्तीसगढ़ पर भी लागू होती है, कि यहां पर सरकारी अमला आसानी से किसी कागज को आगे नहीं बढऩे देता। इस कमजोरी से छुटकारा पाना न सिर्फ पूंजी निवेश लाने के लिए जरूरी है, बल्कि राज्य के भीतर सरकार की साख बढ़ाने के लिए भी जरूरी है।

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