एक खेल और एक मैच लंबा सबक सिखा जाते हैं

संपादकीय
20 मार्च 2016  

कल जिन लोगों ने कोलकाता के ईडन गार्डन स्टेडियम में बैठकर भारत और पाकिस्तान का मैच देखा, और उनसे हजारों गुना अधिक जिन लोगों ने दुनिया भर में टीवी पर इसे देखा, उनको यह बात पता नहीं सूझी है या नहीं लेकिन हमारा पूरा ध्यान इस बात पर था कि स्टेडियम में उकसाने और भड़काने वाले कोई नारे तो नहीं लग रहे। लेकिन एक बहुत ही दोस्ताना अंदाज में मैच निपटा, दोनों टीम के खिलाड़ी एक-दूसरे की पीठ थपथपाते दिखे और राहत के साथ एक शाम गुजरी। 
सोशल मीडिया की मेहरबानी से दोनों देशों में जो बवाली लोग हैं, वे एक-दूसरे के खिलाफ बकवास करने को अपना जिम्मा समझते हुए भड़काने में लगे रहते हैं, और ऐसे ही लोग आनन-फानन यह तय कर लेते हैं कि गद्दार कौन हैं। जब पाकिस्तानी क्रिकेट कप्तान शाहिद अफरीदी ने भारत पहुंचते ही यह कहा कि पाकिस्तानी खिलाडिय़ों को भारत में पाकिस्तान से भी अधिक मोहब्बत मिलती है, तो पाकिस्तान में इसके खिलाफ लोग अदालत पहुंच गए, और शायद एक अदालत से अफरीदी को नोटिस भी जारी हो गया। दूसरी तरफ हिन्दुस्तान में सानिया मिर्जा के पीछे लोग इसलिए लग जाते हैं कि उन्होंने एक पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ी से शादी की है, हालांकि सानिया अब तक हिन्दुस्तानी नागरिक ही हैं, और पूरी दुनिया में टेनिस के खिताब जीत-जीतकर हिन्दुस्तान का नाम रौशन कर रही हैं। जब उन्होंने शादी की थी तो हिन्दुस्तान के साम्प्रदायिक लोगों ने, और इनमें से कुछ बड़े नेताओं ने, पार्टियों ने बयान दिए थे कि क्या सानिया को हिन्दुस्तान में शादी के लायक कोई लड़का नहीं दिखा? 
हमने कुछ दिन पहले भी भारत और पाकिस्तान के सिलसिले में यह लिखा था कि सरहद और राजधानियों में जो तनाव एक-दूसरे देश के खिलाफ भड़काया जाता है, और उस आग का टुकड़ा लाकर टीवी चैनल जिस अंदाज में आग भड़काने की कोशिश करते हैं, उसका सबसे सही जवाब खेल के मैदान, फिल्में, साहित्य, और नौजवानों की आपस में मुलाकात ही हो सकते हैं। दोनों देश के जो लोग बड़े ओहदों पर बैठे हुए हैं, उन्हें अपनी फौजी वर्दी के इस्तेमाल को जायज और जरूरी ठहराने के लिए नफरत और जंग की बातें करना पड़ता है। इसी तरह जो लोग सियासी राजनीति करते हैं, उन लोगों की भी यह बेबसी रहती है कि एक काल्पनिक दुश्मन खड़ा करके, उसके खिलाफ युद्धोन्माद खड़ा करके इस दहशत में अपने-अपने देशों में वोट बटोरे जाएं। लेकिन बार-बार सरहद के दोनों तरफ के खिलाडिय़ों ने यह साबित किया है कि वे जंगी तनाव को घटा सकते हैं, और खिलाड़ी भावना के साथ एक दरियादिली से एक-दूसरे को गले लगा सकते हैं। 
शाहिद अफरीदी ने हिन्दुस्तान आते ही भारतीय प्रशंसकों के बारे में जो कहा, वह बात पाकिस्तान के क्रिकेट प्रशंसकों को बुरा कहने के लिए नहीं थी, एक मेहमान खिलाड़ी एक मेजबान देश के क्रिकेट-शौकीनों की तारीफ की एक बुनियादी तमीज-तहजीब निभा रहा था। लेकिन नफरत पर जीने वाले लोग इस सामान्य शिष्टाचार के खिलाफ भी अदालत चले गए। कल कोलकाता में जिस अमन-चैन के साथ यह मैच हुआ, उसकी एक वजह यह भी है कि बहुत लंबे वामपंथी शासन और उसके बाद से ममता बैनर्जी के शासन में भी बंगाल में साम्प्रदायिकता को जगह नहीं मिली, उसे बढ़ावा नहीं मिला। यही मैच मुम्बई में न होने देने के लिए शिवसेना जान लड़ा देती है। इसलिए कल की इस शानदार कामयाबी से राज्य सरकारों को यह भी सीखना चाहिए कि वे अपने प्रदेश में जैसा सद्भाव रखते हैं, वह कदम-कदम पर नागरिकों के बर्ताव में भी झलकता है। यही बात अगर उत्तरप्रदेश में हुई रहती तो इस मैच के मौके का इस्तेमाल कई लोग नफरत को फैलाने में कर लेते। भारत की राज्य सरकारों को, और राजनीतिक दलों को गंभीरता से यह सोचना चाहिए कि प्रदेश में साम्प्रदायिक सद्भाव के लंबे फायदे होते हैं, और वे एक चुनाव के फायदों के मुकाबले कई गुना अधिक होते हैं। फिलहाल इस शानदार मैच के लिए, जीत-हार से परे, दोनों ही टीम बधाई की हकदार हैं। 

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