पान-मसाले को बढ़ावा देने वाले फिल्मी सितारों के परिवारों से दिल्ली सरकार की अपील अच्छी

संपादकीय
2 मार्च 2016  

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से दिल्ली सरकार ने कुछ फिल्मी सितारों की पत्नियों को चि_ी लिखी है कि वे अपने पतियों को समझाएं कि वे पान-मसालों के विज्ञापनों में मॉडलिंग न करें। पान-मसाले और गुटखा से कैंसर का खतरा रहता है, यह मेडिकल-जानकारी गिनाते हुए दिल्ली सरकार ने इन फिल्म-परिवारों से यह अपील की है कि वे इनके विज्ञापनों में शामिल न हों। 
चूंकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजनीति में नए हैं, और पहली बार सरकार में आए हैं, पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं, इसलिए उनके काम करने के कुछ तरीके परंपरागत नेताओं से कुछ हटकर हैं। यह काम देश और प्रदेश की हर सरकार कर सकती थी, और उनको करना भी चाहिए था। सरकारें अपने-अपने स्तर पर फिल्मी सितारों और मशहूर खिलाडिय़ों का इस्तेमाल अपने तरह-तरह के कार्यक्रमों की तरफ जनता का ध्यान खींचने के लिए करती ही हैं। आज ही चुनाव आयोग का यह समाचार आया है कि तमिलनाडू में सबसे मशहूर फिल्म अभिनेता रजनीकांत को वे वोटरों को प्रेरित करने के लिए अपने विज्ञापनों में इस्तेमाल करने जा रहा है। 
केन्द्र सरकार के कुछ विज्ञापनों में अमिताभ बच्चन लगातार दिखते हैं। दिल्ली सरकार की यह पहल नई है, और बहुत अच्छी भी है। बाकी प्रदेशों को भी, सरकार और समाज के स्तर पर ऐसे नुकसानदेह सामानों की मॉडलिंग करने वाले लोगों से सार्वजनिक अपील करनी चाहिए ताकि नई पीढ़ी बर्बाद होने से बच सके। अभी दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात के अपने प्रसारण में सचिन तेंदुलकर, विश्वनाथ आनंद जैसे मशहूर लोगों की आवाज में उनकी तरफ से छात्र-छात्राओं का हौसला बढ़ाने के लिए अपील को शामिल किया था। ये कुछ तरीके ऐसे हैं जो कि सरकार के आम तरीकों से हटकर हैं, और ऐसी कल्पनाशीलता का उपयोग समाज के भले के लिए करना चाहिए। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी अपने रेडियो प्रसारण में लोगों की निराशा को दूर करने की कोशिश करते रहते हैं। 
आज सोशल मीडिया की वजह से लोगों की कही हुई बातें चारों तरफ तेजी से फैल जाती हैं, अच्छी बातें भी, और बुरी बातें भी। जनसंचार का यह बड़ा औजार समाज के अच्छे और बुरे दोनों के लिए काम आ सकता है। केन्द्र सरकार, प्रदेशों की सरकारें, और स्थानीय म्युनिसिपल भी अपने स्तर पर इस तरह की पहल कर सकती है जिससे कि लोगों की बुरी आदतें छुड़वाई जा सकें। आज दिल्ली सरकार ने इन फिल्मी सितारों से, और उनके परिवार से जो अपील की है, उसका एक दूसरा नकारात्मक तरीका यह भी हो सकता था कि ऐसे नुकसानदेह खाने-पीने का इश्तहार करने वाले लोगों की फिल्मों का बहिष्कार करने की अपील की जाती। लेकिन उसका असर कम होता, और एक सकारात्मक अपील का असर अधिक होगा। लोगों को यह याद होगा कि एक वक्त फिल्म कलाकार गोविंदा एक ऐसे मंजन का इश्तहार करते थे जिसमें तम्बाखू था। बाद में इस पर बहस होने पर उन्होंने यह काम बंद कर दिया था। समाज की जागरूकता के लिए हर किसी को मौलिक पहल करने की जरूरत है। और दिल्ली सरकार की इस पहल को बाकी लोगों को भी अपने-अपने तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए। 

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