आखिरी सांस तक कोशिश तो जारी रखनी ही चाहिए

संपादकीय
13 अप्रैल 2016
जिंदगी कैसी दिलचस्प रहती है, और कैसे-कैसे करवट बदलती है यह देखना हो तो अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को देखना चाहिए, और उन्होंने जिस भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को एक डिनर पर बुलाया है उनको भी देखना चाहिए। प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अमरीकी फिल्म-टीवी उद्योग में कई कामों में लगी हैं, और कुछ दूसरे फिल्म कलाकारों के साथ ओबामा ने प्रियंका को भी न्यौता भेजा है। अब इसमें चर्चा की बात यह है कि कल भारत के राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रियंका ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वे अभी हॉलीवुड में अपने सीरियलों में व्यस्त हैं और अभी यह तय नहीं है कि वे ओबामा की दावत में जा पाएंगी या नहीं। सच तो यह है कि जिस अमरीकी राष्ट्रपति की जिस दावत का न्यौता पाने के लिए लोग अपना दायां हाथ तक देने को तैयार हो जाएं, उसमें जाने के बारे में एक नौजवान भारतीय अभिनेत्री का ऐसा कहना, उसे मिले न्यौते के मुकाबले कई गुना अधिक महत्वपूर्ण है। 
दूसरी तरफ खुद बराक ओबामा को देखें, तो अमरीका के अश्वेत समुदाय का एक गरीब लड़का, जिसके मां-बाप अफ्रीका से अमरीका पहुंचे थे, वह आगे बढ़कर अमरीका का एक बेदाग राष्ट्रपति बनता है, यह अपने आपमें देखने लायक बात है। तीसरी बात यह कि असम में कल पहुंचे ब्रिटिश राजकुमार और राजकुमारी के सामने वहां का लोकनृत्य पेश करने वालों में तीन बरस का एक बच्चा भी था, और तीन बरस के उस बच्चे ने कीचड़सने अपने जूते से राजकुमारी के जूतों पर कीचड़ मल दिया। अब मजाक की बात यह है कि यह भारत को गुलाम बनाने के ब्रिटिश राजघराने के काम का हिसाब चुकता किया गया, और इस तरह यह बच्चा आजादी की पौन सदी बाद भी एक नया स्वतंत्रता सेनानी बन गया है। 
वक्त कई तरह की करवटें लेता है, जिंदगी के अलग-अलग पहलुओं में इतना कुछ होते रहता है कि उससे लोग फर्श से अर्श तक पहुंच जाते हैं, और कुछ गलत काम हों तो अर्श से फर्श पर पटक भी दिए जाते हैं। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही लें, बचपन में चाय बेचने के उनके दावे पर हालांकि कुछ लोग शक करते हैं, लेकिन ऐसे शक की कोई बुनियाद न होकर उन लोगों की नापसंदगी इसमें अधिक है। और चाय बेचने वाला एक बच्चा आगे बढ़कर किस तरह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का, सबसे बड़ी चुनावी कामयाबी के साथ बनने वाला प्रधानमंत्री हो सकता है, यह अपने आपमें हैरान करने वाली बात है। इस मुद्दे पर आज लिखने का मकसद यह है कि जो लोग जिंदगी से हताश और निराश होकर हथियार डाल देने की कगार पर हैं, उनको याद रखना चाहिए कि दुनिया का इतिहास ऐसे आखिरी पलों के पहले के हौसले से लिखा जाता है, हौसला छोडऩे से नहीं। इसलिए लोगों को याद रखना चाहिए कि जिंदगी में कभी भी, कुछ भी हो सकता है, वक्त करवट बदल सकता है, और नई संभावनाएं आ सकती हैं। इसलिए हर किसी को अपनी आखिरी सांस तक कोशिश तो जारी रखनी ही चाहिए।

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