सरहदें और हसरतें रोक देती हैं हकीकत का मजा

संपादकीय
1 अप्रैल 2016  

कल भारत वेस्टइंडीज से एक मैच क्या हार गया, टीम का मखौल बनने लगा। सोशल मीडिया की मेहरबानी से अब वे हर हाथ जो कुछ अक्षर टाईप कर सकते हैं, वे खिलाडिय़ों की निजी जिंदगी को लेकर भी तरह-तरह की गालियां और गंदी बातें लिख सकते हैं। इसके अलावा इतने तंग फासले वाले मैच में अगर जरा सी कसर रह जाए, तो खेल देखने वाले लोग इस तरह विचलित हो जाते हैं कि मानो उन्होंने उस जीत पर मोटा सट्टा लगाया हो, और भारत की हार से उनका दीवाला निकल गया हो। खेल को लेकर भावनाएं और उत्तेजना इस कदर हैं कि वेस्टइंडीज की टीम के रंग को लेकर, उनके हुलिए को लेकर, उनके गीत-संगीत और नाच को लेकर तरह-तरह की भड़ास निकाली जा रही है। देश के लोग एक असभ्य बर्ताव कर रहे हैं। 
लेकिन ऐसा बर्ताव हिन्दुस्तान का आम मिजाज है। लोगों को याद होगा कि एक किसी बड़े टूर्नामेंट को हारकर लौटे हुए धोनी के घर पर लोगों ने पथराव भी किया था और सड़कों पर कहीं तस्वीरों को जूतों से मारा था, तो कहीं पुतले जलाए थे। हिन्दुस्तानी मिजाज पुतला प्रेमी अधिक है। कभी किसी देवता के पुतले बिठाकर कई-कई दिन उसकी पूजा की जाती है, और कभी किसी राक्षस का पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। प्रतिमापूजक समाज में दिक्कत यही रहती है कि लोग जीत और हार को माला और जूते से जोड़ लेते हैं, जैसा रिजल्ट रहा, वैसा तोहफा खिलाडिय़ों के लिए तैयार रहता है। लोगों को यह सीखने की जरूरत है कि कोई खेल जीत से परे भी अच्छा रहता है, देखने लायक रहता है, और अपने देश की टीम की जीत की हसरत से परे खेल की खूबी की हकीकत का मजा लेना जो लोग नहीं जानते हैं, वे लोग खेल पर नाहक ही अपना समय बर्बाद करते हैं। 
लोगों को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रीयता, राष्ट्रप्रेम, और अपनी टीम से मोहब्बत के साथ-साथ खूबियों से मोहब्बत करना भी आना चाहिए। न सिर्फ खेल, बल्कि संगीत, फिल्म, साहित्य, कला, या दूसरी इंसानी खूबियों के मामले में लोगों को यह देखना चाहिए कि सरहदों से परे खूबियां क्या हैं। जैसे बांग्लादेश की टीम भारत के मुकाबले एक बड़ी छोटी आबादी वाले देश की टीम है। लेकिन भारत के मुकाबले गरीब देश के थोड़े से लोगों में से ऐसी शानदार टीम निकलकर आती है जो सवा सौ करोड़ की आबादी में से निकली टीम के नाक में दम कर देती है, और आखिरी बॉल तक सांस रोककर देखना पड़ता है। अपने देश से प्रेम ऐसा हमलावर नहीं होना चाहिए कि दूसरी टीम की हार की चाह रखते हुए मैच का मजा ही न लिया जा सके।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें