पाकिस्तान में परमाणु हथियार चोरी होने के खतरे की रिपोर्ट

संपादकीय
22 मार्च 2016  

अमरीका के एक गैरसरकारी संगठन ने अपनी शोध रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि पाकिस्तान में गैरसामरिक परमाणु हथियार बनाए जा रहे हैं, और इसके साथ ही उसके परमाणु हथियारों की चोरी का खतरा बढ़ गया है। इस गंभीर और महत्वपूर्ण थिंकटैंक की रिपोर्ट वजनदार मानी जा रही है, और भारत सहित दुनिया के बहुत से देशों के लिए यह फिक्र का एक बड़ा सामान है। 
दुनिया में परमाणु हथियार बनाने की ताकत रखने वाले देश गिने-चुने हैं। दर्जन भर से कम ऐसे देशों में से जिनमें सरकार पर कभी फौज और कभी आतंकियों की पकड़ होती रहती हैं, उनमें पाकिस्तान सबसे ऊपर है। वहां पर जिस तरह से धर्मान्ध कट्टरपंथी, अलोकतांत्रिक और तानाशाह, जंगखोर और हमलावर ताकतें समय-समय पर सरकार पर काबू करती हैं, उन्हें देखते हुए ऐसी सरकार के पास परमाणु हथियारों का होना अपने आपमें खतरनाक था, लेकिन अब अगर वहां की सरकार गैरसामरिक परमाणु हथियार भी बनाते चल रही है, तो किसी अपराध-कथा की तरह आतंकी संगठन वहां की कुछ ताकतों से ऐसे हथियार खरीद भी सकते हैं, और उनका इस्तेमाल जरूरी नहीं है कि मुंबई के आतंकी हमले जैसे किसी पड़ोसी पर ही हो, ऐसे हमले इन हथियारों को किसी दूसरे देश ले जाकर वहां पर भी हो सकते हैं। जिस अमरीकी मदद से पाकिस्तान में फौजी सामान खरीदा जाता है, और सरकार के हाथ मजबूत होते हैं, वह अमरीका दुनिया में आतंकियों का आज सबसे बड़ा और पहला निशाना है। इसलिए अमरीका के एक संगठन की इस रिपोर्ट को देखते हुए अमरीका को खुद को समझना चाहिए कि उसके दिए हुए पैसों का कैसा-कैसा इस्तेमाल हो रहा है। 
लेकिन ठीक पड़ोस में बसे हुए भारत को भी यह देखना होगा कि ऐसे किसी परमाणु-आतंक या परमाणु हमले की नौबत आती है तो वह खुद क्या करेगा। दुनिया के कई देश ऐसी नौबत आने पर सीधे-सीधे हमले के लिए तैयार रहते हैं। लेकिन भारत और पाकिस्तान के पास जितना परमाणु जखीरा है वह दोनों देशों को दस-बीस बार खत्म करने के लिए बहुत है। इसलिए समझदारी इसमें है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र मजबूत हो, और वहां की परमाणु तैयारियां घटें। भारत और पाकिस्तान दोनों की ही फौजी खर्च घटाना चाहिए, और अमरीका को चाहिए कि वह हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी फौजी सोच को बदले। 

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