मंदिर में आने पर महिलाओं को बलात्कार की धमकी!

संपादकीय
12 अप्रैल 2016
भारत के कई शंकराचार्यों में से एक, स्वरूपानंद सरस्वती ने एक बार फिर शिरडी के सांईबाबा पर हमला करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र में सूखा इसलिए पड़ा है क्योंकि वहां सांईबाबा की पूजा हो रही है। इसके पहले भी वे सांईबाबा के मंदिर बनाने और पूजा करने को लेकर हफ्तों तक बयानबाजी करते रहे हैं, और ऐसा करने वालों को हिंदू मानने से भी उन्होंने इंकार कर दिया था। अभी उन्होंने एक ताजा बयान में बड़ी दिलचस्प बात कही है कि नासिक के शनि शिंगणापुर शनि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से बलात्कार बढ़ेंगे। यह बात कई लोगों को नागवार गुजर रही है और महिला अधिकारों की बात करने वाले लोग शंकराचार्य पर टूट पड़े हैं।
लेकिन हमें शंकराचार्य की बात में दम दिखता है। धर्म से जुड़े हुए लोग जिस तरह महिलाओं का शोषण करते हैं, और जिस तरह मंदिरों में देवदासियों की प्रथा चलती है, एक से बढ़कर एक बाबा और गुरू सेक्स में लगे हुए पकड़ाते हैं, स्वामियों के वीडियो इंटरनेट पर तैरते हैं, इन सबको देखकर यह बात तो जाहिर है कि अगर महिलाओं का धर्मस्थलों पर जाना बढ़ेगा तो धर्म पर काबिज पुरूषों के हाथों उनके साथ बलात्कार अधिक हो सकते हैं। लेकिन शंकराचार्य ने जिस दकियानूसी तरीके से यह बात कही है, उसे धिक्कारने की जरूरत है।
लोग स्वरूपानंद सरस्वती को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुछ अधिक देखते हैं क्योंकि यहीं पर कांगे्रस के बहुत से नेता उनके भक्त और अनुयायी हैं, और बोलचाल की जुबान में उन्हें कांगे्रस शंकराचार्य कहा जाता है क्योंकि राजनीतिक मामलों में वे लगातार कांगे्रस की तरफ से और भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़ते आए हैं। लेकिन आज इस पर लिखने का एक दूसरा मकसद है। जब महिलाओं के खिलाफ ऐसे भयानक दकियानूसी बयान देने वाले धर्मगुरू आते हैं, और राज्य सरकारें उनको राजकीय अतिथि का दर्जा देती हैं, तो यह समझने की जरूरत है कि जनता का पैसा ऐसी हिंसक और महिला विरोधी बातें करने वालों पर क्यों खर्च किया जाता है। इस बारे में सवाल उठाने चाहिए, और छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश में स्वरूपानंद सरस्वती को मानने वाले नेताओं से उनके इलाकों में महिलाओं को सवाल करना चाहिए कि क्या वे भी मंदिर में जाने वाली महिलाओं को बलात्कार की धमकी देंगे?
यह देश धर्म के हाथों तबाह हो रहा है। आस्थावान लोगों में से जो लोग शांत रहते हैं वे मानकर चलते हैं कि धर्म का असर अच्छा ही होता है। लेकिन जिन पर असर ऐसा अच्छा होता है वे घर बैठे रहते हैं, और धर्म के नाम पर हिंसक बातें करने वाले सड़कों पर हथियार लेकर, या लाऊडस्पीकर पर महिला विरोधी, साम्प्रदायिक, और भेदभाव की आग लगाने वाली बातें करते हैं। छत्तीसगढ़ में जब कभी ऐसे लोग आएं, तब इन लोगों को घेरकर सवाल किए जाने चाहिए कि महिलाओं को अगर मंदिर में जाने से बलात्कार का खतरा बढ़ेगा, तो फिर महिलाएं किसी धर्मगुरू के आश्रम, या उनके प्रवचन में भी क्यों आएं?

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