ऐसी हमलावर सोच से खिसक रहा है भाजपा का जनाधार

संपादकीय
24 फरवरी 2016     
राजस्थान के एक भाजपा विधायक ने बड़े दिलचस्प आंकड़े पेश किए हैं कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से रोज इस्तेमाल किए हुए तीन हजार कंडोम निकलते हैं, और गर्भनिरोधक इंजेक्शनों की भी सैकड़ों में गिनती उन्होंने गिनाई है। वहां के कचरे में निकलने वाली रोजाना 50 हजार हड्डियों का बयान भी उन्होंने दिया है। राष्ट्रवाद को लेकर किसी विधायक का ऐसा समर्पण देखने लायक है कि वह एक पूरे विश्वविद्यालय कैम्पस में घूम-घूमकर इस्तेमाल किए हुए हजारों कंडोम को गिने, और यह साबित करने की कोशिश करें कि यह कितनी राष्ट्रविरोधी जगह है, और कैसा राष्ट्रद्रोह वहां पर चल रहा है। 
हिन्दुस्तान की जिस 21वीं सदी को बाकी दुनिया में घूम-घूमकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बेचने की कोशिश कर रहे हंै, उनकी पार्टी के नेता, सांसद और विधायक, मंत्री और सहयोगी मोदी की पहुंच से भी परे जाकर दुनिया भर में खबरें खड़ी कर रहे हैं, और हिन्दुस्तान की एक ऐसी तस्वीर बना रहे हैं जो कि रबर के आविष्कार के पहले की है। जिस देश में रबर के पेड़ों के जंगल रहते हों, जिस देश में सदियों पहले वात्सायन ने दुनिया का सेक्स का सबसे चर्चित गंभीर ग्रंथ लिखा था, जहां मंदिरों की दीवारों पर सेक्स की प्रतिमाएं सजी हुई हैं, जहां की सामंती संस्कृति में राजाओं और रईसों की औलादें सीखने के लिए नगरवधुओं के पास भेजी जाती रही हैं, जो देश रासलीला और श्रृंगारलीलाओं से समृद्ध रहा हुआ हो, उस देश में आज सेक्स को एक जुर्म की तरह पेश किया जा रहा है, और बीमारी से, अवांछित गर्भ से बचाने वाले कंडोम को इस जुर्म के एक हथियार की तरह बताया जा रहा है। ऐसी हमलावर और ओछी सोच रखने वाले, और उसका प्रचार करने वाले विधायक या सांसद अपनी पार्टी से पूरी की पूरी उस नौजवान पीढ़ी को काटकर अलग कर दे रहे हैं जिसके लिए कंडोम इस्तेमाल का एक सामान है, जो लोगों को मुसीबत से बचाता है। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी इस बात को शायद समझ नहीं पा रहे हैं कि भारतीय संस्कृति के इतिहास की एक फर्जी और फरेबी तस्वीर को जिस हमलावर अंदाज में लोगों पर लादा जा रहा है, उससे देश की जनता के बड़े-बड़े तबके भाजपा से कटते जा रहे हैं। जिस तरह से दलितों और आदिवासियों के खानपान की संस्कृति को कुचला जा रहा है, जिस तरह ईसा मसीह को एक तमिल ब्राम्हण साबित किया जा रहा है, जिस तरह मुस्लिमों और दूसरे अल्पसंख्यकों को गद्दार साबित करने की कोशिश हो रही है, और अब जिस तरह कंडोम को जुर्म का हथियार साबित किया जा रहा है, उससे बड़े-बड़े तबके भाजपा से कट रहे हंै, और बाकी तमाम खतरों और नुकसानों के अलावा, यह तो भाजपा का भारी चुनावी नुकसान भी हो रहा है। यह पार्टी जमीनी हकीकत से कटते हुए दिख रही है, और ऐसी आक्रामकता आत्मघाती होने के अलावा और कुछ नहीं है। 
हैदराबाद में एक दलित छात्र की आत्महत्या की बेबसी का मामला आज संसद में भी उठा है, और पूरे देश के दलित देश में खड़े किए जा रहे दलित-विरोधी, आदिवासी-विरोधी, अल्पसंख्यक-विरोधी, आधुनिकता-विरोधी माहौल को लेकर दहशत में भी हैं, और तनाव भी हैं। यह सामाजिक टकराव पूरे देश को अलग-अलग तबकों में बांट रहा है, और भारतीय संस्कृति के एक काल्पनिक इतिहास का दावा करने वाला पाखंड आज बाकी पूरे देश को उसी संस्कृति की कल्पना में ढालने पर आमादा है, और ऐसी मनमर्जी किसी लोकतांत्रिक समाज में चल नहीं सकती, और आने वाले किसी भी चुनाव में ऐसी हमलावर सोच भारी पड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न तो बाकी दुनिया में भारत की बिगड़ती तस्वीर को सम्हालते दिख रहे हैं, और न ही देश के भीतर अपने खिसकते हुए जनाधार को देख पा रहे हैं। यह नौबत बाकी देश और लोकतंत्र के लिए तो भयानक है ही, मोदी और भाजपा के लिए भी ऐसे हमलावर तेवर चुनावी-आत्मघाती हैं।

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